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फर्नीचर खरीदारी में खेल, बीएसए ने तलब की सूची
Updated Tue, 18 Dec 2018 12:42 AM IST
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फर्नीचर खरीद में धांधली, बीएसए ने तलब की रिपोर्ट
बिजनौर। बेसिक शिक्षा विभाग और पंचायत राज विभाग द्वारा परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए खरीदे जा रहे के फर्नीचर में बड़ा अंतर है। शिक्षकों का आरोप है कि ग्राम पंचायतों ने जो फर्नीचर खरीदा है, उसकी कीमत अधिक है और साइज छोटा है। उस पर तीन जगह दो ही छात्र बैठ पाएंगे। उन्होंने खरीद मेें धांधली की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से स्कूलों में कराए जा रहे विकास कार्यों और खरीदे गए सामान के संबंध में रिपोर्ट तलब की है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने भी मामले की जांच कराने की बात कही है। उनका साफ कहना है कि प्रधानों को फर्नीचर खरीदने का अधिकार ही नहीं था।
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर की खरीदारी की जा रही है। खरीदारी बेसिक शिक्षा विभाग और जिला पंचायत राज विभाग दोनों अलग-अलग मदों से कर रहे हैं। बीएसए महेश चंद्र के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 125 स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए डेस्क खरीदी गई हैं। इसके लिए विभाग की ओर से मार्च 2018 में टेंडर निकाला गया था। टेंडर में एक डेस्क की कीमत 4031 रुपये थी। जिले के 125 स्कूलों में फर्नीचर भेजा जा चुका है। पंचायत राज विभाग की ओर से भी 14 वें वित्त आयोग और ग्राम निधि से ग्राम प्रधानों एवं ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा फर्नीचर की खरीदारी कर स्कूलों में डेस्क भेजी जा रही हैं। जिले के करीब 500 स्कूलों में अब तक फर्नीचर भेजा जा चुका है। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग एवं पंचायत राज विभाग के बच्चों के लिए खरीदे गए फर्नीचर में काफी अंतर है।
बेसिक शिक्षा विभाग के फर्नीचर की डेस्क और बेंच का वजन 70 किलो है। बच्चों का डेस्क से बस्ता नीचे न गिरे इसकी व्यवस्था की गई है और तीन बच्चे एक साथ आसानी से बैठ सकते हैं। जबकि पंचायतों से खरीदे जा रही फर्नीचर पर कहीं दो बच्चे तो कहीं तीन बच्चों के बैठने की व्यवस्था है और कीमत भी बेसिक शिक्षा विभाग से अधिक है। पंचायतों की एक डेस्क और बेंच की कीमत 4200 से लेकर 4400 रुपये तक है। वजन भी 30 से 40 किलोग्राम तक ही है। इसकी क्वालिटी भी घटिया बताई जा रही है।
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बीएसए ने मांगी रिपोर्ट
जिला पंचायत राज विभाग की ओर से स्कूलों में कराए जा रहे विकास कार्यों और सामान की खरीदारी की बीएसए ने जिले के शिक्षकों से सूची मांगी है। बीएसए ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र देकर कहा है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 14 वें वित्त एवं ग्राम निधि की ओर से कराए गए कार्यों की सूची उनके कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। किन-किन स्कूलों में काम हुआ है बेसिक शिक्षा विभाग इसका संकलन करने में जुट गया है। इससे ग्राम प्रधानों में खलबली मची है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में फर्नीचर की खरीदारी के लिए मार्च के महीने में सीडीओ की देखरेख में टेंडर हुआ था। एक डेस्क और बेंच की कीमत 4031 रुपये निर्धारित की गई थी। बेसिक शिक्षा विभाग में करीब सवा करोड़ की लागत से खरीदे गए फर्नीचर का अभी भुगतान नहीं हुआ है। दूसरी ओर, पंचायत विभाग की ओर से खरीदे गए फर्नीचर का भुगतान पहले ही हो चुका है।
पंचायतों के फर्नीचर की भी हो जांच
शिक्षकों ने जिला पंचायत राज विभाग की ओर से स्कूलों में आए फर्नीचर की जांच कराने की मांग की है। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी अंगजीत सिंह, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री ने बताया कि पंचायत राज विभाग की ओर से स्कूलों में डाले जा रहे फर्नीचर की जांच करा कर ही भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने फर्नीचर की खरीदारी में गड़बड़ी होने की आशंका व्यक्त की है।
प्रधानों को नहीं अधिकार, होगी जांच
जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदारी का ग्राम प्रधानों के लिए कोई अधिकार नहीं है। यदि प्रधानों द्वारा स्कूलों के लिए फर्नीचर की खरीदारी की गई है जो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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बिजनौर। बेसिक शिक्षा विभाग और पंचायत राज विभाग द्वारा परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए खरीदे जा रहे के फर्नीचर में बड़ा अंतर है। शिक्षकों का आरोप है कि ग्राम पंचायतों ने जो फर्नीचर खरीदा है, उसकी कीमत अधिक है और साइज छोटा है। उस पर तीन जगह दो ही छात्र बैठ पाएंगे। उन्होंने खरीद मेें धांधली की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से स्कूलों में कराए जा रहे विकास कार्यों और खरीदे गए सामान के संबंध में रिपोर्ट तलब की है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने भी मामले की जांच कराने की बात कही है। उनका साफ कहना है कि प्रधानों को फर्नीचर खरीदने का अधिकार ही नहीं था।
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर की खरीदारी की जा रही है। खरीदारी बेसिक शिक्षा विभाग और जिला पंचायत राज विभाग दोनों अलग-अलग मदों से कर रहे हैं। बीएसए महेश चंद्र के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 125 स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए डेस्क खरीदी गई हैं। इसके लिए विभाग की ओर से मार्च 2018 में टेंडर निकाला गया था। टेंडर में एक डेस्क की कीमत 4031 रुपये थी। जिले के 125 स्कूलों में फर्नीचर भेजा जा चुका है। पंचायत राज विभाग की ओर से भी 14 वें वित्त आयोग और ग्राम निधि से ग्राम प्रधानों एवं ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा फर्नीचर की खरीदारी कर स्कूलों में डेस्क भेजी जा रही हैं। जिले के करीब 500 स्कूलों में अब तक फर्नीचर भेजा जा चुका है। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग एवं पंचायत राज विभाग के बच्चों के लिए खरीदे गए फर्नीचर में काफी अंतर है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के फर्नीचर की डेस्क और बेंच का वजन 70 किलो है। बच्चों का डेस्क से बस्ता नीचे न गिरे इसकी व्यवस्था की गई है और तीन बच्चे एक साथ आसानी से बैठ सकते हैं। जबकि पंचायतों से खरीदे जा रही फर्नीचर पर कहीं दो बच्चे तो कहीं तीन बच्चों के बैठने की व्यवस्था है और कीमत भी बेसिक शिक्षा विभाग से अधिक है। पंचायतों की एक डेस्क और बेंच की कीमत 4200 से लेकर 4400 रुपये तक है। वजन भी 30 से 40 किलोग्राम तक ही है। इसकी क्वालिटी भी घटिया बताई जा रही है।
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बीएसए ने मांगी रिपोर्ट
जिला पंचायत राज विभाग की ओर से स्कूलों में कराए जा रहे विकास कार्यों और सामान की खरीदारी की बीएसए ने जिले के शिक्षकों से सूची मांगी है। बीएसए ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र देकर कहा है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 14 वें वित्त एवं ग्राम निधि की ओर से कराए गए कार्यों की सूची उनके कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। किन-किन स्कूलों में काम हुआ है बेसिक शिक्षा विभाग इसका संकलन करने में जुट गया है। इससे ग्राम प्रधानों में खलबली मची है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में फर्नीचर की खरीदारी के लिए मार्च के महीने में सीडीओ की देखरेख में टेंडर हुआ था। एक डेस्क और बेंच की कीमत 4031 रुपये निर्धारित की गई थी। बेसिक शिक्षा विभाग में करीब सवा करोड़ की लागत से खरीदे गए फर्नीचर का अभी भुगतान नहीं हुआ है। दूसरी ओर, पंचायत विभाग की ओर से खरीदे गए फर्नीचर का भुगतान पहले ही हो चुका है।
पंचायतों के फर्नीचर की भी हो जांच
शिक्षकों ने जिला पंचायत राज विभाग की ओर से स्कूलों में आए फर्नीचर की जांच कराने की मांग की है। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी अंगजीत सिंह, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री ने बताया कि पंचायत राज विभाग की ओर से स्कूलों में डाले जा रहे फर्नीचर की जांच करा कर ही भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने फर्नीचर की खरीदारी में गड़बड़ी होने की आशंका व्यक्त की है।
प्रधानों को नहीं अधिकार, होगी जांच
जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदारी का ग्राम प्रधानों के लिए कोई अधिकार नहीं है। यदि प्रधानों द्वारा स्कूलों के लिए फर्नीचर की खरीदारी की गई है जो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।