सहारनपुर में पुलिस टीम पर हमला, दरोगा की वर्दी फाड़ी और आरोपी को छुड़ाया, हथियार छीनने की भी कोशिश
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सहारनपुद जनपद में देवबंद थाना क्षेत्र के गांव राज्जुपुर में पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। पुलिस वहां एक वारंटी को गिरफ्तार करने गई थी। पुलिस जब आरोपी को लेकर चली तो ग्रामीणों ने पुलिस के साथ धक्कामुक्की करते हुए आरोपी को छुड़ा लिया। इस दौरान एक दरोगा की वर्दी भी फाड़ दी और सरकारी पिस्टल छीनने का प्रयास किया गया।
घर में घुसकर मारपीट किए जाने के मामले में फरार चल रहे कलीम पुत्र शराफत को बुधवार को कोतवाली के एसएसआई ज्ञानेंद्र सिरोही पुलिस टीम के साथ गिरफ्तार करने राज्जुपुर गांव गए थे। कलीम के खिलाफ अदालत से गिरफ्तारी का वारंट जारी था। पुलिस ने आरोपी को घर के करीब से ही गिरफ्तार कर लिया और उसे लेकर वहां से जाने लगी। पुलिस के मुताबिक इस दौरान काफी संख्या में लोग वहां पहुंचे और कलीम को ले जाने का विरोध करते हुए पुलिस के साथ धक्कामुक्की करने लगे। उन्हें समझाने का प्रयास किया गया तो वे लोग हाथापाई पर उतर आए। जिसके चलते एक दरोगा की वर्दी फट गई। इस दौरान लोग आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर ले गए।
पुलिस का आरोप यह भी है कि ग्रामीणों ने सरकारी पिस्टल छीनने का प्रयास भी किया। पुलिस पर हमला किए जाने की जानकारी जब उच्चाधिकारियों को मिली तो तुरंत ही पुलिस फोर्स को गांव के लिए रवाना कर दिया, जहां पुलिस ने बमुश्किल लोगों को खदेड़ा। इस मामले में एसएसआई ज्ञानेंद्र सिरोही की ओर से 16 लोगों के विरुद्ध संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
एसएसआई के मुताबिक पुलिस ने हमला करने के आरोप में नामजद सलीम पुत्र शराफत, अजीम पुत्र फिरासत और इंतजार पुत्र फरागत को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फरार लोगों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
पुलिस पर हमले का आरोप निराधार, लोगों को गलत फंसा रही पुलिस
राज्जुपुर के ग्रामीण आरिफ, सलीम, कुरबान, मेहरबान आदि ने बताया कि कलीम को गिरफ्तार करने आई पुलिस टीम ने लोगों के साथ जमकर गाली गलौज की। लोग केवल इसका विरोध कर रहे थे। इसी दौरान कलीम पुलिस की गाड़ी से कूदकर फरार हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि दो दिनों से कलीम का चचेरा भाई घर से गायब है। कलीम समेत सभी परिजन उसकी तलाश कर रहे थे। अचानक गांव में पुलिस पहुंची और बिना कुछ बताए कलीम को लेकर जाने लगी। आरोप लगाया कि जब उन्होंने पुलिस से उसे ले जाने के बारे में पूछा तो पुलिसकर्मी लोगों के साथ गाली गलौज करने लगे। पुलिस अपनी लापरवाही उजागर न हो इसलिए हमला करने की कहानी बनाकर ग्रामीणों को झूठे मुकदमे में फंसाना चाहती है।
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