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कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों की जांच पड़ताल में बड़ा खुलासा, शरीर में हमेशा के लिए नहीं बनती एंटीबॉडी
Tue, 24 Nov 2020 12:09 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 24 Nov 2020 12:09 PM IST
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी हमेशा के लिए नहीं बनती हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों में कम एंटीबॉडी बनती है और कुछ में ज्यादा। यह बात कोरोना मरीजों की जांच पड़ताल में सामने आई है। हालांकि अभी मेरठ में इस पर कोई शोध नहीं हुआ है।
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मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि इस विषय पर शोध की जरूरत है। इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि जरूरी नहीं है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में हमेशा के लिए इम्युनिटी बनी रहे, क्योंकि एंटीबॉडी इस प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा भर है।
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ऐसे मरीज प्रकाश में आए हैं कि जिनके शरीर में एंटीबॉडी का असर खत्म हो जाता है। कई बार बनता भी नहीं है, या कम बनता है। कई ऐसे कोरोना संक्रमित मिले हैं, जिनके शरीर में एंटीबॉडी विकसित ही नहीं हुई। ऐसे भी मामले हैं जो दूसरी बार संक्रमण की चपेट में आए हैं।
क्या है एंटीबॉडी
एंटीबॉडी वह प्रोटीन है जिसे बी-कोशिकाएं वायरस को जकड़कर खत्म करने के लिए बनाती हैं। वायरस का पहला संक्रमण होने पर शरीर इससे आसानी से नहीं लड़ पाता है, लेकिन दूसरी बार संक्रमण होने पर शरीर का इम्युनिटी सिस्टम इससे निपटने के लिए तैयार हो जाता है और पहले से ज्यादा बेहतर एंटीबॉडी बनाता है, लेकिन कोरोना वायरस में सभी मरीजों के साथ ऐसा नहीं हो रहा है।