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करोड़ां की ठगी
Updated Sun, 11 Mar 2018 02:28 AM IST
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करोड़ों ठगी वाली फर्जी कंपनी का भंडाफोड़
मेरठ। लाइक के नाम पर ठगने वाली एक और फर्जी कंपनी का खुलासा शनिवार को हो गया। यह फर्जी कंपनी पौंजी स्कीम का लालच देकर करोड़ों रुपये लोगों से ठग चुकी है। साइबर सेल ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया है। अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एसपी क्राइम शिवराम यादव ने शनिवार दोपहर अपराध शाखा कार्यालय में करोड़ों की ठगी करने में नामजद आरोपी गुड़ मंडी मुरादनगर निवासी प्रदीप सिंघल को मीडिया के सामने पेश किया। बताया कि छह माह पहले बैंक कालोनी निवासी सुशील त्यागी ने एस्टोनिस डिजिटल एडवरटाइजिंग सर्विस लिमिटेड आरओसी, कानपुर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था।
जांच साइबर सेल के इंस्पेक्टर अनिल कुमार, दरोगा सतपाल सिंह, सिपाही उमेश वर्मा और कपिल चौधरी ने जांच की, जिसमें यह कंपनी फर्जी पाई। इस कंपनी की रजिस्ट्रेशन फीस 60 हजार है। कंपनी ने प्रचार कर रखा था कि एक लाइक में पांच रुपये सदस्य को मिलेंगे। सदस्य यदि और लोगों को जोडे़गा तो उसका कमीशन भी मिलेगा। टारगेट पूरा करने पर कार, बाइक या अन्य सामान दने का दावा भी किया गया। मेरठ और कई शहरों में कंपनी ने हजारों लोगों को ठगी का शिकार करके करोड़ों की ठगी की।
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यह लोग चलाते थे फर्जी कंपनी
एसपी क्राइम शिवराम यादव ने बताया कि फर्जी कंपनी में रामकुमार यादव, राजेश यादव निवासी दौलतपुरा गाजियाबाद, राजेश यादव और ललित शर्मा निवासी विवेकानंद नगर गाजियाबाद को डायरेक्टर बनाया था। कंपनी में संजय त्यागी निवासी निवाड़ी मोदीनगर, प्रदीप चौधरी व उनकी पत्नी नेहा चौधरी, सतीश, मनोज व सोनिया निवासी गाजियाबाद जुड़े थे। गुड मंडी मुरादनगर निवासी प्रदीप सिंघल भी इसमें पार्टनर था। पुलिस ने प्रदीप सिंघल को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो महिला समेत दस लोग फरार हैं।
25 करोड़ का मिला रिकॉर्ड
सन 2016 से 2017 तक इस कंपनी के जरिये दस अलग -अलग फर्म बनाई गई। जिसमें चार बैंकों में छह महीने में 25 करोड़ रुपये जमा किए। साइबर सेल ने इसकी जांच पड़ताल की तो वर्तमान में इन बैंकों में कोई पैसा नहीं है। जबकि छह महीने तक इस बैंकों के अकाउंट में करोड़ों का लेनदेन हुआ। पुलिस जांच कर रही कि आखिर यह पैसा कहां गया।
नोटबंदी के दौरान फर्जी अकाउंट खोले
पुलिस के अनुसार नोटबंदी के दौरान भी इस फर्जी कंपनी ने करोड़ों रुपये का खेल खेला है। लाइक कराने के नाम पर पैसा ठगने वाले कंपनी ने पुरानी करेंसी में साठ हजार लेकर सदस्यता दी। कंपनी के अकाउंट में कई कई लाख रुपये एक दिन में डाले गये। बाद में यह कंपनी सारा पैसा लेकर फरार हो गई।
गिफ्ट में लग्जरी और विदेश में घूमाया जाएगा
सोशल साइट पर फर्जी कंपनी ने दो साल पहले प्रचार शुरू किया। लोग जुड़ते गए। दस लाख रुपये जमा करने वाले और टारगेट पूरा करने वाले सदस्यों को मोटे इनाम का लालच दिया गया। पौंजी स्कीम की कई वीडियो से सोशल साइट्स पर भी प्रचार किया गया। यह कंपनी शोरूमों से सेटिंग कर नई गाड़ियां लाती थी और फोटो व वीडियो कराकर फिर वापस करा देती थी। इन्ही वीडियो के नाम पर गिफ्ट देने का ड्रामा किया जाता था।
