मेरठ में संक्रमित हर 42वें व्यक्ति की जान ले रहा कोरोना, पढ़िए अमर उजाला की ये खास रिपोर्ट
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कोरोना संक्रमण मेरठ में हर 42वें व्यक्ति की जान ले रहा है। शुरुआत में जब मार्च माह में कोरोना ने दस्तक दी तो लॉकडाउन में सख्ती से पालन हुआ। कोरोना के मरीज कम मिलते रहे। लेकिन मौत ज्यादा रहीं। पहले 1000 मरीजों में ही जिले में कोरोना से 70 लोगों की मौत हो गई।
जिले में कोरोना संक्रमण का पहला मरीज 27 मार्च को मिला था। जबकि जिले में कोरोना संक्रमण से पहली मौत एक अप्रैल को हुई थी। 30 जून तक जिले में कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या 1000 पहुंची। एक हजार मरीज तक पहुंचने में 94 दिन लगे, लेकिन इस बीच 70 लोगों की जान चली गई। उसके बाद जैसे ही अनलॉक हुआ। कोरोना ने भयावह स्थिति दिखानी शुरू कर दी। मेडिकल कॉलेज और कोविड अस्पतालों में लगातार मौतों को लेकर आईएएस अधिकारी और डॉक्टर लगातार बैठक करते रहे। मौतों की संख्या में तो कमी आई, लेकिन कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। पहले पांच माह में जहां मेरठ में 4000 मरीज मिले, वहीं अकेले सितंबर में ही जिले में 5200 मरीज मिले।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार छह अक्तूबर तक मेरठ में दो लाख 72 हजार से अधिक लोगों का कोरोना के लिए टेस्ट किया जा चुका है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 10,000 को पार कर गई है। अभी तक जो कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं उनमें कोरोना से हुई मरीजों की मौत का प्रतिशत 2.4 रहा है।
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पहले 1000 मरीजों में हुई सबसे अधिक 70 लोगों की मौत
मरीज संख्या तारीख मौत दिन
1000 30 जून 70 94
2000 27 जुलाई 88 27
3000 20 अगस्त 107 24
4000 31अगस्त 119 11
5000 8 सितंबर 135 08
6000 13 सितंबर 154 05
7000 19 सितंबर 182 06
8000 24 सितंबर 204 05
9000 29 सितंबर 219 05
10,000 6 अक्तूबर 244 07
लक्षण दिखने के कई दिन बाद कराया जा रहा टेस्ट
कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखाई देने के बावजूद टेस्ट देरी से कराए जा रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निर्देश दे रहे हैं कि कोरोना संक्रमण का यदि कोई लक्षण है तो इलाज कराने से पहले कोरोना की जांच कराएं। इसमें यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो स्वास्थ्य विभाग मरीजों को मेडिकल कॉलेज एवं अन्य कोविड अस्पतालों में आइसोलेट करे।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि देहात में अधिकतर ऐसे लोग सामने आए हैं जिन्हें हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज लाया गया। मेरठ के नोडल अधिकारी और विशेष सचिव अरुण प्रकाश ने बताया कि कोरोना मरीजों एवं तीमारदारों से बातचीत से यह जानकारी सामने आई है कि संक्रमण का टेस्ट कराने में कुछ मरीजों ने देरी की है। इनमें देहात के अधिकतर ऐसे लोग हैं जिन्होंने झोलाछाप अथवा मेडिकल स्टोर से दवा ली है। जब फायदा नहीं हुआ तो कोरोना का टेस्ट कराया। रिपोर्ट पॉजिटिव आने एवं बुखार, जुकाम, खांसी एवं सांस लेने में परेशानी होने पर नजदीक के सरकारी अस्पताल, जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यह जानकारी जांच एवं समीक्षा के बाद सामने आई है।
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