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ट्रैफिक व्यवस्था में और सुधार की जरूरत
Updated Wed, 04 Jul 2018 01:40 AM IST
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मेरठ। डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिस लाइन स्थित आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने के बाद कहा कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में अभी और सुधार की जरूरत है।
डीजीपी ने इस दौरान कंट्रोल रूम से जुड़े शहर के प्रमुख चौराहों और गूगल मैप वाली एलईडी स्क्रीन को देखकर जाम वाले प्वाइंटों की जानकारी ली। ट्रैफिक कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मियों से पूछा कि शहर में जाम के स्थानों का कैसे पता चलेगा। एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी ने डीजीपी को बताया कि 34 स्थानों पर उच्च क्वालिटी के कैमरे लगाए गए हैं। जबकि प्रमुख चौराहों पर पहले से अन्य निजी कंपनी के कैमरे लगे थे। गूगल मैप से जुड़ी एलईडी स्क्र्रीन से चौराहों पर भीड़भाड़ का पता चलता है। जिसके बाद नजदीक ट्रैफिक मोबाइक या ट्रैफिक एंजिल को मौके पर भेजा जाता है।
डीजीपी ने वहां मौजूद एडीजी, आईजी और एसएसपी से कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था में पिछले छह माह में सुधार हुआ है। संसाधन बढ़ने के साथ ट्रैफिक पुलिस में स्टाफ भी बढ़ाया गया है। हालांकि हाईवे पर जहां जाम की समस्या है, वहां ट्रैफिक पुलिस को और भी काम करना होगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ अलग से अभियान चलाए गए। शमन शुल्क भी दस लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया है। शहर में सड़क हादसों में भी कमी आयी है।
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खास बातें:
डीजीपी ने आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण
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डीजीपी ने इस दौरान कंट्रोल रूम से जुड़े शहर के प्रमुख चौराहों और गूगल मैप वाली एलईडी स्क्रीन को देखकर जाम वाले प्वाइंटों की जानकारी ली। ट्रैफिक कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मियों से पूछा कि शहर में जाम के स्थानों का कैसे पता चलेगा। एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी ने डीजीपी को बताया कि 34 स्थानों पर उच्च क्वालिटी के कैमरे लगाए गए हैं। जबकि प्रमुख चौराहों पर पहले से अन्य निजी कंपनी के कैमरे लगे थे। गूगल मैप से जुड़ी एलईडी स्क्र्रीन से चौराहों पर भीड़भाड़ का पता चलता है। जिसके बाद नजदीक ट्रैफिक मोबाइक या ट्रैफिक एंजिल को मौके पर भेजा जाता है।
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डीजीपी ने वहां मौजूद एडीजी, आईजी और एसएसपी से कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था में पिछले छह माह में सुधार हुआ है। संसाधन बढ़ने के साथ ट्रैफिक पुलिस में स्टाफ भी बढ़ाया गया है। हालांकि हाईवे पर जहां जाम की समस्या है, वहां ट्रैफिक पुलिस को और भी काम करना होगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ अलग से अभियान चलाए गए। शमन शुल्क भी दस लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया है। शहर में सड़क हादसों में भी कमी आयी है।
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खास बातें:
डीजीपी ने आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण