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खून न मिलने से हादसे की शिकार बच्ची की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jun 2016 02:29 AM IST
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बच्ची का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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श्यामनगर में सोमवार दोपहर ई-रिक्शा की चपेट में आकर चार साल की बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। निजी अस्पताल में समय से बच्ची को ब्लड नहीं मिला तो उसकी मौत हो गई। तीन घंटे बाद ब्लड मिला, तब तक काफी देर हो चुकी थी। गुस्साए परिजनों ने ब्लड वापस न लेने पर हंगामा कर तोड़फोड़ कर दी। जिस पर अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्ची के चाचा को पीटकर अधमरा कर दिया। इसको लेकर टीपीनगर थाने में हंगामे के बाद तहरीर दी गई।
लिसाड़ी गेट क्षेत्र के रशीदनगर निवासी आसिफ की पत्नी और उनकी चार साल की बेटी सिमरा ई-रिक्शा से श्यामनगर अपने रिश्तेदार के यहां जा रहे थे। इस दौरान बच्ची ई-रिक्शा से गिरी और ई-रिक्शा उसके पेट पर चढ़ गया। गंभीर हालत में बच्ची को परिजनों ने हापुड़ अड्डा चौराहे के पास निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर ने बच्ची को खून की जरूरत बताई। जिस पर आसिफ का भाई बिलाल बागपत रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ब्लड लेने पहुंच गया।
आरोप है कि तीन घंटे तक स्टाफ ने उसको बैठाए रखा। तीन घंटे बाद बिलाल ब्लड लेकर अस्पताल पहुंचा। तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। देरी से ब्लड मिलने पर नाराज बिलाल अपने एक साथी के साथ वापस उसी अस्पताल पहुंचा। बिलाल ने ब्लड को वापस करते हुए अस्पताल के स्टाफ को बच्ची की मौत का कसूरवार बताया और तोड़फोड़ कर दी। आरोप है अस्पताल के स्टाफ ने बिलाल की पिटाई कर दी। बिलाल को बागपत रोड स्थित दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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अस्पताल और थाने में हंगामा
बिलाल पर हमले की सूचना पर पीड़ित परिवार के साथ युवा सेवा समिति अध्यक्ष बदर अली कार्यकर्ताओं के साथ बागपत रोड स्थित अस्पताल पहुंचे। हंगामा करते हुए अस्पताल के स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की। उसके बाद पीड़ित परिवार टीपीनगर थाने पहुंचा और मारपीट करने वाले अस्पताल के सात कर्मचारियों के खिलाफ तहरीर दी।
ब्लड मिलता तो बच जाती जान
पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर अस्पताल से समय से ब्लड मिल जाता तो बच्ची की जान बच सकती थी। डॉक्टरों ने ब्लड न मिलने पर बच्ची की मौत होना बताया है। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार में गुस्सा है। उनका कहना है कि पहले ई रिक्शा ने बच्ची को कुचला और फिर अस्पताल की लापरवाही से बच्ची की मौत हो गई।
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लिसाड़ी गेट क्षेत्र के रशीदनगर निवासी आसिफ की पत्नी और उनकी चार साल की बेटी सिमरा ई-रिक्शा से श्यामनगर अपने रिश्तेदार के यहां जा रहे थे। इस दौरान बच्ची ई-रिक्शा से गिरी और ई-रिक्शा उसके पेट पर चढ़ गया। गंभीर हालत में बच्ची को परिजनों ने हापुड़ अड्डा चौराहे के पास निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर ने बच्ची को खून की जरूरत बताई। जिस पर आसिफ का भाई बिलाल बागपत रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ब्लड लेने पहुंच गया।
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आरोप है कि तीन घंटे तक स्टाफ ने उसको बैठाए रखा। तीन घंटे बाद बिलाल ब्लड लेकर अस्पताल पहुंचा। तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। देरी से ब्लड मिलने पर नाराज बिलाल अपने एक साथी के साथ वापस उसी अस्पताल पहुंचा। बिलाल ने ब्लड को वापस करते हुए अस्पताल के स्टाफ को बच्ची की मौत का कसूरवार बताया और तोड़फोड़ कर दी। आरोप है अस्पताल के स्टाफ ने बिलाल की पिटाई कर दी। बिलाल को बागपत रोड स्थित दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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अस्पताल और थाने में हंगामा
बिलाल पर हमले की सूचना पर पीड़ित परिवार के साथ युवा सेवा समिति अध्यक्ष बदर अली कार्यकर्ताओं के साथ बागपत रोड स्थित अस्पताल पहुंचे। हंगामा करते हुए अस्पताल के स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की। उसके बाद पीड़ित परिवार टीपीनगर थाने पहुंचा और मारपीट करने वाले अस्पताल के सात कर्मचारियों के खिलाफ तहरीर दी।
ब्लड मिलता तो बच जाती जान
पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर अस्पताल से समय से ब्लड मिल जाता तो बच्ची की जान बच सकती थी। डॉक्टरों ने ब्लड न मिलने पर बच्ची की मौत होना बताया है। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार में गुस्सा है। उनका कहना है कि पहले ई रिक्शा ने बच्ची को कुचला और फिर अस्पताल की लापरवाही से बच्ची की मौत हो गई।