कोरोना: अब सामने आएगा हर मौत का असली सच, कमिश्नर ने जांच के लिए बनाई ये नई व्यवस्था
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अब कोरोना से होने वाली हर मौत का विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए सीडीओ की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। विश्लेषण में निजी या सरकारी अस्पताल की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। कोरोना पर नियंत्रण के लिए पांच जोन बनाए गए हैं, जिसमें जोनल प्रभारी के साथ-साथ मजिस्ट्रेट व अधिकारियों की तैनाती की गई है।
सोमवार शाम कमिश्नर अनीता मेश्राम ने बैठक कर कोरोना टेस्टिंग के लिए संचालित मोबाइल वैन के प्राइवेट अस्पतालों में उनके खुलने के समय सुबह 9:00 बजे के स्थान पर सुबह 11:30 बजे या उसके बाद पहुंचने पर नाराजगी जताई। बताया कि 22 सितंबर से जिले को एक और मोबाइल वैन मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि कोरोना से जो भी मृत्यु होगी, उसकी सूचना जोनल प्रभारी को दी जाएगी। जोनल प्रभारी भी कमेटी का सहयोग करेंगे। प्राइवेट अस्पताल प्रतिदिन कोरोना के संदिग्ध मरीजों की सूचना प्रशासन को दें। सीएमओ कुछ प्राइवेट अस्पतालों को भी कोरोना की जांच के लिए एंटीजन टेस्ट किट उपलब्ध कराएंगे।
बैठक में डीएम के बालाजी, सीडीओ ईशा दुहन, सीएमओ डॉ. राजकुमार, प्राचार्य डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गजेन्द्र सिंह, आईएमए अध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा, नर्सिग एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अंबेश पंवार और लोकप्रिय अस्पताल के डॉ. रोहित मौजूद रहे।
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निजी अस्पतालों में क्या-क्या दवाइयां दी गईं, इसकी भी होगी पड़ताल
मुख्य विकास अधिकारी मेरठ की अध्यक्षता में जो चार सदस्यीय कमेटी बनी है, उसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज और आईएमए के प्रतिनिधि होंगे। कमेटी इस बात पर भी ध्यान देगी कि मरीज ने किन-किन अस्पतालों में इलाज कराया, उसको क्या-क्या दवाइयां दी गईं। ऑक्सीजन पर रखा गया था तो कितने दिन से वह ऑक्सीजन पर था। प्राइवेट अस्पताल द्वारा उसे कब और किस स्थिति में मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया।
'हालत बिगड़ने पर मेडिकल रेफर करते हैं निजी अस्पताल'
कमिश्नर ने कहा कि कई ऐसे मामले हैं जिनमें मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के कुछ समय बाद ही मरीज की मृत्यु हो गई। कई निजी अस्पतालों में बेहद गंभीर हालत में मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया। यह बेहद खेदजनक है। अगर समय रहते मरीज को मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
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