मेंबरों को गिफ्ट के तौर पर लग्जरी गाड़ी व विदेशों में कंपनी की तरफ से नि:शुल्क घुमाया जाएगा। जिसके लालच में वीडियो के जरिये मेंबरों पर विश्वास करा देते थी।
जांच में खुले कई राज
मुकदमा दर्ज होने पर साइबर सेल ने इसकी जांच की, जिसमें कई राज खुले। फर्जी कंपनी और अकाउंट भी अलग-अलग फर्म के नाम से खुले मिले। अकाउंट में करोड़ों का लेनदेन हुआ, लेकिन वर्तमान में शून्य मिला। छह महीने से गाजियाबाद में यह कंपनी चल रही थी। इसके अलावा अलग अलग जिलों में अलग नाम से कंपनी चलायी गयी। साइबर सेल का कहना है कि अभी इसकी जांच चल रही है। ठगी और बड़ी हो सकती है।
आपसे ठगी हुई तो करें संपर्क
पुलिस का कहना है कि इस कंपनी ने कई हजार लोगों से करोड़ों की ठगी हुई है। अभी एक शिकायत हुई है। अन्य पीड़ित अभी सामने नहीं आए। एसपी क्राइम ने खुलासा किया और कहा कि अगर किसी से इस कंपनी ने ठगी की है तो वह मेरठ अपराध शाखा से संपर्क करे। या फिर मेरे नंबर सीयूजी 9454401100 पर कॉल कर सकते है। उनकी शिकायत भी दर्ज की जाएगी।
इन बैंकों में डाला इतना पैसा
1. एक्सिस बैंक में 16 जून 2016 से जनवरी 2017 तक - दस करोड़ 19 लाख रुपये
2. आईडीबीआई बैंक में नौ मार्च 2016 से जनवरी 2017 तक - नौ करोड़ रुपये
3. कोटक महिंद्रा बैंक में मार्च 2016 से 27 सितंबर 2017 तक - पांच करोड़ 19 लाख रुपये
4. इंडियन बैंक में जनवरी 2017 से दिसंबर 2017 तक - एक करोड़ रुपये
सभी बैंकों में वर्तमान में शून्य बैलेंस
नौ फर्म बनाकर कराया पैसा जमा
1. अशोका प्रियांशु बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि अक्टूबर 2013)
2. अशोका शशांक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2014)
3. श्री इंटर प्राइजेज प्राईवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि अक्टूबर 2015)
4. एस्टोनिस डिजिटल कंटेंसी प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2017)
5. एस्टोनिस रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2017)
6. एस्टोनिस क्रियेटिव फिल्मस प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2017)
7. एस्टोनिस आईटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि मार्च 2017)
8. एस्टोनिस ग्रोसरी महल प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि मार्च 2017)
9. एस्टोनिस डिजिटल क्लासीफाइड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि जनवरी 2017)
क्या है पोंजी स्कीम
पोंजी स्कीम का मतलब है आपको बंपर रिटर्न के नाम पर ऐसे कारोबार में निवेश करने के लिए कहना जो वास्तव में है ही नहीं। इनकी पहचान का सबसे अच्छा तरीका है, वैसे रिटर्न के ऑफर जो पहली नजर में विश्वास करने लायक ही ना लगें। ऐसी स्कीमों में आपको ये भी समझ नहीं आएगा कि इन कंपनियों का असली काम क्या है या फिर आपका पैसा किस कारोबार में लगाया जाएगा। ये कंपनियां मुख्य रूप से एजेंटों के जरिए हर स्तर और हर उम्र के लोगों को आपना शिकार बनाती हैं। अक्सर एजेन्ट निजी संबंधों का इस्तेमाल कर निवेशक से पैसा लेते हैं। अगर आप ऐसी किसी स्कीम का शिकार हो चुके हैं तो बिना समय गंवाए पुलिस के पास जाएं।
खास बातें:
लाइक करो, पैसा पाओ का चलाया था अवैध धंधा
साइबर सेल ने पकड़ा, एसपी क्राइम ने की प्रेसवार्ता
