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Meerut News: बीवीजी कंपनी की बहाली पर पार्षदों में आक्रोश, अब सुधार की गारंटी ली
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मेरठ। महानगर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली बीवीजी कंपनी की बहाली पर निगम अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे है, लेकिन पार्षदों में आक्रोश है। पार्षदों का कहना कि कंपनी और निगम अधिकारियों को सुधार की गारंटी लेनी चाहिए। जिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते तीन साल से बीवीजी कंपनी निगम की वित्तीय हानि कर रही थी, अब उनके खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित करें। वहीं, बुधवार देररात तक सूरजकुंड स्थित महापौर के कैंप कार्यालय में नगर निगम और बीवीजी कंपनी के अधिकारियों की बैठक चली, जिसमें 90 दिन के लिए कचरा उठाने की जिम्मेदारी वाला पत्र निगम ने कंपनी को सौंपा।
महापौर की अध्यक्षता में नगर निगम और बीवीजी कंपनी के अधिकारियों के बीच बुधवार शाम 7:00 बजे सूरजकुंड स्थित महापौर कैंप कार्यालय में बैठक बुलाई गई। नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि अनुबंध के अनुसार कंपनी को डोर-ट-डोर कूड़ा कलेक्शन करना होगा। 100 प्रतिशत घरों से यूजर चार्ज वसूली के साथ, सूखा-गीला कचरा अलग-अलग व जागरूकता अभियान सहित सभी कार्य समय पर करने होंगे। कंपनी ने अनुबंध के आधार पर कार्य करने को कहा और 90 दिन कूड़ा कलेक्शन करने की अनुमति वाला पत्र निगम अधिकारियों से ले लिया। चर्चा है कि कंपनी की बहाली को लेकर निगम के कई अधिकारी अपनी-अपनी पीठ थपथपा रहे है। कंपनी अधिकारियों को खुश करने के लिए मंगलवार रात में ही निगम के कई अधिकारियों ने बहाली का पत्र भी भेज दिया था। बीवीजी कंपनी की बहाली पर भाजपा और विपक्ष पार्षदों में आक्रोश है। पार्षदों का कहना कि कंपनी को निलंबित और उसकी बहाली में नगर निगम का गोलमाल है। तीन साल उक्त कंपनी ने निगम की वित्तीय हानि की है। मॉनीटरिंग करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने की बात पार्षदों ने कही है। समिति द्वारा सौंपी रिपोर्ट में भी निगम अधिकारियों की कार्यशैली का भी जिक्र किया गया है।
लापरवाही का जिम्मेदार कौन
बीवीजी कंपनी करीब दो महीने निलंबित रही है। नगर निगम ने निलंबित कंपनी के कर्मचारियों से ही कूड़ा कलेक्शन का कार्य कराया है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन न होने की शिकायत बढ़ती गई और निगम कंपनी के कर्मचारियों का भुगतान नहीं दे पाया। यूजर चार्ज भी नहीं वसूला गया। दो महीने शहर को गंदगी का सामना करना पड़ा, कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला, अधिकारियों की पोल खुली है। लापरवाही की पुष्टि हो गई, फिर भी कंपनी को बहाल कर दिया गया। सवाल उठता है कि इन सब लापरवाही का जिम्मेदार कौन है।
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अनुबंध के आधार पर बीवीजी कंपनी ने कूड़ा कलेक्शन नहीं किया। वित्तीय हानि हुई है, जिसकी कमेटी रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई। कंपनी के कार्यों की मॉनीटरिंग करने वाले स्वास्थ्य वरिष्ठ प्रभारी प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह पर भी जिम्मेदारी भी तय करें।
अजय गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघ
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बीवीजी कंपनी की शिकायत बहुत थी, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का निर्णय मान्य है। सुधार की गारंटी लेनी होगी। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करें और यह बीवीजी कंपनी के लिए आखिर मौका होगा।
अनुज वशिष्ठ, भाजपा पार्षद वार्ड-63
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यूजर चार्ज 80 रुपये की जगह 30 या 50 रुपया वसूले करें, लेकिन 100 प्रतिशत घरों से लें। स्थानीय पार्षद से ही उनके वार्ड में कूड़ा कलेक्शन होने की रिपोर्ट प्रत्येक महीने लेनी चाहिए, उसके बाद बीवीजी कंपनी का भुगतान हो। इसे स्वच्छता कर्मियों पर भी काम का बोझ कम होगा।
