बसपा सांसद के दारुल उलूम में मंच साझा करने पर इमरान मसूद को ऐतराज, लगाया ये आरोप
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दारुल उलूम देवबंद में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान के शिरकत करने पर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो पार्टी तीन तलाक और अनुच्छेद 370 हटाने पर पर्दे के पीछे से भाजपा के साथ रही हो, उस पार्टी के सांसद को मंच पर बैठाने से पहले उलमा को भी इनसे सवाल पूछना चाहिए था कि इन दोनों मुद्दों पर बसपा सांसद का रुख क्या है।
शनिवार को कांग्रेस के कार्यकारी जिलाध्यक्ष जावेद साबरी के चकराता मार्ग स्थित निवास पर पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने दारुल उलूम के मंच को शील्ड के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उलमा हमारे अभिभावक और मार्गदर्शक हैं, मगर उन्हें हाजी फजलुर्रहमान को मंच पर बैठाने से पहले पूछना चाहिए था तीन तलाक और अनुच्छेद 370 पर इनका क्या रुख है और दोनों मुद्दों पर इनकी पार्टी क्यों चुप रही।
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इमरान ने कहा कि कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनवाने के लिए बसपा के विधायकों ने भाजपा को समर्थन किया। एक नेता द्वारा भाजपा सरकार के खिलाफ बोलने पर बहनजी ने उसे पार्टी से बाहर कर दिया। इमरान मसूद ने कहा कि जिन लोगों ने भाजपा को हराने के लिए चुनाव लड़ा, आज वह भाजपा के साथ खड़े हैं। उन्होंने बसपा को भाजपा की बी टीम बताया। अनुच्छेद 370 के मामले में उन्होंने कहा भाजपा सरकार को कश्मीर के लोगों को विश्वास में लेकर पहले विधानसभा का चुनाव कराना था और विधानसभा में इसे लाने के बाद संसद में लाना चाहिए था।
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इमरान मसूद ने कहा कि आज वह लोग राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट मांग रहे हैं, जिनका जंग-ए-आजादी में कोई योगदान नहीं रहा है, मगर हमें किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। 1947 में भारत को चुनकर और पाकिस्तान नहीं जाकर हमें साबित कर दिया था कि हिंदुस्तान ही हमारा मुल्क है। जरूरत पड़ने पर हिंदुस्तान के लिए सिर कलम कराने से भी पीछे नहीं हटेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि की हैसियत से सांसद को बुलाया, तो क्षेत्रीय विधायक को भी बुलाया जाता। इस दौरान विधायक नरेश सैनी, विधायक मसूद अख्तर और कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि वालिया आदि मौजूद रहे।
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