{"_id":"5a85fc104f1c1b4e588b8dcf","slug":"61518730256-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कल से क्राइम ब्रांच करेगी एमबीबीएस पेपर आउट की जांच","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कल से क्राइम ब्रांच करेगी एमबीबीएस पेपर आउट की जांच
Updated Fri, 16 Feb 2018 03:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्राइम ब्रांच ने शुरू की एमबीबीएस पेपर आउट मामले की जांच
मेरठ। एमबीबीएस के पेपर आउट मामले की जांच क्राइम ब्रांच ने शुरू कर दी है। इस मामले में एसपी सिटी ने जल्द से जल्द जांच पूरी करने को कहा है। वहीं, पुलिस केस होने के कारण विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने आगे की जांच को रोक दिया है।
एमबीबीएस की सेकेंड और थर्ड ईयर की परीक्षाओं के दौरान पेपर आउट होने के मामले में परीक्षा नियंत्रक नारायण प्रसाद ने मेडिकल थाने में तहरीर दी थी। इस मामले में पुलिस ने 66 आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। ऐसे में इसकी जांच क्राइम ब्रांच द्वारा ही की जाएगी। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि क्राइम ब्रांच को लगा दिया गया है। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच में जो सेल्फ सेंटर वाला कॉलेज जांच के घेरे में है, उस पर शक ओर गहरा गया है। सूत्रों की मानें तो डॉक्टरों के एक बड़े रैकेट द्वारा कॉलेज के कर्मचारियों से पेपर निकलवाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इस मामले में समिति अभी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में अगर क्राइम ब्रांच ने आंतरिक समिति की रिपोर्ट पर फोकस नहीं किया तो असल आरोपी बच जाएंगे।
तहरीर देने में विश्वविद्यालय से हुई चूक
विश्वविद्यालय ने जो तहरीर मेडिकल थाने में दी है उसमें तकनीकी चूक सामने आ रही है। विश्वविद्यालय ने पुलिस से सीधे तौर पर आरोपियों को पकड़ने की बजाय उसी छात्र नेता का नंबर लिख दिया है जिसने परीक्षा नियंत्रक को पेपर आउट वाली चिट भेजी थी। ऐसे में पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। इसको लेकर छात्र भी लगातार विरोध कर रहे हैं। जबकि पुलिस अगर विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति के साथ मिलकर जांच करे तो दो दिन में ही पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
विज्ञापन
ये है मामला
एमबीबीएस के पांच कॉलेजों में पांच फरवरी से सेकेंड और थर्ड ईयर की परीक्षाएं शुरू हुई थीं। इनमें मेरठ मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर के गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज, पिलखुवा के रामा मेडिकल कॉलेज, हापुड़ के सरस्वती मेडिकल कॉलेज और मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के सेकेंड और थर्ड ईयर के छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे थे। मेरठ और सहारनपुर के कॉलेज में सेल्फ सेंटर था, जबकि पिलखुवा का सेंटर एडेड कॉलेज आरएसएस पिलखुवा, हापुड़ का सेंटर एमएम डिग्री कॉलेज मोदीनगर और मुजफ्फरनगर का सेंटर जैन कन्या पीजी कॉलेज मुजफ्फरनगर में बनाया गया था। इस मामले में एक पेपर के आउट होने की पुष्टि होने पर विश्वविद्यालय ने एमबीबीएस की शेष परीक्षाएं स्थगित कर दीं थीं। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने प्रो वाइस चांसलर प्रो. एचएस सिंह की अध्यक्षता में प्रो. वाई विमला और प्रो. बीरपाल की आंतरिक समिति बना दी थी। जांच में एक सेल्फ सेंटर वाले कॉलेज के लिफाफे पर सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
मेरठ। एमबीबीएस के पेपर आउट मामले की जांच क्राइम ब्रांच ने शुरू कर दी है। इस मामले में एसपी सिटी ने जल्द से जल्द जांच पूरी करने को कहा है। वहीं, पुलिस केस होने के कारण विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने आगे की जांच को रोक दिया है।
एमबीबीएस की सेकेंड और थर्ड ईयर की परीक्षाओं के दौरान पेपर आउट होने के मामले में परीक्षा नियंत्रक नारायण प्रसाद ने मेडिकल थाने में तहरीर दी थी। इस मामले में पुलिस ने 66 आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। ऐसे में इसकी जांच क्राइम ब्रांच द्वारा ही की जाएगी। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि क्राइम ब्रांच को लगा दिया गया है। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच में जो सेल्फ सेंटर वाला कॉलेज जांच के घेरे में है, उस पर शक ओर गहरा गया है। सूत्रों की मानें तो डॉक्टरों के एक बड़े रैकेट द्वारा कॉलेज के कर्मचारियों से पेपर निकलवाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इस मामले में समिति अभी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में अगर क्राइम ब्रांच ने आंतरिक समिति की रिपोर्ट पर फोकस नहीं किया तो असल आरोपी बच जाएंगे।
विज्ञापन
तहरीर देने में विश्वविद्यालय से हुई चूक
विश्वविद्यालय ने जो तहरीर मेडिकल थाने में दी है उसमें तकनीकी चूक सामने आ रही है। विश्वविद्यालय ने पुलिस से सीधे तौर पर आरोपियों को पकड़ने की बजाय उसी छात्र नेता का नंबर लिख दिया है जिसने परीक्षा नियंत्रक को पेपर आउट वाली चिट भेजी थी। ऐसे में पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। इसको लेकर छात्र भी लगातार विरोध कर रहे हैं। जबकि पुलिस अगर विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति के साथ मिलकर जांच करे तो दो दिन में ही पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
विज्ञापन
ये है मामला
एमबीबीएस के पांच कॉलेजों में पांच फरवरी से सेकेंड और थर्ड ईयर की परीक्षाएं शुरू हुई थीं। इनमें मेरठ मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर के गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज, पिलखुवा के रामा मेडिकल कॉलेज, हापुड़ के सरस्वती मेडिकल कॉलेज और मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के सेकेंड और थर्ड ईयर के छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे थे। मेरठ और सहारनपुर के कॉलेज में सेल्फ सेंटर था, जबकि पिलखुवा का सेंटर एडेड कॉलेज आरएसएस पिलखुवा, हापुड़ का सेंटर एमएम डिग्री कॉलेज मोदीनगर और मुजफ्फरनगर का सेंटर जैन कन्या पीजी कॉलेज मुजफ्फरनगर में बनाया गया था। इस मामले में एक पेपर के आउट होने की पुष्टि होने पर विश्वविद्यालय ने एमबीबीएस की शेष परीक्षाएं स्थगित कर दीं थीं। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने प्रो वाइस चांसलर प्रो. एचएस सिंह की अध्यक्षता में प्रो. वाई विमला और प्रो. बीरपाल की आंतरिक समिति बना दी थी। जांच में एक सेल्फ सेंटर वाले कॉलेज के लिफाफे पर सवाल उठ रहे हैं।