नौचंदी थाने में एक व्यापारी ने शिकायत कर दी थी
मेरठ। लाइक के नाम पर ठगने वाली एक और फर्जी कंपनी का खुलासा शनिवार को हो गया। यह फर्जी कंपनी पौंजी स्कीम का लालच देकर करोड़ों रुपये लोगों से ठग चुकी है। साइबर सेल ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया है। अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एसपी क्राइम शिवराम यादव ने शनिवार दोपहर अपराध शाखा कार्यालय में करोड़ों की ठगी करने में नामजद आरोपी गुड़ मंडी मुरादनगर निवासी प्रदीप सिंघल को मीडिया के सामने पेश किया। बताया कि छह माह पहले बैंक कालोनी निवासी सुशील त्यागी ने एस्टोनिस डिजिटल एडवरटाइजिंग सर्विस लिमिटेड आरओसी, कानपुर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था।
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जांच साइबर सेल के इंस्पेक्टर अनिल कुमार, दरोगा सतपाल सिंह, सिपाही उमेश वर्मा और कपिल चौधरी ने जांच की, जिसमें यह कंपनी फर्जी पाई। इस कंपनी की रजिस्ट्रेशन फीस 60 हजार है। कंपनी ने प्रचार कर रखा था कि एक लाइक में पांच रुपये सदस्य को मिलेंगे। सदस्य यदि और लोगों को जोडे़गा तो उसका कमीशन भी मिलेगा। टारगेट पूरा करने पर कार, बाइक या अन्य सामान दने का दावा भी किया गया। मेरठ और कई शहरों में कंपनी ने हजारों लोगों को ठगी का शिकार करके करोड़ों की ठगी की।
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यह लोग चलाते थे फर्जी कंपनी
एसपी क्राइम शिवराम यादव ने बताया कि फर्जी कंपनी में रामकुमार यादव, राजेश यादव निवासी दौलतपुरा गाजियाबाद, राजेश यादव और ललित शर्मा निवासी विवेकानंद नगर गाजियाबाद को डायरेक्टर बनाया था। कंपनी में संजय त्यागी निवासी निवाड़ी मोदीनगर, प्रदीप चौधरी व उनकी पत्नी नेहा चौधरी, सतीश, मनोज व सोनिया निवासी गाजियाबाद जुड़े थे। गुड मंडी मुरादनगर निवासी प्रदीप सिंघल भी इसमें पार्टनर था। पुलिस ने प्रदीप सिंघल को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो महिला समेत दस लोग फरार हैं।
25 करोड़ का मिला रिकॉर्ड
सन 2016 से 2017 तक इस कंपनी के जरिये दस अलग -अलग फर्म बनाई गई। जिसमें चार बैंकों में छह महीने में 25 करोड़ रुपये जमा किए। साइबर सेल ने इसकी जांच पड़ताल की तो वर्तमान में इन बैंकों में कोई पैसा नहीं है। जबकि छह महीने तक इस बैंकों के अकाउंट में करोड़ों का लेनदेन हुआ। पुलिस जांच कर रही कि आखिर यह पैसा कहां गया।
नोटबंदी के दौरान फर्जी अकाउंट खोले
पुलिस के अनुसार नोटबंदी के दौरान भी इस फर्जी कंपनी ने करोड़ों रुपये का खेल खेला है। लाइक कराने के नाम पर पैसा ठगने वाले कंपनी ने पुरानी करेंसी में साठ हजार लेकर सदस्यता दी। कंपनी के अकाउंट में कई कई लाख रुपये एक दिन में डाले गये। बाद में यह कंपनी सारा पैसा लेकर फरार हो गई।
गिफ्ट में लग्जरी और विदेश में घूमाया जाएगा
सोशल साइट पर फर्जी कंपनी ने दो साल पहले प्रचार शुरू किया। लोग जुड़ते गए। दस लाख रुपये जमा करने वाले और टारगेट पूरा करने वाले सदस्यों को मोटे इनाम का लालच दिया गया। पौंजी स्कीम की कई वीडियो से सोशल साइट्स पर भी प्रचार किया गया। यह कंपनी शोरूमों से सेटिंग कर नई गाड़ियां लाती थी और फोटो व वीडियो कराकर फिर वापस करा देती थी। इन्ही वीडियो के नाम पर गिफ्ट देने का ड्रामा किया जाता था।
