लॉकडाउन पर बोले मजदूर, सामने है रोजी-रोटी का संकट, याद आए नोटबंदी के दिन
कोरोना के कारण रोजाना कमाने वाले मजदूरों के सामने संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, एक तरफ सरकार मजदूरों के खाते में एक हजार रुपये भेजने का दावा कर रही है, लेकिन कितने मजदूरों को इसका लाभ मिलेगा, यह देखने होगा।
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कोरोना के कारण रोजाना कमाने वाले मजदूरों के सामने संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, एक तरफ सरकार मजदूरों के खाते में एक हजार रुपये भेजने का दावा कर रही है, लेकिन कितने मजदूरों को इसका लाभ मिलेगा, यह देखने होगा। अभी के हालात में मजदूरों के सामने एक वक्त की रोटी के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
अमर उजाला संवाददाता ने शास्त्री नगर स्थित मजदूर चौक पर पहुंचकर ऐसे ही कुछ मजदूरों से बातचीत की। बातचीत से पहले ही उनका दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
उनका कहना था कि नोटबंदी से भी खतरनाक कोरोना का यह समय अब काटना होगा। चार वर्ष पहले भी नोटबंदी से हजारों मजदूरों के सामने काम का संकट खड़ा हो गया था।
याद दिला दिए नोटबंदी के दिन
पेड़ से कमर लगाए खड़े मजदूरों को चार वर्ष पहले के नोटबंदी के दिन याद आने लगे हैं। मजदूरों का कहना है कि उस समय भी ऐसे ही हालात हो गए थे। एक महीने तक कोई कार्य नहीं मिला था। इस बार तो दुकानें भी कम समय के लिए खुल रही हैं। इससे बुरे दिन ओर क्या आएंगे।
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यह कहना है मजदूरों का
उधार भी हो गया बंद
पिछले दो दिनों से उधार का राशन ले रहे थे। लेकिन वह भी बंद है। हमारा कैसे गुजारा होगा पता नहीं। - महेश, मजदूर
मैं रजिस्टर्ड मजदूर हूं
मैं श्रम विभाग का रजिस्टर्ड मजदूर हूं, लेकिन अभी तक खाते में पैसे नहीं पहुंचे हैं। - राणा सिंह, मजदूर
पता नहीं क्या होगा
इस बीमारी ने तो सब कुछ खत्म कर दिया। भगवान ही मालिक है क्या होगा। अब तो काम बिल्कुल खत्म हो गया। - अजय
हमें भगाया भी जा रहा है। मजदूर चौक पर खड़े भी नहीं होने दिया जा रहा। कम से कम कोई कार्य चल रहा हो तो हमें काम मिल जाए। - रोहताश, मजदूर
जल्द ठीक हो जाए सब
हमारी तरफ सरकार को ध्यान देना होगा। जल्द सब ठीक हो जाए। जिससे हमारा परिवार चलता रहे। - प्रमोद, मजदूर
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