{"_id":"69a1c1c7afb066677402e0dc","slug":"control-over-thoughts-words-and-actions-is-the-best-means-of-life-vimarsh-sagar-meerut-news-c-228-1-mwn1001-104517-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"मन-वचन-कर्म पर नियंत्रण ही जीवन का श्रेष्ठ साधन : विमर्श सागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मन-वचन-कर्म पर नियंत्रण ही जीवन का श्रेष्ठ साधन : विमर्श सागर
विज्ञापन
कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 20वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक एवं शांति धारा संयम जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन तरुण जैन और सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। शुक्रवार को 93 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
आयार्च विमर्श सागर महाराज ने कहा कि स्वयं को तलाशने का नहीं बल्कि तराशने का प्रयास करो। क्योंकि जब एक पत्थर को तराशा जाता है तो वह भगवान बन जाता है। तप तभी फलदायी होगा जब तुम मन की इच्छाओं पर नियंत्रण रखोगे। आकांक्षाओं और विकल्पों को त्यागना ही तप है। तप करने के लिए उपवास करते हुए कषायों व पंचेंद्रियों को वश में करना होगा। उपवास न कर सको तो भूख से थोड़ा कम खाना, कभी-कभी रस का त्याग कर लेना।विधान का विसर्जन मनोज जैन ने किया। पंच परमेष्टि की आरती का दीप प्रज्ज्वलन संजय जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन सुधा जैन, आभा जैन, सोनिया, अवनि जैन और भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन गुरुकुल स्टाफ ने किया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, कुणाल जैन, वेदप्रकाश जैन, संजय जैन, विनय जैन, अनिल जैन दास का सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 20वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक एवं शांति धारा संयम जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन तरुण जैन और सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। शुक्रवार को 93 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
आयार्च विमर्श सागर महाराज ने कहा कि स्वयं को तलाशने का नहीं बल्कि तराशने का प्रयास करो। क्योंकि जब एक पत्थर को तराशा जाता है तो वह भगवान बन जाता है। तप तभी फलदायी होगा जब तुम मन की इच्छाओं पर नियंत्रण रखोगे। आकांक्षाओं और विकल्पों को त्यागना ही तप है। तप करने के लिए उपवास करते हुए कषायों व पंचेंद्रियों को वश में करना होगा। उपवास न कर सको तो भूख से थोड़ा कम खाना, कभी-कभी रस का त्याग कर लेना।विधान का विसर्जन मनोज जैन ने किया। पंच परमेष्टि की आरती का दीप प्रज्ज्वलन संजय जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन सुधा जैन, आभा जैन, सोनिया, अवनि जैन और भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन गुरुकुल स्टाफ ने किया।
विज्ञापन
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, कुणाल जैन, वेदप्रकाश जैन, संजय जैन, विनय जैन, अनिल जैन दास का सहयोग रहा।
विज्ञापन