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मेडिकल कॉलेज को बना दिया शराब का गोदाम
Updated Fri, 03 Aug 2018 02:21 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में बना दिया शराब का गोदाम
मेरठ। कायदे कानून को ताक पर रखकर एक ठेकेदार ने मेडिकल कॉलेज में ही अंग्रेजी शराब का गोदाम बना दिया। बृहस्पतिवार को पुलिस ने छापा मारते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड से शराब की 120 पेटी बरामद की। साथ ही पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट वार्ड में एक कमरा सिविल कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार रजत त्यागी को दिया हुआ है। कमरे की खिड़की टूटी हुई है। बृहस्पतिवार सुबह एक वार्ड ब्वॉय ने खिड़की से अंदर झांकर देखा तो वहां शराब भरी पड़ी मिली। इस पर कर्मचारी ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद एसपी सिटी रणविजय सिंह, एसओ मेडिकल सतीश कुमार, सीएमएस अजित चौधरी, डॉ. संजीव और अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मौके से शराब की 120 पेटियों को कब्जे में ले लिया। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने एसपी सिटी को बताया कि ई टेंडरिंग के माध्यम से रजत ने एक अप्रैल को ही टेंडर लिया था। बरामद शराब दो अंग्रेजी शराब के ठेकों की हैं। एसओ मेडिकल सतीश कुमार ने बताया कि एसआई प्रमोद कुमार की तहरीर पर परीक्षितगढ़ क्षेत्र के सोफरी गांव निवासी राजीव भाटी और अजंता कॉलोनी निवासी रजत त्यागी व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। राजीव भाटी का गढ़ रोड पर तक्षशिला के पास और ठेकेदार रजत त्यागी का वेस्टर्न कचहरी रोड पर अंग्रेजी शराब का ठेका है।
राजीव भाटी और रजत त्यागी ने बताया कि बारिश में ठेके के गोदाम में पानी भर गया था। जिस कारण शराब की पेटी मेडिकल कॉलेज के कमरे में रख दी थी। शराब के बिल पुलिस को दे दिए गए हैं। पुलिस ने राजीव भाटी और एक अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
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फैंटम पुलिस की भी जांच शुरू
जिस वार्ड में शराब मिली वह मेडिकल थाने से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। एसपी सिटी रणविजय सिंह का कहना है कि मेडिकल थाने की संबंधित फैंटम और बीट सिपाही की भी जांच कराई जा रही है कि उन्हें शराब रखने का क्यों नहीं पता चला। जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उसे सस्पेंड किया जाएगा। बता
खिड़की टूटी न होती तो नहीं चलता ‘शराब गोदाम’ का पता
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के बंद पड़े प्राइवेट वार्ड की अगर खिड़की टूटी हुई न होती तो शायद यह पता ही नहीं चल पाता कि वार्ड को ‘शराब गोदाम’ बनाया हुआ था। दरअसल, वार्ड ब्वॉय अनिल कुमार सुबह करीब 9:15 बजे ड्यूटी पर था। खिड़की से उसे संदेह हुआ तो उसने गोदाम में झांककर देखा। उसमें शराब की पेटियां रखी हुई थीं। वार्ड ब्वाय ने प्राचार्य को पत्र लिखकर भी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि ऐसा लगता है कि एक-दो दिन पहले ही शराब की पेटियां यहां रखवाई गई होंगी। उनकी मानें तो ठेकेदार को एक वार्ड अपना सामान आदि रखने के लिए दिया गया था, लिहाजा उसका सामान आता रहता था, इसलिए संदेह नहीं हुआ। लेकिन सूत्रों का कहना है कि वार्ड के मुख्य गेट पर ज्यादातर ताला ही लगा रहता था, वार्ड में बाहर की तरफ एक छोटा गेट खुला हुआ है, उसमें से सामान का लाना ले जाना होता था।
कैंसल किए टेंडर, काली सूची में डाला
