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Exclusive: गढ़-मेरठ मार्ग के चौड़ीकरण में वन विभाग का भ्रष्टाचार, निशान 10 हजार पेड़ों पर, काटने को मिले केवल 56

Mon, 21 Dec 2020 10:46 AM IST
Dimple Sirohi अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 21 Dec 2020 10:46 AM IST
सार

  • 10 हजार पेड़ों पर लगा रखे हैं निशान
  • 30 किमी सड़क पर कटने के लिए मिले सिर्फ 56 पेड़  

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Exclusive: Corruption of forest department in widening of Garh-Meerut road
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

मेरठ-गढ़मुक्तेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग (709 ए) के चौड़ीकरण में वन विभाग का भ्रष्टाचार सामने आया है। मेरठ जिले की सीमा में आने वाले 30 किमी के दायरे में वन विभाग ने 56 पेड़ कटने के लिए चिह्नित किए हैं, जबकि निशान करीब 10 हजार पेड़ों पर लगा रखे हैं।
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राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए 2018 में नोटिफिकेशन हुआ था। इसके बाद किसानों की जमीनों का अधिग्रहण करने की कार्रवाई के साथ वन विभाग की जमीन और पेड़ों का भी सर्वे शुरू हुआ।  विभाग को सड़क के बीच से दोनों तरफ पैमाइश करते हुए अपनी जमीन के साथ साथ पेड़ों का भी चिह्नांकन करना था। इसी आधार पर वन विभाग एनएचएआई से अपनी जमीन और पेड़ कटान की कीमत वसूलेगा।
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वन विभाग ने यहां बड़ा खेल कर दिया। जहां सड़क के बीच से उसकी जमीन की हिस्सेदारी दोनों तरफ से 18-18 मीटर बैठती है लेकिन वन विभाग ने इससे ज्यादा की पैमाइश करते हुए किसानों की जमीन पर लगे पेड़ भी अपने खाते में दर्ज कर लिए।
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पीड़ित ने उठाई आवाज तो धमकी मिली
मामले में सत्या फिलिंग सेंटर के मालिक हेमंत सिरोही ने वन विभाग में न केवल शिकायत की, बल्कि आरटीआई में भी इसका जवाब मांगा। इस पर पता चला कि इस पूरे मार्ग पर वन विभाग ने केवल 56 पेड़ ही कटान के लिए चिह्नित किए हैं।

भ्रष्टाचार की आशंका पर हेमंत ने जवाब मांगा तो विभाग की तरफ से उन्हें धमकी दी गई कि हम साबित कर देंगे कि यह पेड़ हमारे हैं और आपको इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। हेमंत के नियमों की जानकारी मांगने पर नहीं दिए गए।

विभाग के जवाब पर भी सवाल
गढ़-मेरठ मार्ग पर दोनों तरफ करीब दस हजार पेड़ चौड़ीकरण की हद में आ रहे हैं। ये पेड़ निश्चित रूप से काटे जाएंगे। दूसरी तरफ एनएचएआई सिर्फ चिह्नित पेड़ों का ही मुआवजा देगा। बाकी पेड़ कटान का पैसा कहां जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

बोलने से भी डर रहे अधिकारी
हेमंत की पैरवी के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। तत्कालीन डीएफओ की शिकायतें शासन में हुई, जिसकी जांच चल रही है। विभाग ने इसके बाद भी नए सिरे से सर्वे कराने की जरूरत नहीं समझी है। दूसरे अधिकारी बोलने से डर रहे हैं क्योंकि आरटीआई में जवाब देकर विभागीय अधिकारी खुद फंस चुके हैं।

आज कराएंगे जांच
सोमवार को इसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित अधिकारियों से इसका जवाब भी मांगा जाएगा। - अनिल कुमार, प्रभारी, जिला वन अधिकारी

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