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पुलिस की आधी-अधूरी तैयारी से हुई आगजनी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 05 Jul 2016 02:28 AM IST
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अपहरत बच्चे की तलाश में पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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सोमवार शाम 6:00 बजे पुलिस ने हाथरस से जिशान की लाश बरामद कर ली थी। बवाल का अंदेशा था। आरोपी के मकान से 500 मीटर दूरी पर पुलिस फोर्स लगा दी गई। करीब तीन घंटे बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार को बताया कि जिशान का मर्डर हो गया है।
आरोपी पड़ोसी है, यह सुनते ही लोगों की भीड़ लगने लगी और पुलिस तमाशबीन बनकर देखती रही।देखते ही देखते हालात ऐसे बने कि वहां करीब एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने आरोपियों के घर पर धावा बोला, तब जाकर पुलिस की नींद टूटी।
लेकिन तब तक माहौल खराब हो चुका था। भीड़ तोड़फोड़ के बाद मकानों में आग लगा चुकी थी। पुलिस ने लोगों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ उनके ऊपर भी टूट गई। जिसके बाद पुलिस भी पीछे हट गई। बाद में पुलिस फोर्स ने पहुंचकर लाठीचार्ज किया तो भीड़ में भगदड़ मच गई। तब जाकर पुलिस ने महिलाओं को बचाया। लेकिन घर और उनमें रखा लाखों का सामान जलकर राख हो गया। पुलिस ने आग से निपटने के लिये फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी बाद में बुलाईं।
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पहली गलती से नहीं लिया सबक
18 दिसंबर को लिसाड़ीगेट में मकान पर कब्जा करने को लेकर सपा विधायक के भतीजे, भांजे ने सरेआम गोलियां बरसाई थी। जिस पर गुस्साए लोगों की भीड़ ने सपा विधायक के भतीजे समेत 25 लोगों को बंधक बनाकर हमला बोला था। जिसके बाद आरोपियों को पुलिस ने बचाया था। पुलिस ने उस घटना से भी सबक नहीं लिया। पुलिस को जानकारी थी कि हत्या की खबर फैलते ही इसकी कड़ी प्रतिक्रिया होगी। जिस पर काबू पाने के लिये पुलिस फोर्स की संख्या ज्यादा होनी चाहिए थी।
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आरोपी पड़ोसी है, यह सुनते ही लोगों की भीड़ लगने लगी और पुलिस तमाशबीन बनकर देखती रही।देखते ही देखते हालात ऐसे बने कि वहां करीब एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने आरोपियों के घर पर धावा बोला, तब जाकर पुलिस की नींद टूटी।
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लेकिन तब तक माहौल खराब हो चुका था। भीड़ तोड़फोड़ के बाद मकानों में आग लगा चुकी थी। पुलिस ने लोगों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ उनके ऊपर भी टूट गई। जिसके बाद पुलिस भी पीछे हट गई। बाद में पुलिस फोर्स ने पहुंचकर लाठीचार्ज किया तो भीड़ में भगदड़ मच गई। तब जाकर पुलिस ने महिलाओं को बचाया। लेकिन घर और उनमें रखा लाखों का सामान जलकर राख हो गया। पुलिस ने आग से निपटने के लिये फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी बाद में बुलाईं।
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पहली गलती से नहीं लिया सबक
18 दिसंबर को लिसाड़ीगेट में मकान पर कब्जा करने को लेकर सपा विधायक के भतीजे, भांजे ने सरेआम गोलियां बरसाई थी। जिस पर गुस्साए लोगों की भीड़ ने सपा विधायक के भतीजे समेत 25 लोगों को बंधक बनाकर हमला बोला था। जिसके बाद आरोपियों को पुलिस ने बचाया था। पुलिस ने उस घटना से भी सबक नहीं लिया। पुलिस को जानकारी थी कि हत्या की खबर फैलते ही इसकी कड़ी प्रतिक्रिया होगी। जिस पर काबू पाने के लिये पुलिस फोर्स की संख्या ज्यादा होनी चाहिए थी।