मेंबरों को गिफ्ट के तौर पर लग्जरी गाड़ी व विदेशों में कंपनी की तरफ से नि:शुल्क घुमाया जाएगा। जिसके लालच में वीडियो के जरिये मेंबरों पर विश्वास करा देते थी।
जांच में खुले कई राज
मुकदमा दर्ज होने पर साइबर सेल ने इसकी जांच की, जिसमें कई राज खुले। फर्जी कंपनी और अकाउंट भी अलग-अलग फर्म के नाम से खुले मिले। अकाउंट में करोड़ों का लेनदेन हुआ, लेकिन वर्तमान में शून्य मिला। छह महीने से गाजियाबाद में यह कंपनी चल रही थी। इसके अलावा अलग अलग जिलों में अलग नाम से कंपनी चलायी गयी। साइबर सेल का कहना है कि अभी इसकी जांच चल रही है। ठगी और बड़ी हो सकती है।
आपसे ठगी हुई तो करें संपर्क
पुलिस का कहना है कि इस कंपनी ने कई हजार लोगों से करोड़ों की ठगी हुई है। अभी एक शिकायत हुई है। अन्य पीड़ित अभी सामने नहीं आए। एसपी क्राइम ने खुलासा किया और कहा कि अगर किसी से इस कंपनी ने ठगी की है तो वह मेरठ अपराध शाखा से संपर्क करे। या फिर मेरे नंबर सीयूजी 9454401100 पर कॉल कर सकते है। उनकी शिकायत भी दर्ज की जाएगी।
इन बैंकों में डाला इतना पैसा
1. एक्सिस बैंक में 16 जून 2016 से जनवरी 2017 तक - दस करोड़ 19 लाख रुपये
2. आईडीबीआई बैंक में नौ मार्च 2016 से जनवरी 2017 तक - नौ करोड़ रुपये
3. कोटक महिंद्रा बैंक में मार्च 2016 से 27 सितंबर 2017 तक - पांच करोड़ 19 लाख रुपये
4. इंडियन बैंक में जनवरी 2017 से दिसंबर 2017 तक - एक करोड़ रुपये
सभी बैंकों में वर्तमान में शून्य बैलेंस
नौ फर्म बनाकर कराया पैसा जमा
1. अशोका प्रियांशु बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि अक्टूबर 2013)
2. अशोका शशांक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2014)
3. श्री इंटर प्राइजेज प्राईवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि अक्टूबर 2015)
4. एस्टोनिस डिजिटल कंटेंसी प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2017)
5. एस्टोनिस रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2017)
6. एस्टोनिस क्रियेटिव फिल्मस प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि फरवरी 2017)
7. एस्टोनिस आईटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि मार्च 2017)
8. एस्टोनिस ग्रोसरी महल प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि मार्च 2017)
9. एस्टोनिस डिजिटल क्लासीफाइड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (खाता खोलने की तिथि जनवरी 2017)
क्या है पोंजी स्कीम
पोंजी स्कीम का मतलब है आपको बंपर रिटर्न के नाम पर ऐसे कारोबार में निवेश करने के लिए कहना जो वास्तव में है ही नहीं। इनकी पहचान का सबसे अच्छा तरीका है, वैसे रिटर्न के ऑफर जो पहली नजर में विश्वास करने लायक ही ना लगें। ऐसी स्कीमों में आपको ये भी समझ नहीं आएगा कि इन कंपनियों का असली काम क्या है या फिर आपका पैसा किस कारोबार में लगाया जाएगा। ये कंपनियां मुख्य रूप से एजेंटों के जरिए हर स्तर और हर उम्र के लोगों को आपना शिकार बनाती हैं। अक्सर एजेन्ट निजी संबंधों का इस्तेमाल कर निवेशक से पैसा लेते हैं। अगर आप ऐसी किसी स्कीम का शिकार हो चुके हैं तो बिना समय गंवाए पुलिस के पास जाएं।
खास बातें:
लाइक करो, पैसा पाओ का चलाया था अवैध धंधा
साइबर सेल ने पकड़ा, एसपी क्राइम ने की प्रेसवार्ता
नौचंदी थाने में एक व्यापारी ने शिकायत कर दी थी