ढाका को मारी थी 17 गोलियां, ये है सतेंद्र सोलंकी के राजनीति में सक्रिय होने के पीछे का बड़ा राज
एक प्रॉपर्टी को लेकर हुआ विवाद और राजनीतिक महत्वाकांक्षा इंद्रपाल ढाका की हत्या की वजह बनी थी। इंद्रपाल पर भी हत्या का आरोप था। पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी व उसके साथियों ने इंद्रपाल की हत्या की योजना बनाई।
इंद्रपाल बागपत के गांव ढिकौली का रहने वाला था और सतेंद्र सोलंकी बागपत के जिमाना गुलियान गांव का रहने वाला था। दोनों ने मेरठ में अपनी प्रापर्टी खरीद ली थी और राजनीति में सक्रिय हो गए थे। इंद्रपाल ने साल 1996 में खेकड़ा से मदन भैया के सामने विधायक का चुनाव लड़ा था और उसे 17 हजार वोट मिले थे। बताया गया कि कैंट इलाके में एक मकान को लेकर सतेंद्र सोलंकी का डॉ. इंद्रपाल से विवाद हुआ था। बताया कि सतेंद्र सोलंकी के बदमाशों से संपर्क थे। 24 जून 1997 में जेल चुंगी में सतेंद्र और उसके भाई हरेंद्र सोलंकी ने इंद्रपाल और उसके साथी अशोक को घेर लिया। दोनों भाइयों ने इंद्रपाल पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। जिसमें इंद्रपाल को 17 गोली मारी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 11 गोली इंद्रपाल के शरीर से निकली थी।
इंद्रपाल की हत्या के बाद राजनीति में सक्रिय हुआ सोलंकी
बताया गया कि इंद्रपाल ढाका की हत्या के बाद सतेंद्र सोलंकी ने राजनीति में अपनी कदम बढ़ाया। 2007 में बरनावा सीट से रालोद के टिकट पर चुनाव जीता था। उसके कई रिश्तेदार भी बागपत में विधायक रहे हैं, जिसके चलते सोलंकी का सफर बेहतर रहा। बताया गया कि शुरूआत में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। बाद में अशोक और इंद्रपाल के भाई अमरपाल सिंह ढाका के बयानों पर सतेंद्र सोलंकी और उसके भाई हरेंद्र सोलंकी को आरोपी बनाया गया।
चश्मदीद गवाह आज भी लापता
इंद्रपाल के साथ उसके गांव का अशोक भी साथ था। पुलिस ने अशोक के 161 के बयान अंकित कर लिए थे। जिसमें उसने सतेंद्र सोलंकी और उसके भाई हरेंद्र सोलंकी की पहचान करना बताया था। इससे पहले कोर्ट में अशोक के बयान दर्ज होने के बाद से वह भी लापता है। 22 साल बीत चुके है, लेकिन अशोक को कोई अता पता नहीं है। इसको लेकर अशोक के साथ अनहोनी होने की भी चर्चा रहीं है। लेकिन कोई पुष्टि नहीं हो सकी। हालांकि कई बार कोर्ट अशोक को पेश करने के पुलिस को भी नोटिस भेज चुकी है।
दो वकीलों ने दी थी गवाही
डॉ. इंद्रपाल सिंह के भाई अधिवक्ता अमरपाल सिंह ने बताया कि इस केस में सुनवाई नहीं हो रही थी। जिसके चलते उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाया था। जिसके आदेश पर केस पटियाला हाउस में ट्रांसफर हो गया था। इस मामले में अधिवक्ता नरोत्तम कुमार और भंवरसिंह चौहान की भी गवाही हुई थी। केस को मजबूत से लड़ा गया। जिसका नतीजा हुआ कि पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल्रा।
अभी सजा का इंतजार
डॉ. इंद्रपाल के भाई अधिवक्ता अमरपाल सिंह का कहना है कि सजा मिलने की तारीख सात मई निर्धारित हुई है। सजा होनी तय है। पीड़ित परिवार को बहुत दर्द झेलना पड़ा। लेकिन उनको पूरी उम्मीद थी कि देर हो सकती है, लेकिन आरोपियों को सजा होनी तय है। सोमवार पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी और उसके भाई हरेंद्र सोलंकी को हत्या में दोषी करार दिए जाने से पीड़ित परिवार को राहत हुई है।
छात्र राजनीति से शुरुआत
सतेंद्र सोलंकी के राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। सिंभावली के किसान डिग्री कॉलेज से पढ़ाई की और यहीं से छात्र राजनीति की शुरुआत की।
सतेंद्र सोलंकी मां और भाई हरेंद्र भी बिनौली ब्लॉक के प्रमुख रहे हैं। सतेंद्र सोलंकी भले ही भाजपा में शामिल हो गए हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव साल 2017 के समय बनाई गई उनकी वेबसाइट अभी भी पूरी तरह बसपा के रंग में रंगी है।
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