कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के ऐतिहासिक फैसले को देवबंदी उलमा ने बताया सियासी मुद्दा
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केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाने के ऐतिहासिक फैसले पर विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम समेत उलमा ने इसे राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। हालांकि जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि यह बहुत बड़ा फैसला है, इसके नतीजे मुल्क विशेषकर कश्मीर के लिए अच्छे साबित होने चाहिए। साथ ही इस बात का ख्याल रखा जाए कि कश्मीरी भी हमारे हैं।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद-370 के मिलने वाले स्पेशल स्टेटस को अब वापस ले लिया है जिसके बाद जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित राज्य बन गया है। सरकार के इस फैसले को लेकर जहां पूरे देश में जश्न का माहौल है।
वहीं, इस्लामी तालीम के सबसे बड़े केंद्र दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने साफ तौर पर कहा कि दारुल उलूम एक दीनी इदारा है और इसका सियासत से दूर-दूर तक का वास्ता नहीं है। यह खालिस सियासी मसला है। इसलिए सरकार के किसी भी राजनीतिक फैसले पर हम कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे।
इनके अलावा अन्य मदरसों के जिम्मेदारों और उलमा ने भी इस मुद्दे को सियासी मुद्दा करार दिया और कहा कि इस पर उलमा की राय कोई मायने नहीं रखती। यह काम सियासी लोगों का है।
उधर, जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि केंद्र सरकार को इतना बड़ा फैसला कश्मीरियों के मशविरे और उनको भरोसे में लेकर करना चाहिए था। दिलों पर राज कर फैसले लेना हमारे मुल्क की परंपरा रही है। इसकी सीमा का ख्याल रखा जाना चाहिए।
उनकी मांग है कि कश्मीरियों को किसी तरह की तकलीफ न पहुंचे सरकार को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि यह फैसला मुल्क के हित में बेहतर साबित हो।
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