पंकज गोयल, भाजपा पार्षद वार्ड-63
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बीवीजी कंपनी के माध्यम से फिर बड़ा घोटाला करने की तैयारी है। नगर आयुक्त द्वारा कंपनी को निलंबित किया गया, समिति की जांच में आरोपों की पुष्टि भी हुई। इसके बाद सेटिंग से कंपनी को बहाल कर दिया गया।
कुलदीप उर्फ कीर्ति घोपला, सपा पार्षद वार्ड-31
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महापौर की अध्यक्षता में नगर निगम और बीवीजी कंपनी के अधिकारियों के बीच बुधवार शाम 7:00 बजे सूरजकुंड स्थित महापौर कैंप कार्यालय में बैठक बुलाई गई। नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि अनुबंध के अनुसार कंपनी को डोर-ट-डोर कूड़ा कलेक्शन करना होगा। 100 प्रतिशत घरों से यूजर चार्ज वसूली के साथ, सूखा-गीला कचरा अलग-अलग व जागरूकता अभियान सहित सभी कार्य समय पर करने होंगे। कंपनी ने अनुबंध के आधार पर कार्य करने को कहा और 90 दिन कूड़ा कलेक्शन करने की अनुमति वाला पत्र निगम अधिकारियों से ले लिया। चर्चा है कि कंपनी की बहाली को लेकर निगम के कई अधिकारी अपनी-अपनी पीठ थपथपा रहे है। कंपनी अधिकारियों को खुश करने के लिए मंगलवार रात में ही निगम के कई अधिकारियों ने बहाली का पत्र भी भेज दिया था। बीवीजी कंपनी की बहाली पर भाजपा और विपक्ष पार्षदों में आक्रोश है। पार्षदों का कहना कि कंपनी को निलंबित और उसकी बहाली में नगर निगम का गोलमाल है। तीन साल उक्त कंपनी ने निगम की वित्तीय हानि की है। मॉनीटरिंग करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने की बात पार्षदों ने कही है। समिति द्वारा सौंपी रिपोर्ट में भी निगम अधिकारियों की कार्यशैली का भी जिक्र किया गया है।
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लापरवाही का जिम्मेदार कौन
बीवीजी कंपनी करीब दो महीने निलंबित रही है। नगर निगम ने निलंबित कंपनी के कर्मचारियों से ही कूड़ा कलेक्शन का कार्य कराया है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन न होने की शिकायत बढ़ती गई और निगम कंपनी के कर्मचारियों का भुगतान नहीं दे पाया। यूजर चार्ज भी नहीं वसूला गया। दो महीने शहर को गंदगी का सामना करना पड़ा, कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला, अधिकारियों की पोल खुली है। लापरवाही की पुष्टि हो गई, फिर भी कंपनी को बहाल कर दिया गया। सवाल उठता है कि इन सब लापरवाही का जिम्मेदार कौन है।
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अनुबंध के आधार पर बीवीजी कंपनी ने कूड़ा कलेक्शन नहीं किया। वित्तीय हानि हुई है, जिसकी कमेटी रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई। कंपनी के कार्यों की मॉनीटरिंग करने वाले स्वास्थ्य वरिष्ठ प्रभारी प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह पर भी जिम्मेदारी भी तय करें।
अजय गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघ
बीवीजी कंपनी की शिकायत बहुत थी, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का निर्णय मान्य है। सुधार की गारंटी लेनी होगी। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करें और यह बीवीजी कंपनी के लिए आखिर मौका होगा।
अनुज वशिष्ठ, भाजपा पार्षद वार्ड-63
यूजर चार्ज 80 रुपये की जगह 30 या 50 रुपया वसूले करें, लेकिन 100 प्रतिशत घरों से लें। स्थानीय पार्षद से ही उनके वार्ड में कूड़ा कलेक्शन होने की रिपोर्ट प्रत्येक महीने लेनी चाहिए, उसके बाद बीवीजी कंपनी का भुगतान हो। इसे स्वच्छता कर्मियों पर भी काम का बोझ कम होगा।
पंकज गोयल, भाजपा पार्षद वार्ड-63
बीवीजी कंपनी के माध्यम से फिर बड़ा घोटाला करने की तैयारी है। नगर आयुक्त द्वारा कंपनी को निलंबित किया गया, समिति की जांच में आरोपों की पुष्टि भी हुई। इसके बाद सेटिंग से कंपनी को बहाल कर दिया गया।
कुलदीप उर्फ कीर्ति घोपला, सपा पार्षद वार्ड-31