{"_id":"5877d4984f1c1b7840ba8faf","slug":"engineering-ke-chatr-ne-faasi","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंजीनियरिंग के छात्र ने हॉस्टल में लगाई फांसी ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
इंजीनियरिंग के छात्र ने हॉस्टल में लगाई फांसी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jan 2017 02:18 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा सेक्टर-62 स्थित जेपी इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में बुधवार रात बीटेक अंतिम वर्ष के एक छात्र ने फांसी लगा ली। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया है। जिसमें छात्र ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। बृहस्पतिवार शाम मेरठ स्थित आवास पर शव पहुंचने पर कोहराम मच गया।
पुलिस के अनुसार सरस्वती मंदिर सूरजकुंड रोड निवासी मुकेश कुमार गुप्ता का 22 वर्षीय बेटा अभिनव गुप्ता जेपी इंस्टीट्यूट में बीटेक अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। मुकेश मेरठ में एक समाचार पत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। बुधवार रात पुलिस को फोर्टिस अस्पताल से छात्र के आत्महत्या करने की सूचना मिली। पुलिस ने अभिनव के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि रात करीब नौ बजे अभिनव का रूममेट प्रदीप तोमर खाना खाकर लौटा था। वह काफी देर बाद भी गेट न खुलने पर प्रदीप ने हॉस्टल के सिक्योरिटी गार्ड के साथ पीछे की तरफ बालकनी से कमरे में देखा तो अभिनव पंखे पर लटका हुआ था। दोनों ने अन्य छात्रों की मदद से गेट तोड़कर अभिनव को तुरंत फंदे से उतारा और उसे फोर्टिस अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने अभिनव को मृत घोषित कर दिया।
रात करीब 11 बजे कॉलेज प्रबंधन ने अभिनव के कमरे से सुसाइड नोट बरामद करते हुए परिजन को सूचना दी। परिजन देर रात नोएडा पहुंच गए थे। लेकिन रात में पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था। हालांकि सुबह परिजन इसके लिए तैयार हो गए। बृहस्पतिवार शाम परिजन आवास पर उसका शव लेकर पहुंचे तो घर में कोहराम मच गया। रिश्तेदार, हॉस्टल के छात्र और शहर के गणमान्य लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। देर शाम नम आंखों के बीच सूरजकुंड पर उसका अंतिम संस्कार हुआ। घर पर उसकी मां रीता और बहन नवेली का बुरा हाल था।
विज्ञापन
हमें दोनों बच्चों पर गर्व है
मुकेश गुप्ता ने बताया कि अभिनव की बहन नवेली दिल्ली द्वारिका में रहकर ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी फाइनल कर रही है। उसने पिछले एग्जाम में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। अभिनव भी होनहार था। उसकी बातों से लगा था कि वह प्लेसमेंट में क्लीयर नहीं कर पा रहा है। इसी को लेकर वह अंदर ही अंदर दुखी था। कुछ टेंशन उसे थी। पिछले दिनो जब वह घर आया तो उसे समझाया भी था कि उसके पास अभी बहुत मौके आएंगे। उन्हें अपने दोनों बच्चों पर गर्व है ।
नहीं पूरी हो सकी अंतिम इच्छा
अभिनव ने साढ़े तीन लाइन के सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। अभिनव मौत के बाद किसी जरूरतमंद की दुनिया रोशन करना चाहता था। उसने सुसाइड नोट में अपनी आंखें दान करने को लिखा था। मुकेश के पारिवारिक मित्र इंदिरापुरम निवासी प्रवीण वर्मा ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें फोन कर एक्सीडेंट होने की सूचना दी थी। जब वे फोर्टिस अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अभिनव की मौत का पता चला। पूरा परिवार इतने सदमे में था कि किसी ने आंखें दान करने की उसकी अंतिम इच्छा की तरफ ध्यान नहीं दिया। सुबह उन लोगों को इसका ख्याल आया, तो डाक्टरों ने बताया कि अब बहुत देर हो चुकी है।
