फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   ncr natvar laal arrested

एनसीआर का नटवर लाल गिरफ्तार, ऐसे खुली कलई

Sat, 15 Jul 2017 09:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Sat, 15 Jul 2017 09:46 AM IST
विज्ञापन
ncr natvar laal arrested
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

सुनिए मिस्टर, काम नहीं किया तो जांच होगी और तुम्हारा कॅरियर खराब हो जाएगा। पहले डाक से चिट्ठी भेजकर और फिर फोन कर अफसरों को हड़काकर मनमाना काम कराना उसका पेशा था। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाम के फर्जी लेटर पैड इस आरोपी ने छपवा रखे थे। इसके अलावा यह ठग खुद को कभी सुप्रीम कोर्ट का जज तो कभी मानवाधिकार आयोग का रजिस्ट्रार बताकर अफसरों को प्रभाव में लेता था। सात साल से एनसीआर में गैंग चलाकर मोटे पैसे वसूल चुका यह शातिर ठग शुक्रवार को लालकुर्ती पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

विज्ञापन


ऐसे खुली कलई
इंस्पेक्टर लालकुर्ती सुधीर कुमार के अनुसार रजबन बाजार निवासी ओमवती ने एक जुलाई को मारपीट और लूट के आरोप में दो लोगों पर नामजद केस दर्ज कराया था। दो जुलाई को एक व्यक्ति ने खुद को मानवाधिकार आयोग का रजिस्ट्रार बताकर उन्हें फोन कर ओमवती के केस में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कई बार उन्हें फोन कर धमकाया गया और रजिस्ट्रार के नाम से थाने में चिट्ठी तक भेज दी गई। यही नहीं, इस व्यक्ति ने एक सप्ताह पहले एसपी सिटी मानसिंह चौहान को भी फोन कर चेतावनी दे दी थी। शक के आधार पर पुलिस अफसरों ने गोपनीय जांच के बाद गंगानगर में दबिश देकर आरोपी अजय कुमार गर्ग (55 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। 
विज्ञापन


पीड़ितों के नाम पर ठगी
एसपी सिटी के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि यह आरोपी ऐसे पीड़ित लोगों को टारगेट पर लेता था, जिनका थानों या सरकारी विभागों में काम अटका होता था। ऐसे पीड़ितों से मोटा पैसा लेकर यह आरोपी इसी तरह अफसरों को दबाव में लेकर काम कराता था। पुलिस ने तलाशी के दौरान उसके कमरे से छह मोबाइल फोन, दर्जनों सिम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार, डीएम और एसएसपी के अलावा कई सरकारी विभागों के बड़े अधिकारियों के नाम के लेटर पैड बरामद किए हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कैराना से 13 साल पहले भागा था
पूछताछ में आरोपी अजय गर्ग ने बताया कि वह मूल रूप से कैराना (शामली) का निवासी है। वर्ष 2004 में वह कैराना से भागकर मेरठ आया था। एसपी सिटी के अनुसार इस संबंध में एक टीम शामली भेजकर इसका सत्यापन कराया जा रहा है। 

दिल्ली और एनसीआर में संगठित गैंग
इंटर पास बताए गए अजय का दिल्ली और एनसीआर में नेटवर्क फैला हुआ है। संगठित तरीके से चलाए जा रहे गैंग में एक सामाजिक संस्था से जुड़ी महिला समेत छह लोग हैं। जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही हैं। इस गैंग ने मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली समेत कई जिलों में अपने ऑफिस तक खोल रखे हैं।

एक बार जेल गया, फाइल गायब कराई
जांच में सामने आया कि लिसाड़ी गेट पुलिस ने वर्ष 2010 में अजय गर्ग को पीके गोयल के नाम से धोखाधड़ी के मामले में जेल भेजा था। आरोपी ने साठगांठ कर पीके गोयल को मृत बताकर फाइल बंद करा दी थी। नाम पता भी उसने फर्जी बताया था।


मुख्यमंत्री की चिट्ठी कई बार भेजी
पुलिस के मुताबिक आरोपी अजय ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्यमंत्री के अलावा आयोग के रजिस्ट्रार के नाम से कई बार कई विभागों के अफसरों को चिट्ठी भेजी। फर्जी तरीके से कई काम भी कराए तो कई अधिकारियों पर शिकायत करके जांच भी बैठवाई। यही नहीं, काम न होने पर यह रिमाइंडर जारी कर जवाब मांगता था। अफसरों को चेतावनी दी जाती थी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उनका कॅरियर खराब कर दूंगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed