{"_id":"5e0d03678ebc3e87a02357e1","slug":"corporation-s-final-exam-for-success-in-cleanliness-survey-meerut-news-mrt461633991","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए निगम की अंतिम परीक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए निगम की अंतिम परीक्षा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए निगम की अंतिम परीक्षा
मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण 2019-2020 में मेरठ ने दो राउंड की परीक्षा में भले ही पश्चिम के कई शहरों को स्वच्छता में पछाड़ दिया हो, लेकिन जनवरी में 4500 अंकों की लड़ाई में नगर निगम को पसीना छूट रहा है। इसमें जहां स्थलीय निरीक्षण के दौरान टीम स्वच्छता की जांच करेगी, वहीं जनता से भी फीड बैक लिया जाएगा। रात्रिकालीन सफाई को भी प्राथमिकता पर देखा जाएगा।
केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन चलाया हुआ है। इसके तहत पूरे देश की स्वच्छता को प्राथमिकता पर लिया गया है। सरकार का मानना है कि यदि शहर स्वच्छ होगा तो पर्यावरण भी स्वच्छ होगा। इससे बीमारियों से भी राहत मिलेगी। सरकार ने स्वच्छता के लिए अलग से मद जारी की हुई हैं। साथ ही सरकारी मशीनरी और जनता स्वच्छता पर प्राथमिकता से ध्यान दें, इसके लिए स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू किया हुआ है। स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता हासिल करने पर सरकार उस शहर को अतिरिक्त बजट देगी। स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे अहम भूमिका जनता से फीडबैक ही रहेगा।
ये हैं सफलता के बिंदु
- कूड़ा निस्तारण प्लाट का संचालन।
- घरों में भी कंपोस्ट बनाने की योजना।
- डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था।
- शहर में 150 से अधिक स्थानों पर टायलेट और 85 स्थानों पर शौचालय।
- डलावघरों को अंडरग्राउंड करने की योजना।
यहां आएगी दिक्कत
- शहर में दो टाइम सफाई का न होना।
- डिवाइडर मार्गों पर अधिक गंदगी रहना।
- रात्रि कालीन सफाई की कोई व्यवस्था न होना।
- शौचालय और टायलेट की सफाई न होना।
- अधिकतर शौचालयों पर ताले लटके होना।
- नालों की सफाई में फिसड्डी रहना।
अगले सप्ताह आएगी ओडीएफ प्लस की टीम
स्वच्छता सर्वेक्षण के अहम बिंदु शौचालय यानी ओडीएफ का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए टीम आगामी सप्ताह शहर में होगी। 2018 में घर-घर और सार्वजनिक स्थानों पर बनवाए गए शौचालयों की भी जांच करेगी। शौचालय की स्वच्छता और संचालन पर निगम कितना गंभीर है इस पर भी अंक मिलेंगे।
विज्ञापन
145 लोगों से रिकवरी की तैयारी
2017-18 में नगर निगम ने शहर में लगभग आठ हजार परिवारों को अपने घरों में शौचालय निर्माण के लिए पहली किश्त के रूप में चार हजार रुपये जारी किए थे। प्रशासन ने जांच कराई तो शहर में लगभग 240 मकान ऐसे मिले जिन्होंने पैसे लेने के बाद भी शौचालय नहीं बनाए। निगम प्रशासन ने ऐसे लोगों के खिलाफ जांच की चेतावनी दी। कुल मिलाकर अभी भी 145 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने घर में शौचालय नहीं बनाया और न ही सरकारी खजाने से लिए रुपये वापस किए। नगर निगम प्रशासन ने उन परिवारों से सरकारी धन की रिकवरी करने के लिए सभी बैंकों में रिपोर्ट भेज दी है। यदि धन की रिकवरी नहीं होती है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
इस बार सफलता की कोशिश
हमारे पास पूरी शक्ति नहीं हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण की जिम्मेदारी एक सफाई इंस्पेक्टर को दी गई है। फिर भी हमारा प्रयास है कि इस बार मेरठ स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता हासिल करे। -डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
विज्ञापन
मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण 2019-2020 में मेरठ ने दो राउंड की परीक्षा में भले ही पश्चिम के कई शहरों को स्वच्छता में पछाड़ दिया हो, लेकिन जनवरी में 4500 अंकों की लड़ाई में नगर निगम को पसीना छूट रहा है। इसमें जहां स्थलीय निरीक्षण के दौरान टीम स्वच्छता की जांच करेगी, वहीं जनता से भी फीड बैक लिया जाएगा। रात्रिकालीन सफाई को भी प्राथमिकता पर देखा जाएगा।
केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन चलाया हुआ है। इसके तहत पूरे देश की स्वच्छता को प्राथमिकता पर लिया गया है। सरकार का मानना है कि यदि शहर स्वच्छ होगा तो पर्यावरण भी स्वच्छ होगा। इससे बीमारियों से भी राहत मिलेगी। सरकार ने स्वच्छता के लिए अलग से मद जारी की हुई हैं। साथ ही सरकारी मशीनरी और जनता स्वच्छता पर प्राथमिकता से ध्यान दें, इसके लिए स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू किया हुआ है। स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता हासिल करने पर सरकार उस शहर को अतिरिक्त बजट देगी। स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे अहम भूमिका जनता से फीडबैक ही रहेगा।
विज्ञापन
ये हैं सफलता के बिंदु
- कूड़ा निस्तारण प्लाट का संचालन।
- घरों में भी कंपोस्ट बनाने की योजना।
- डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था।
- शहर में 150 से अधिक स्थानों पर टायलेट और 85 स्थानों पर शौचालय।
- डलावघरों को अंडरग्राउंड करने की योजना।
यहां आएगी दिक्कत
- शहर में दो टाइम सफाई का न होना।
- डिवाइडर मार्गों पर अधिक गंदगी रहना।
- रात्रि कालीन सफाई की कोई व्यवस्था न होना।
- शौचालय और टायलेट की सफाई न होना।
- अधिकतर शौचालयों पर ताले लटके होना।
- नालों की सफाई में फिसड्डी रहना।
अगले सप्ताह आएगी ओडीएफ प्लस की टीम
स्वच्छता सर्वेक्षण के अहम बिंदु शौचालय यानी ओडीएफ का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए टीम आगामी सप्ताह शहर में होगी। 2018 में घर-घर और सार्वजनिक स्थानों पर बनवाए गए शौचालयों की भी जांच करेगी। शौचालय की स्वच्छता और संचालन पर निगम कितना गंभीर है इस पर भी अंक मिलेंगे।
विज्ञापन
145 लोगों से रिकवरी की तैयारी
2017-18 में नगर निगम ने शहर में लगभग आठ हजार परिवारों को अपने घरों में शौचालय निर्माण के लिए पहली किश्त के रूप में चार हजार रुपये जारी किए थे। प्रशासन ने जांच कराई तो शहर में लगभग 240 मकान ऐसे मिले जिन्होंने पैसे लेने के बाद भी शौचालय नहीं बनाए। निगम प्रशासन ने ऐसे लोगों के खिलाफ जांच की चेतावनी दी। कुल मिलाकर अभी भी 145 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने घर में शौचालय नहीं बनाया और न ही सरकारी खजाने से लिए रुपये वापस किए। नगर निगम प्रशासन ने उन परिवारों से सरकारी धन की रिकवरी करने के लिए सभी बैंकों में रिपोर्ट भेज दी है। यदि धन की रिकवरी नहीं होती है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
इस बार सफलता की कोशिश
हमारे पास पूरी शक्ति नहीं हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण की जिम्मेदारी एक सफाई इंस्पेक्टर को दी गई है। फिर भी हमारा प्रयास है कि इस बार मेरठ स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता हासिल करे। -डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी