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कोरोना को हराकर घर लौटे कई परिवार, अमर उजाला से बयां किया दिल का हाल, जानें- पड़ोसी-रिश्तेदारों को लेकर क्यों कही ये बात
Wed, 27 May 2020 01:11 AM IST
कपिल kapil
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
Published by: कपिल kapil
Updated Wed, 27 May 2020 01:11 AM IST
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इन्होंने कोरोना को हराया है।
- फोटो : अमर उजाला
वैश्विक महामारी बन गए कोरोना संक्रमण से सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ रहा है। पॉजिटिव मिले लोगों के प्रति रिश्तेदारियों से लेकर पड़ोसियों तक का व्यवहार बदल रहा है। लोग मिलने से बच रहे हैं। मगर, ठीक होकर घर लौटने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ सकारात्मक सोच और अपने परिवार के साथ की वजह से ही कोरोना को मात दी। नि:संदेह डॉक्टरों का पूरा योगदान हैं, लेकिन अगर परिवार के सदस्य घबरा जाते और एक-दूसरे का सहयोग नहीं करते तो न जाने क्या होता। इसलिए यह जरूरी है कि कोरोना संक्रमण जैसी महामारी को हराने के लिए सकारात्मक सोचें। बीमार के प्रति नकारात्मक रवैया नहीं रखें। पढ़िए बागपत जिले की ये खास रिपोर्ट-
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हम अच्छा सोचते रहे, बाकी डॉक्टरों पर छोड़ दिया
लैब टेक्नीशियन देवेंद्र शर्मा का कहना है कि कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी हमारा परिवार सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ा। धैर्य रखते हुए अपने नजदीक निराशा व नकारात्मक विचारों को नहीं आने दिया। परिवार के छह सदस्य पॉजिटिव पाए जाने के बाद चिंता जरूर हुई, लेकिन हमने कभी भी हिम्मत नहीं हारी। मगर, वह यह कहना चाहते हैं कि अगर कोई भी मरीज मिले तो उसके साथ निगेटिव व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। सबको मिलकर बीमारी से लड़ना चाहिए, बीमार से नहीं।
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घर लौट आए हम बहुत खुश
लैब टेक्नीशियन देवेंद्र शर्मा, उनकी बेटी अन्नू, मानसी, बेटा अभिषेक, पत्नी नीरज शर्मा, भतीजी तनु का कहना है कि वह घर लौट आए और बहुत खुश हैं। पूरा परिवार अपनी पसंद के कार्यों में व्यस्त है। मनपसंद किताबें पढ़ी जा रही हैं, रेसिपी बनाई जा रही है। दवाइयों के साथ-साथ किसी भी मरीज को परिवार का सहयोग और अच्छे विचारों की ताकत जरूरी होती है।
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यह भी पढ़ें: कैंसर पीड़ित कोरोना पॉजिटिव की दिल्ली के अस्पताल में मौत, सवालों के घेरे में संक्रमण की पुष्टि करने वाली निजी लैब
मेरी ताकत बन गया मेरा परिवार
सरूरपुर कलां निवासी कपिल नैन जिले में सबसे पहले कोरोना पॉजिटिव मिले और सबसे पहले ही वह ठीक होकर अपने घर लौटे। कपिल का कहना है कि पूरा परिवार उनके साथ खड़ा था। इलाज के साथ-साथ परिवार का सहयोग खूब मिला। परिवार मेरी ताकत बन गया। कपिल नैन के भाई सचिन नैन कहते हैं कि बीमार से भेदभाव करना गलत है। समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। कुछ लोग बदल गए थे, कुछ लोगों ने बहुत सहयोग किया, लेकिन हमें किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है। हमारे लिए यही खुशी है कि पूरा परिवार और हमारा गांव स्वस्थ है।
हवा के झोंके की तरह बदल गई जिंदगी
रटौल गांव निवासी युवा आदिल दिल्ली से आए जमातियों के संपर्क में आने के बाद कोरोना पॉजिटिव हो गया था। आदिल का कहना है कि जैसे एक हवा का झोंका आया और जिंदगी बदल गई। पूरा परिवार अस्पताल में और आडू की फसल बर्बाद हो गई। आम के बाग पर छिड़काव नहीं हुआ। 26 अप्रैल को वह ठीक होकर घर लौटा तो आम की फसल को संभालने में जुट गया। बीमारी के हालत में उसके पिता यासीन, मां जुबैदा, छह भाई और दो बहनों ने हिम्मत बंधाई। उन्होंने कहा कि जो अच्छा सोचते हैं और अच्छा करते हैं, उन पर ऊपर वाला मेहरबानी करता है।
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सरूरपुर कलां निवासी कपिल नैन जिले में सबसे पहले कोरोना पॉजिटिव मिले और सबसे पहले ही वह ठीक होकर अपने घर लौटे। कपिल का कहना है कि पूरा परिवार उनके साथ खड़ा था। इलाज के साथ-साथ परिवार का सहयोग खूब मिला। परिवार मेरी ताकत बन गया। कपिल नैन के भाई सचिन नैन कहते हैं कि बीमार से भेदभाव करना गलत है। समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। कुछ लोग बदल गए थे, कुछ लोगों ने बहुत सहयोग किया, लेकिन हमें किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है। हमारे लिए यही खुशी है कि पूरा परिवार और हमारा गांव स्वस्थ है।
हवा के झोंके की तरह बदल गई जिंदगी
रटौल गांव निवासी युवा आदिल दिल्ली से आए जमातियों के संपर्क में आने के बाद कोरोना पॉजिटिव हो गया था। आदिल का कहना है कि जैसे एक हवा का झोंका आया और जिंदगी बदल गई। पूरा परिवार अस्पताल में और आडू की फसल बर्बाद हो गई। आम के बाग पर छिड़काव नहीं हुआ। 26 अप्रैल को वह ठीक होकर घर लौटा तो आम की फसल को संभालने में जुट गया। बीमारी के हालत में उसके पिता यासीन, मां जुबैदा, छह भाई और दो बहनों ने हिम्मत बंधाई। उन्होंने कहा कि जो अच्छा सोचते हैं और अच्छा करते हैं, उन पर ऊपर वाला मेहरबानी करता है।
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