बागपत जिला कारागार में पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में जिला जज की कोर्ट में गुरुवार को मुकदमे के वादी तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह की गवाही होनी है। उदय प्रताप को शासन ने बर्खास्त कर दिया था। उदय प्रताप गवाही के लिए पूर्व में सुरक्षा की मांग कर चुके हैं।
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: तत्कालीन जेलर की आज कोर्ट में गवाही, परदे के पीछे छिपे हैं अभी कई राज
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ये था मामला
पिछले वर्ष नौ जुलाई को जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन जेलर यूपी सिंह ने जेल में बंद सुनील राठी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने सुनील राठी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। चर्चित प्रकरण का ट्रायल जिला जज राम मनोहर मिश्रा की कोर्ट में चल रहा है। गुरुवार को वादी तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह की गवाही होनी है। उदय प्रताप सिंह गवाही पर आने से पहले सुरक्षा की मांग कर चुके हैं।
अब तक अदालत पहुंचा एक गवाह
इस प्रकरण में गवाहों को अदालत तक लाने में अभियोजन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। करीब छह माह बाद भी सिर्फ चिक काटने वाले सिपाही को ही अदालत में पेश कर गवाही कराई जा सकी है।
बड़ौत से बसपा के पूर्व विधायक एवं वर्तमान में भाजपा नेता लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से साल 2017 में मोबाइल के जरिये रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस की जांच में मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था। इस मामले में आठ जुलाई 2018 की रात बजरंगी को सुरक्षा के घेरे में बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। नौ जुलाई की सुबह सवा छह बजे बजरंगी की तन्हाई बैरक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद शासन ने लापरवाही उजागर होने पर जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, मुख्य बंदीरक्षक अरजिंदर सिंह और माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया था। नारायण सिंह की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है।
धनंजय सिंह पर आरोप, राठी पर मुकदमा
मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने बसपा के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, प्रदीप सिंह उर्फ पीके सिंह, इनके पिता पूर्व एसपी जयंत सिंह, सुशील सिंह और कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने सीमा सिंह की तहरीर को जांच में शामिल किया था। जांच में धनंजय समेत अन्य लोगों को क्लीन चिट दे दी गई थी। जबकि जेलर यूपी सिंह ने खेकड़ा थाने में सुनील राठी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।