{"_id":"63bf24b444f9dc5c4831090e","slug":"corona-also-could-not-become-a-means-to-increase-mbbs-seats-in-medical-meerut-news-mrt621393029","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: कोरोना भी नहीं बन पाया मेडिकल में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने का जरिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: कोरोना भी नहीं बन पाया मेडिकल में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने का जरिया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना भी नहीं बन पाया मेडिकल में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने का जरिया
मेरठ। कोरोना के कारण एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 50 सीटें वापस पाकर अपनी साख बचाने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद थी कि न सिर्फ उनकी एमबीबीएस की पुरानी 50 सीटें वापस मिल सकती हैं बल्कि अतिरिक्त 50 सीटें भी मिल सकती हैं। इसके लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) में किया गया आवेदन अस्वीकार कर दिया गया।
साल 2019 में बेड के हिसाब से मरीजों की संख्या कम होने के कारण यहां की 50 एमबीबीएस की सीटें कम कर दी गईं थीं। चार साल पहले तक यहां एमबीबीएस की 150 सीटें थीं, जो अब 100 हैं। कोरोना की तीनों लहर के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अपनी गवाईं 50 सीटों को फिर से पाने की तैयारी की। साथ ही 50 और सीटें बढ़ाने की कोशिश है ताकि 200 एमबीबीएस की सीटें यहां हो जाएं। तर्क दिया गया कि मेडिकल कॉलेज कोविड के इलाज का मुख्य केंद्र रहा है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों का इलाज यहां किया गया। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी संचालित किया जा रहा है। यह तर्क बेड ऑक्योपेंसी और चिकित्सकों की कम संख्या के कारण नहीं चल सका और एक बार फिर मेडिकल प्रबंधन एमबीबीएस सीटें बढ़ाने को लिए हाथ मलता रह गया। मेडिकल में चिकित्सा शिक्षकों के 43 पद खाली चल रहे हैं।
000
2013 में हुई थीं 150 सीटें
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई (अब एनएमसी) की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही थीं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती थीं। लिहाजा साल 2019 में एमसीआई के मानकों पर खरा न उतरने के कारण मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों को कम कर दिया गया था।
विज्ञापन
000
एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश
मेडिकल प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि जब तक एमबीबीएस की सीटें वापस नहीं मिल जाती, तब तक एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी रहेगी। सीटें बढ़ाने के लिए फिर से आवेदन किया जाएगा। बेड ऑक्यूपेंसी पूरी की जाएगी और फैकल्टी की संख्या पूरी करने के लिए संविदा पर चिकित्सक रखे जा रहे हैं।
विज्ञापन
मेरठ। कोरोना के कारण एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 50 सीटें वापस पाकर अपनी साख बचाने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद थी कि न सिर्फ उनकी एमबीबीएस की पुरानी 50 सीटें वापस मिल सकती हैं बल्कि अतिरिक्त 50 सीटें भी मिल सकती हैं। इसके लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) में किया गया आवेदन अस्वीकार कर दिया गया।
साल 2019 में बेड के हिसाब से मरीजों की संख्या कम होने के कारण यहां की 50 एमबीबीएस की सीटें कम कर दी गईं थीं। चार साल पहले तक यहां एमबीबीएस की 150 सीटें थीं, जो अब 100 हैं। कोरोना की तीनों लहर के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अपनी गवाईं 50 सीटों को फिर से पाने की तैयारी की। साथ ही 50 और सीटें बढ़ाने की कोशिश है ताकि 200 एमबीबीएस की सीटें यहां हो जाएं। तर्क दिया गया कि मेडिकल कॉलेज कोविड के इलाज का मुख्य केंद्र रहा है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों का इलाज यहां किया गया। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी संचालित किया जा रहा है। यह तर्क बेड ऑक्योपेंसी और चिकित्सकों की कम संख्या के कारण नहीं चल सका और एक बार फिर मेडिकल प्रबंधन एमबीबीएस सीटें बढ़ाने को लिए हाथ मलता रह गया। मेडिकल में चिकित्सा शिक्षकों के 43 पद खाली चल रहे हैं।
विज्ञापन
000
2013 में हुई थीं 150 सीटें
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई (अब एनएमसी) की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही थीं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती थीं। लिहाजा साल 2019 में एमसीआई के मानकों पर खरा न उतरने के कारण मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों को कम कर दिया गया था।
विज्ञापन
000
एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश
मेडिकल प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि जब तक एमबीबीएस की सीटें वापस नहीं मिल जाती, तब तक एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी रहेगी। सीटें बढ़ाने के लिए फिर से आवेदन किया जाएगा। बेड ऑक्यूपेंसी पूरी की जाएगी और फैकल्टी की संख्या पूरी करने के लिए संविदा पर चिकित्सक रखे जा रहे हैं।