खेलने भी नहीं गया था
अभिनव दोस्तों के साथ रोजाना शाम हॉस्टल में वालीबॉल खेलता था। बुधवार शाम छह बजे खेलने जाते वक्त दोस्तों ने उसे भी बुलाया, लेकिन अभिनव नहीं गया। खेलने के बाद उसके दोस्त सीधे मेस में खाना खाने चले गए थे। वहां भी अभिनव नहीं मिला। दोस्तों को लगा कि शायद उसकी तबियत सही नहीं होगी, इसलिए वह कमरे ही होगा।
विज्ञापन
पुलिस के अनुसार सरस्वती मंदिर सूरजकुंड रोड निवासी मुकेश कुमार गुप्ता का 22 वर्षीय बेटा अभिनव गुप्ता जेपी इंस्टीट्यूट में बीटेक अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। मुकेश मेरठ में एक समाचार पत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। बुधवार रात पुलिस को फोर्टिस अस्पताल से छात्र के आत्महत्या करने की सूचना मिली। पुलिस ने अभिनव के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि रात करीब नौ बजे अभिनव का रूममेट प्रदीप तोमर खाना खाकर लौटा था। वह काफी देर बाद भी गेट न खुलने पर प्रदीप ने हॉस्टल के सिक्योरिटी गार्ड के साथ पीछे की तरफ बालकनी से कमरे में देखा तो अभिनव पंखे पर लटका हुआ था। दोनों ने अन्य छात्रों की मदद से गेट तोड़कर अभिनव को तुरंत फंदे से उतारा और उसे फोर्टिस अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने अभिनव को मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
रात करीब 11 बजे कॉलेज प्रबंधन ने अभिनव के कमरे से सुसाइड नोट बरामद करते हुए परिजन को सूचना दी। परिजन देर रात नोएडा पहुंच गए थे। लेकिन रात में पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था। हालांकि सुबह परिजन इसके लिए तैयार हो गए। बृहस्पतिवार शाम परिजन आवास पर उसका शव लेकर पहुंचे तो घर में कोहराम मच गया। रिश्तेदार, हॉस्टल के छात्र और शहर के गणमान्य लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। देर शाम नम आंखों के बीच सूरजकुंड पर उसका अंतिम संस्कार हुआ। घर पर उसकी मां रीता और बहन नवेली का बुरा हाल था।
विज्ञापन
हमें दोनों बच्चों पर गर्व है
मुकेश गुप्ता ने बताया कि अभिनव की बहन नवेली दिल्ली द्वारिका में रहकर ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी फाइनल कर रही है। उसने पिछले एग्जाम में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। अभिनव भी होनहार था। उसकी बातों से लगा था कि वह प्लेसमेंट में क्लीयर नहीं कर पा रहा है। इसी को लेकर वह अंदर ही अंदर दुखी था। कुछ टेंशन उसे थी। पिछले दिनो जब वह घर आया तो उसे समझाया भी था कि उसके पास अभी बहुत मौके आएंगे। उन्हें अपने दोनों बच्चों पर गर्व है ।
नहीं पूरी हो सकी अंतिम इच्छा
अभिनव ने साढ़े तीन लाइन के सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। अभिनव मौत के बाद किसी जरूरतमंद की दुनिया रोशन करना चाहता था। उसने सुसाइड नोट में अपनी आंखें दान करने को लिखा था। मुकेश के पारिवारिक मित्र इंदिरापुरम निवासी प्रवीण वर्मा ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें फोन कर एक्सीडेंट होने की सूचना दी थी। जब वे फोर्टिस अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अभिनव की मौत का पता चला। पूरा परिवार इतने सदमे में था कि किसी ने आंखें दान करने की उसकी अंतिम इच्छा की तरफ ध्यान नहीं दिया। सुबह उन लोगों को इसका ख्याल आया, तो डाक्टरों ने बताया कि अब बहुत देर हो चुकी है।
खेलने भी नहीं गया था
अभिनव दोस्तों के साथ रोजाना शाम हॉस्टल में वालीबॉल खेलता था। बुधवार शाम छह बजे खेलने जाते वक्त दोस्तों ने उसे भी बुलाया, लेकिन अभिनव नहीं गया। खेलने के बाद उसके दोस्त सीधे मेस में खाना खाने चले गए थे। वहां भी अभिनव नहीं मिला। दोस्तों को लगा कि शायद उसकी तबियत सही नहीं होगी, इसलिए वह कमरे ही होगा।