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अब मेरठ में खरखौदा पुलिस पर हमला
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 01 Oct 2015 02:09 AM IST
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बहसूमा में बरेली पुलिस पर हमले के बाद अब खरखौदा में पुलिस पर आरोपी पक्ष की महिलाओं ने हमला बोल दिया। महिलाओं ने पुलिसकर्मियों से मारपीट करते हुए पकड़े गए एक आरोपी को भी छुड़ाकर भगा दिया। हमले की सूचना पर भारी पुलिस फोर्स पहुंचा, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था।
गांव पांची निवासी कमल पुत्र ताराचंद बाइक लूट के मामले में एक माह से वांछित चल रहा है। बुधवार को पुलिस को उसके गांव में मौजूद होने की सूचना मिली। सूचना पर थाना पुलिस आरोपी की पकड़ने उसके घर पहुंची। पुलिस ने जैसे ही आरोपी के घर में घुसकर आरोपी को गिरफ्त में लिया तो आरोपी पक्ष की महिलाओं ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर आसपास के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और पुलिस को चारों तरफ से घेर लिया।
कुछ लोगों ने सिपाहियों के साथ हाथापाई और मारपीट भी की। महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को एक कमरे में बंद करने और आग लगाने की चेतावनी तक दे डाली। महिलाओं ने पुलिस के कब्जे में आ चुके आरोपी बाइक चोर कमल को छुड़ाकर वहां से भगा दिया। लोगों की भीड़ में फंसा एक दरोगा और दो सिपाही पूरा तमाशा देखते रहे और विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।
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वहां से निकलकर सिपाहियों ने पुलिस पर हमले की सूचना थाना पुलिस को दी। जिस पर थाने से भारी फोर्स मौके पर पहुंची और आरोपी की तलाश की, लेकिन तब तक वह फरार हो चुका था। बाद में आरोपी पक्ष के लोग भी मौके से फरार हो गए। पुलिस टीम बैरंग लौट आई। एसओ पीयूष दीक्षित का कहना है कि वांछित को पकड़ने के लिये पहुंची पुलिस टीम का महिलाओं ने विरोध किया, लेकिन मारपीट और हाथापाई नहीं हुई।
एसओ ने दबा ली घटना
थाना पुलिस पर हमले और आरोपी को छुड़ा लेने जैसे गंभीर मामले की जानकारी देना भी खरखौदा एसओ ने मुनासिब नहीं समझा। यहां तक कि घटना के कई घंटे बाद तक मामले की जानकारी सीओ किठौर को भी नहीं थी। एसओ ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिये पूरे मामले को दबाने की कोशिश की।
चुनावी दौर में असुरक्षित ‘खाकी’
मेरठ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए एक तरफ जहां आचार संहिता लग चुकी है, वहीं लगातार हो रहे खाकी पर हमले पुलिस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। चुनावी दौर में जब खाकी ही सुरक्षित नहीं है तो फिर किससे सुरक्षा की उम्मीद की जा सकती है। थानों की हवालात पर भी हमला बोलकर अपराधियों को जबरन छुड़ाया जा रहा है। पुलिस पर लगातार हमले हो रहे हैं और अफसर खामोश हैं।
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गांव पांची निवासी कमल पुत्र ताराचंद बाइक लूट के मामले में एक माह से वांछित चल रहा है। बुधवार को पुलिस को उसके गांव में मौजूद होने की सूचना मिली। सूचना पर थाना पुलिस आरोपी की पकड़ने उसके घर पहुंची। पुलिस ने जैसे ही आरोपी के घर में घुसकर आरोपी को गिरफ्त में लिया तो आरोपी पक्ष की महिलाओं ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर आसपास के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और पुलिस को चारों तरफ से घेर लिया।
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कुछ लोगों ने सिपाहियों के साथ हाथापाई और मारपीट भी की। महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को एक कमरे में बंद करने और आग लगाने की चेतावनी तक दे डाली। महिलाओं ने पुलिस के कब्जे में आ चुके आरोपी बाइक चोर कमल को छुड़ाकर वहां से भगा दिया। लोगों की भीड़ में फंसा एक दरोगा और दो सिपाही पूरा तमाशा देखते रहे और विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।
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वहां से निकलकर सिपाहियों ने पुलिस पर हमले की सूचना थाना पुलिस को दी। जिस पर थाने से भारी फोर्स मौके पर पहुंची और आरोपी की तलाश की, लेकिन तब तक वह फरार हो चुका था। बाद में आरोपी पक्ष के लोग भी मौके से फरार हो गए। पुलिस टीम बैरंग लौट आई। एसओ पीयूष दीक्षित का कहना है कि वांछित को पकड़ने के लिये पहुंची पुलिस टीम का महिलाओं ने विरोध किया, लेकिन मारपीट और हाथापाई नहीं हुई।
एसओ ने दबा ली घटना
थाना पुलिस पर हमले और आरोपी को छुड़ा लेने जैसे गंभीर मामले की जानकारी देना भी खरखौदा एसओ ने मुनासिब नहीं समझा। यहां तक कि घटना के कई घंटे बाद तक मामले की जानकारी सीओ किठौर को भी नहीं थी। एसओ ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिये पूरे मामले को दबाने की कोशिश की।
चुनावी दौर में असुरक्षित ‘खाकी’
मेरठ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए एक तरफ जहां आचार संहिता लग चुकी है, वहीं लगातार हो रहे खाकी पर हमले पुलिस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। चुनावी दौर में जब खाकी ही सुरक्षित नहीं है तो फिर किससे सुरक्षा की उम्मीद की जा सकती है। थानों की हवालात पर भी हमला बोलकर अपराधियों को जबरन छुड़ाया जा रहा है। पुलिस पर लगातार हमले हो रहे हैं और अफसर खामोश हैं।