गोवंश संरक्षण के दावे खोखले: चारा-पानी न ही सफाई, बीमारी से मर रहीं गायें, अफसरों का तो हाल क्या ही कहा जाए
निराश्रित गोवंशों को सरंक्षण के भले ही प्रदेश सरकार तमाम कोशिशें कर रही हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मेरठ समेत यूपी के विभिन्न जिलों में गो संरक्षण केंद्र में अव्यवस्थाओं के चलते गोवंश दुर्दशा के शिकार हैं। अमर उजाला ने मेरठ में पड़ताल की तो गोवंशो की दयनीय स्थिति सामने आई।
विस्तार
गोवंश को आश्रय देने के लिए सरकार ने जिले में 24 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए हैं, लेकिन आश्रय स्थल संचालन कमेटियां पशुओं की देखभाल में तमाम अनियमितता बरत रही हैं। कुछ आश्रय स्थल पर कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है तो कुछ जगह गायों को महीनों से हरा चारा नहीं मिला है। चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में लगातार गोवंश की मौत हो रही है।
रविवार को अमर उजाला की टीम ने अस्थायी गो आश्रय स्थल कपसाड़ की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। सरधना स्थित श्रीगोशाला कपसाड़ में ही गो आश्रय स्थल का निर्माण किया गया। तीन अलग-अलग स्थानों पर 198 गायों को यहां रखा गया है। ज्यादातर गायों की हडि्डयां चमक रही थीं। खोर में सूखा भूसा डाला गया था। सही ढंग से सानी न होने के कारण ज्यादातर गाय भूखी थीं। यहां कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि दो माह से हरा चारा नहीं मिला है।
बारिश के कारण आश्रय स्थल के बाहर आसपास के क्षेत्रों में भी उगाया गया चारा भी खराब हो गया है। 198 गायों की देखभाल के लिए सिर्फ एक कर्मचारी तैनात मिला। गो आश्रय स्थल में एक बछड़ा मरणासन्न पड़ा था। एक सांड़ खुले में बुग्गी के नीचे मरणासन्न अवस्था में था। यहां कई गोवंश बीमार मिले जिन्हें अन्य पशुओं से अलग रखा गया था। कर्मचारी ने बताया कि पशु चिकित्सक 10 से 15 दिन में आते हैं।
भूख और बीमारी से मर रहीं हैं गाय
जिला प्रशासन के 23 मार्च 2022 के आंकड़ों के अनुसार अस्थायी गोआश्रय स्थल कपसाड़ में गाय और गोवंश की संख्या 209 दिखाई गई है। गोशाला में कमेटी की तरफ से पहुंचे सदस्य बसंत ने बताया कि वर्तमान में गो आश्रय स्थल में 198 गोवंश हैं। प्रतिदिन तीन से चार पशु आते हैं। बड़ी संख्या में गोवंश की यहां टैगिंग भी नहीं मिली। छह से सात दिन में दो- तीन पशुओं की मौत हो जाती हैं। यहां गोवंश की संख्या सरकारी आंकड़ों से कम हैं, जिसका कारण पशुओं का भूखा और बीमारी से मरना है।
सफाई का अभाव, खुले में बंधीं ज्यादातर गाय
गो आश्रय स्थल में एक स्थान पर टीन शेड था और एक हॉल बना हुआ था। ज्यादातर गाय खुले में ही बांधी गई थीं। पीने को स्वच्छ पानी और और सफाई का अभाव होने के कारण हर तरफ गंदगी और गोबर पड़ा था। सालों से पानी की चर की सफाई नहीं हुई थीं।
दो माह से पैसा नहीं मिला
गो आश्रय स्थल में 198 गोवंश की देखभाल के लिए तीन कर्मचारी तैनात हैं। गोवंश के लिए चारा नहीं है, भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है। बारिश के कारण चारा खराब हो गया है। दो माह से पैसा भी नहीं मिला है। उधार सामान खरीदकर गायों की देखभाल की जा रही है। - रामभूल, प्रधान पति, कपसाड़
उधार भूसा खरीदकर गायों को खिला रहे
रविवार को छुट्टी के कारण बीमार पशुओं को देखने के लिए चिकित्सक नहीं आए हैं। हरा चारा उपलब्ध नहीं हैं। उधार भूसा खरीदकर गायों को खिलाया जा रहा है। - अरुण सैनी, सचिव, गो आश्रय स्थल कपसाड़