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने मैसर्स रैन पीपुल को पत्र लिखा है कि सरकारी भवन में शराब की पेटी रखने के कारण अस्पताल में जो विभिन्न कार्यों के लिए अनुबंध किया गया था, उसे निरस्त कर दिया गया है और फर्म को काली सूची में डाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके मालिक रजत त्यागी हैं।
चार सदस्य कमेटी गठित
प्राचार्य ने एक कमेटी का गठन किया है। जो ठेकेदार द्वारा शराब रखे जाने की घटना की विभिन्न पहलुओं से जांच करते हुए इनकी संस्था द्वारा मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में किए जा रहे कार्यों की विवेचना एवं गुणवत्ता की जांच कर शीघ्र रिपोर्ट देगी। कमेटी में डॉ. विनय अग्रवाल को अध्यक्ष, प्रमुख अधीक्षक डॉ. राकेश दुबे, डॉ. एसकेपालीवाल और डॉ. पीके जैन को सदस्य बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस संस्था ने टाइल्स आदि कॉलेज में लगाई गई हैं, जिनकी शिकायतें मिल रही हैं कि वह सस्ती लगा दी गई हैं, अब इनकी जांच होगी।
ब्लैक करने की तो नहीं थी तैयारी
मेडिकल कॉलेज में यह भी चर्चा है कि शायद यह शराब कांवड़ यात्रा के दौरान शराब की किल्लत हो जाने पर इसे ब्लैक करने की थी, ताकि मोटी कमाई की जा सके। हालांकि ठेकेदार ने पुलिस पूछताछ में इन आरोपों को गलत बताया है।
27 साल से बंद पड़े हैं प्राइवेट वार्ड
मेडिकल कॉलेज के ये प्राइवेट वार्ड करीब 27 साल से बंद पड़े हैं। वर्ष 1978 में तकरीबन एक करोड़ रुपये की लागत से बने इस वार्ड को दुरुस्त करने के लिए पिछले दिनों पहल की गई थी। 10 लाख रुपये इसका बजट आया था, यह काम अभी अटका हुआ है। इसमें 50 रूम हैं। मेडिकल कॉलेज का स्टाफ चाहता था कि उनकी जगह यहां अलग से स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। स्टाफ की ड्यूटी में आनाकानी की वजह से धीरे-धीरे यहां अव्यवस्था फैलती गई और साल 1992 में ये वार्ड पूरी तरह से बंद हो गए।
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मेरठ। कायदे कानून को ताक पर रखकर एक ठेकेदार ने मेडिकल कॉलेज में ही अंग्रेजी शराब का गोदाम बना दिया। बृहस्पतिवार को पुलिस ने छापा मारते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड से शराब की 120 पेटी बरामद की। साथ ही पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट वार्ड में एक कमरा सिविल कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार रजत त्यागी को दिया हुआ है। कमरे की खिड़की टूटी हुई है। बृहस्पतिवार सुबह एक वार्ड ब्वॉय ने खिड़की से अंदर झांकर देखा तो वहां शराब भरी पड़ी मिली। इस पर कर्मचारी ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद एसपी सिटी रणविजय सिंह, एसओ मेडिकल सतीश कुमार, सीएमएस अजित चौधरी, डॉ. संजीव और अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मौके से शराब की 120 पेटियों को कब्जे में ले लिया। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने एसपी सिटी को बताया कि ई टेंडरिंग के माध्यम से रजत ने एक अप्रैल को ही टेंडर लिया था। बरामद शराब दो अंग्रेजी शराब के ठेकों की हैं। एसओ मेडिकल सतीश कुमार ने बताया कि एसआई प्रमोद कुमार की तहरीर पर परीक्षितगढ़ क्षेत्र के सोफरी गांव निवासी राजीव भाटी और अजंता कॉलोनी निवासी रजत त्यागी व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। राजीव भाटी का गढ़ रोड पर तक्षशिला के पास और ठेकेदार रजत त्यागी का वेस्टर्न कचहरी रोड पर अंग्रेजी शराब का ठेका है।
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राजीव भाटी और रजत त्यागी ने बताया कि बारिश में ठेके के गोदाम में पानी भर गया था। जिस कारण शराब की पेटी मेडिकल कॉलेज के कमरे में रख दी थी। शराब के बिल पुलिस को दे दिए गए हैं। पुलिस ने राजीव भाटी और एक अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
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फैंटम पुलिस की भी जांच शुरू
जिस वार्ड में शराब मिली वह मेडिकल थाने से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। एसपी सिटी रणविजय सिंह का कहना है कि मेडिकल थाने की संबंधित फैंटम और बीट सिपाही की भी जांच कराई जा रही है कि उन्हें शराब रखने का क्यों नहीं पता चला। जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उसे सस्पेंड किया जाएगा। बता
खिड़की टूटी न होती तो नहीं चलता ‘शराब गोदाम’ का पता
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के बंद पड़े प्राइवेट वार्ड की अगर खिड़की टूटी हुई न होती तो शायद यह पता ही नहीं चल पाता कि वार्ड को ‘शराब गोदाम’ बनाया हुआ था। दरअसल, वार्ड ब्वॉय अनिल कुमार सुबह करीब 9:15 बजे ड्यूटी पर था। खिड़की से उसे संदेह हुआ तो उसने गोदाम में झांककर देखा। उसमें शराब की पेटियां रखी हुई थीं। वार्ड ब्वाय ने प्राचार्य को पत्र लिखकर भी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि ऐसा लगता है कि एक-दो दिन पहले ही शराब की पेटियां यहां रखवाई गई होंगी। उनकी मानें तो ठेकेदार को एक वार्ड अपना सामान आदि रखने के लिए दिया गया था, लिहाजा उसका सामान आता रहता था, इसलिए संदेह नहीं हुआ। लेकिन सूत्रों का कहना है कि वार्ड के मुख्य गेट पर ज्यादातर ताला ही लगा रहता था, वार्ड में बाहर की तरफ एक छोटा गेट खुला हुआ है, उसमें से सामान का लाना ले जाना होता था।
कैंसल किए टेंडर, काली सूची में डाला
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने मैसर्स रैन पीपुल को पत्र लिखा है कि सरकारी भवन में शराब की पेटी रखने के कारण अस्पताल में जो विभिन्न कार्यों के लिए अनुबंध किया गया था, उसे निरस्त कर दिया गया है और फर्म को काली सूची में डाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके मालिक रजत त्यागी हैं।
चार सदस्य कमेटी गठित
प्राचार्य ने एक कमेटी का गठन किया है। जो ठेकेदार द्वारा शराब रखे जाने की घटना की विभिन्न पहलुओं से जांच करते हुए इनकी संस्था द्वारा मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में किए जा रहे कार्यों की विवेचना एवं गुणवत्ता की जांच कर शीघ्र रिपोर्ट देगी। कमेटी में डॉ. विनय अग्रवाल को अध्यक्ष, प्रमुख अधीक्षक डॉ. राकेश दुबे, डॉ. एसकेपालीवाल और डॉ. पीके जैन को सदस्य बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस संस्था ने टाइल्स आदि कॉलेज में लगाई गई हैं, जिनकी शिकायतें मिल रही हैं कि वह सस्ती लगा दी गई हैं, अब इनकी जांच होगी।
ब्लैक करने की तो नहीं थी तैयारी
मेडिकल कॉलेज में यह भी चर्चा है कि शायद यह शराब कांवड़ यात्रा के दौरान शराब की किल्लत हो जाने पर इसे ब्लैक करने की थी, ताकि मोटी कमाई की जा सके। हालांकि ठेकेदार ने पुलिस पूछताछ में इन आरोपों को गलत बताया है।
27 साल से बंद पड़े हैं प्राइवेट वार्ड
मेडिकल कॉलेज के ये प्राइवेट वार्ड करीब 27 साल से बंद पड़े हैं। वर्ष 1978 में तकरीबन एक करोड़ रुपये की लागत से बने इस वार्ड को दुरुस्त करने के लिए पिछले दिनों पहल की गई थी। 10 लाख रुपये इसका बजट आया था, यह काम अभी अटका हुआ है। इसमें 50 रूम हैं। मेडिकल कॉलेज का स्टाफ चाहता था कि उनकी जगह यहां अलग से स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। स्टाफ की ड्यूटी में आनाकानी की वजह से धीरे-धीरे यहां अव्यवस्था फैलती गई और साल 1992 में ये वार्ड पूरी तरह से बंद हो गए।