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कृषि भूमि पर नहीं हो सकता निर्माण, फिर भी एक-दूसरे पर रहे टाल

Sat, 03 Oct 2020 01:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2020 01:33 AM IST
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Construction cannot be done on agricultural land, yet avoiding each other
कृषि भूमि पर नहीं हो सकता निर्माण, फिर भी एक-दूसरे पर रहे टाल
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मेरठ। कानून कहता है कि कृषि भूमि को सेक्शन 80 के तहत आबादी में दर्ज कराए बिना उस पर निर्माण नहीं किया जा सकता है। कोई आम आदमी इस कानून को जानकारी नहीं होने की बात कहकर तोड़े तो चल सकता है। लेकिन निलंबित थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने तो कानून की सारी जानकारी होते हुए भी इसकी धज्जियां उड़ा दी। तत्कालीन एसडीएम ने सेक्शन 80 का दावा खारिज कर दिया तो उसके बाद भी अवैध तरीके से निर्माण कर लिया।
निलंबित एसओ धर्मेंद्र सिंह का फार्म हाउस संक्रमणीय भूमि 1-क श्रेणी की भूमि पर बनाया गया है। राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिवक्ता बताते हैं कि ऐसी भूमि पर कोई भी निर्माण करने के लिए सेक्शन 80 के तहत पहले एसडीएम की अनुमति पर आबादी की भूमि घोषित कराना होता है। एसडीएम तहसीलदार से भूमि की जांच कराते हैं फिर अनमुति देते हैं। धर्मेंद्र सिंह के आवेदन को अगर एसडीएम ने निरस्त कर दिया तो वहां जो निर्माण हुआ है वह अवैध माना जाएगा। चाहे वह सेंक्चुरी इलाका हो या फिर सामान्य जंगल।
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शहर में नहीं आता तो देहात में जिला पंचायत की जिम्मेदारी
अगर ये भूमि हस्तिनापुर नगर पंचायत के अधीन आती है तो चूंकि अब एमडीए का क्षेत्र हस्तिनापुर तक हो चुका है, ऐसे में एमडीए इसे सील करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। प्रशासनिक अधिकारी इसे देहात की जमीन बता रहे हैं। इसके सामने की सड़क जिला पंचायत द्वारा बनाई गई है। ऐसे में रूरल डेवलेपमेंट एक्ट के तहत नियमानुसार जिला पंचायत से भी नक्शा पास कराना आवश्यक है। लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। इस भूमि के संबंध में जिला पंचायत के अधिकारियों का दावा है कि शनिवार तक साफ कर दिया जाएगा कि यह जमीन उनके अधिकार क्षेत्र में आती है या फिर हस्तिनापुर नगर पंचायत के क्षेत्र में आती है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वन विभाग को निर्माण नहीं बाकी तो सारे अधिकार
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह वन संरक्षित जमीन से करीब सवा किलोमीटर दूर की भूमि है। ऐसे में उसे निर्माण रोकने का अधिकार नहीं है। मान लिया कि उनको अधिकार नहीं है। लेकिन यहां पर जो मिट्टी लाकर भराव किया गया, वह सेंक्चुरी से तो नहीं लाया गया, इसको लेकर नोटिस निर्माण के समय ही दिया जाना चाहिए था। डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि कृषि भूमि पर निर्माण है, ऐसे में इसकी जांच राजस्व विभाग द्वारा ही होनी है। हम वन विभाग के नियमों की जांच कर रहे हैं। इसमें कोई गलती मिली तो कार्रवाई करेंगे। वहीं, जिला पंचायत के कार्यवाहक अपर मुख्य अधिकारी इंजीनियर सुनील गुप्ता का कहना है कि यह भूमि जिला पंचायत क्षेत्र में आती है या नहीं, इसके बारे में मुझे अभी जानकारी नहीं है। शनिवार को इसकी रिपोर्ट ले ली जाएगी। जंगल में कृषि भूमि पर इस तरह से निर्माण किए जाने के मामले में हर मंडल में अलग नियमावली होती है। मेरठ मंडल में क्या नियमावली लागू होती है, इसका अध्ययन करने पर ही कुछ बता पाऊंगा। शनिवार तक स्पष्ट हो जाएगा।
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