भ्रष्टाचार: जिंदगी से खेल रहा पीडब्लूडी..., बिजली बंबा बाईपास पर 24 घंटे में ही उखड़ने लगा पैचवर्क
मेरठ में बिजली बंबा बाईपास पर पीडब्ल्यूडी का भ्रष्टाचार सामने आया है। यहां कराया गया पैच वर्क 24 घंटे के भीतर ही उखड़ने लगा। बता दें कि इस मार्ग पर तकरीबन 80 हजार वाहनों का दबाव रहता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ शहर ही लाइफलाइन बन चुका बिजली बंबा बाईपास पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) आम लोगों की जिंदगी से खेल रहा है। पहले तो चार दिन की बारिश में ही बाईपास पर जगह-जगह सड़क उखड़ने से गहरे गड्ढे हो गए। दूसरी ओर मंगलवार को किए गए पैचवर्क का कार्य मात्र 24 घंटे में ही उखड़ने लगा। कई स्थानों पर सिर्फ हल्का तारकोल और रोड़ी डालकर खानापूर्ति कर ली गई। ये हाल तब है जबकि बाईपास पर सुबह से लेकर रात तक 80 हजार वाहनों का दबाव रहता है।
इस बाईपास पर आवासीय कॉलोनी, गांव सहित अन्य संपर्क मार्ग हैं। बाईपास से स्कूल, कॉलेज, कार्यालय आदि जाने वाले लोग दोपहिया वाहनों से गुजरते हैं। इसके बाद भी पीडब्लूडी लापरवाही की हदें पार कर रहा है, जिससे साफ है कि दुर्घटना को कम करने के बजाय वह आम लोगों के जीवन से खेल रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़कों की मरम्मत के लिए गुणवत्ता के लिए स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद भी इंजीनियर, ठेकेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
यह भी पढ़ें: हैरतंगेज: युवक के पेट में डॉक्टरों को दिखा कुछ ऐसा, ऑपरेशन किया तो रह गए दंग, सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप
सड़क पर रखकर बना दिया मिक्चर
लोक निर्माण विभाग राज्य संपर्क मार्ग जैसे कार्य करता है। इसके बाद भी बाईपास की मरम्मत के लिए सड़क पर ही माल तैयार कर दिया। तारकोल के ड्रम आदि से रोड़ी मिलाकर पैचवर्क कर दिया गया। बुधवार को पैचवर्क पूरी तरह कई स्थानों से रोड़ी के रुप में अलग होने लगा है।
यह हाल तब है, जबकि यह क्षेत्र ऊर्जा राज्यमंत्री और दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर का है। इस बाईपास से एडीजी, कमिश्नर, आईजी, जिलाधिकारी, सांसद, विधायक आदि गुजरते हैं। दिल्ली रोड पर रैपिड रेल के कार्य के चलते अधिकतर वाहनों के लिए बाईपास ही विकल्प बचा हुआ है।
फिर कराएंगे काम
अगर ऐसा है तो गंभीर मामला है। ठेकेेदार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसा किया जाना ठीक नहीं है। फिर काम कराया जाएगा। - शैलेंद्र सारस्वत, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग