मेरठ: माइक्रोबायोलॉजी लैब के सफाई कर्मचारी ने नाम बदल कर कराया कोरोना का टेस्ट, व्यवस्था पर उठाए सवाल
- मोबाइल पर हुई बातचीत में सफाई कर्मचारी ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर उठाए सवाल
विस्तार
मेरठ मेडिकल कॉलेज स्थित माइक्रोबायोलॉजी लैब के जिस 50 वर्षीय सफाई कर्मचारी को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। सफाई कर्मचारी ने नाम बदलकर कोरोना का टेस्ट कराया है। इस सफाई कर्मचारी को मेडिकल कॉलेज के कोविड-19 वार्ड में भर्ती करा दिया गया है। मोबाइल पर हुई बातचीत में सफाई कर्मचारी ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
सफाई कर्मचारी ने कहा कि पिछले 90 दिन से लगातार मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भी ड्यूटी कर रहा था और पिछले 4 दिन से उसे बुखार था। कई बार डॉक्टर से शिकायत की और लगातार टेस्ट कराने के लिए कहता रहा। अन्य लोगों से भी कहा था कि मुझे बुखार है और शायद कोरोना हो गया है।
लेकिन डॉक्टर यह कहकर टालमटोल कर रहे थे कि कोरोना नहीं है और बुखार भी नहीं है। वैसे ही थकान के कारण शरीर टूट रहा होगा। सफाई कर्मचारी ने यह भी कहा कि जब मेरी हालत खराब होती गई और लगने लगा कि अब बुखार बढ़ता जा रहा है तो मुझे चिंता होने लगी। जिसके बाद मैंने अपना नाम बदलकर दूसरे नाम से मेडिकल कॉलेज में कोरोना का टेस्ट कराया।
शनिवार को जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो मुझे स्वास्थ विभाग की टीम ने कोविड-19 वार्ड में भर्ती करा दिया है। सफाई कर्मचारी का कहना है कि वह 6 घंटे की ड्यूटी करता था और 3 दिन पहले ही बुखार होने पर बस उसे 1 दिन की छुट्टी दी गई थी। उसके बाद फिर काम करने के लिए कहा गया। वह हर रोज अपने घर भी आ जा रहा था।
सफाई कर्मचारी का टेस्ट न कराने को लेकर कर्मचारी नेता विपिन त्यागी और अन्य कर्मचारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से भी इस संबंध में रविवार को मिलेंगे। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एसके गर्ग का कहना है कि जांच में यह सामने आया है कि सफाई कर्मचारी ने नाम बदलकर कोरोना का टेस्ट कराया है। लेकिन ऐसा उसने क्यों किया इसकी जांच कराई जा रही है।