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Meerut News: नहाय खाय के साथ छठ पूजा शुरू, कल होगा खरना
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- सूर्य उपासना के लिए घाट तैयार, गगोल तीर्थ पर होगा बड़ा आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ ही शुरू हो गया। शहर में विभिन्न स्थानों पर मेले की तैयारियां भी लगभग खत्म हो गई हैं। सिद्धपीठ गगोल तीर्थ के साथ गंगानगर, जेलचुंगी, मोदीपुरम सहित क्लोज डोर कॉलोनियों में जल कुंड बनाए गए हैं। गगोल तीर्थ पर सबसे बड़ा आयोजन होगा। यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
शहर में कल खरना के बाद सात नवंबर को गगोल तीर्थ पर मेला लगेगा। घाट पर अपना स्थान निश्चित करने के लिए मंगलवार सुबह से ही लोगों का पहुंचना आरंभ हो गया। घाट की सीढि़यों पर लोगों ने अपने नाम लिखकर पूजा का स्थान निश्चित किया। गगोल मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शिवदास महाराज ने बताया कि नगर निगम के द्वारा सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया गया है। कुंड का भी सफाई कार्य पूर्ण हो गया है। मेले के मद्देनजर झूले आदि लगने आरंभ हो गए हैं।
मुख्य पुजारी ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर से ही लोगों का घाट पर आना आरंभ हो जाएगा। सूर्य अस्त से पूर्व व्रती महिलाएं घुटनों तक जल में खड़ी होकर अर्घ्य देंगी। दूरदराज से आने वाले लोग रात्रि में मंदिर में ही विश्राम करेंगे। सुबह पुन: उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होगा। मंदिर में श्रद्धालुओं के रुकने के लिए भी विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के द्वारा व्यवस्थाएं की जाती हैं। उधर, जेलचुंगी पर भी मेले की तैयारी शुरू हो गई है। जीवन मुखिया ने बताया कि बुधवार को कृत्रिम कुंड और सजावट आदि कार्य किए जाएंगे। बृहस्पतिवार शाम को आयोजन होगा। विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी लक्ष्मण गोस्वामी, राजू गोस्वामी, गोपाल, श्याम, घनश्याम आदि रहेंगे।
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नहाय खाय से होती है पवित्रता की शुरूआत
छठ पर्व में नहाय-खाय छठ पूजा का पहला दिन होता है, जो शुद्धता, भक्ति, और आस्था का प्रतीक है। इस दिन व्रती (जो छठ व्रत कर रहे होते हैं) नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करके पवित्रता की शुरुआत करते हैं। इसके बाद वह सादा और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसे नहाय-खाय कहते हैं।-- ज्योति कार्तिकेय, निवासी पल्लवपुरम
नियमों के साथ व्रत करने का लेते हैं संकल्प
इस दिन व्रत करने वाले लोग कद्दू-भात (कद्दू और चने की दाल के साथ चावल) का भोजन करते हैं, जो शुद्ध और बिना लहसुन-प्याज का बना होता है। नहाय-खाय का उद्देश्य शरीर और मन को पवित्र करना होता है ताकि व्रती पूरे मनोयोग से पूजा कर सकें। व्रती संकल्प लेते हैं कि वह पूरी पवित्रता और नियमों के साथ व्रत करेंगे।-- आरती झा, निवासी पल्लवपुरम
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बीमार पति की कुशलता के लिए रखा था पहला व्रत : रंजना झा
रिठानी के घोपला रोड निवासी रंजना झा मूल रूप से बिहार के मधुबन जिले की रहने वाली हैं। वह दस वर्ष से छठ मैया का व्रत रखती आ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनसे पहले उनकी सास संध्या देवी उपवास रखती थीं। रंजना ने बताया कि कुछ साल पहले पति बीमार हो गए थे। काफी इलाज के बाद भी हालत में सुधार नही हुआ। तब उन्हें परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने छठ पूजा का व्रत रखने के लिए कहा। यह व्रत रखने के बाद पति ठीक हो गए। तब से वह लगातार यह व्रत रख रही हैं।
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हर साल रख रही व्रत : कल्पना देवी
मूलरूप से भागलपुर बिहार निवासी कल्पना देवी परतापुर के इटायरा रोड पर रहती हैं। उनके पति परतापुर की एक कंपनी में काम करते हैं। कल्पना ने बताया कि उनकी को पांच वर्ष हो जाने के बाद भी संतान नहीं हुई। बाद में उन्होंने छठ का व्रत रखा। छठ मैया की कृपा से अब उन्हें दो बेटे और एक बेटी है। बताया कि वे हर साल व्रत रखती है यह उनका 14वां व्रत है।
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गंगानगर में छठ पूजा के लिए साफ-सफाई और पुताई कराई
गंगानगर। छठ पूजा के लिए गंगानगर आई ब्लॉक पार्क में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पार्क की साफ-सफाई के बाद कुंड को रंगने का कार्य किया जा रहा है। वहीं मंगलवार को महिलाओं ने नहाय खाय में पूजा अर्चना की। कॉलोनी निवासी राहुल यादव ने बताया कि पिछले 18 साले से छठ पूजा का कार्यक्रम इस पार्क में किया जा रहा है। सभी लोग इसमें सहभागिता निभाते हैं। पूजा के बाद ठेकुआ का प्रसाद वितरित किया जाता है।
ये बोलीं व्रतीं महिलाएं...
- मेरी शादी आठ साल हो गए हैं। मैं पिछले पांच साल से बेटी आद्रिका और बेटे अथर्व की लंबी उम्र व स्वस्थ रहने की काम कर हर साल छह पूजा करती हूं।-- - ऋचा देवी
- परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में शांति के लिए मैं पूजा कर रही हूं। मुझे 30 साल से अधिक हो गए हैं। पूजा के लिए हम नए वस्त्र पहनते हैं और प्रसाद भी तैयार करते हैं।-- गीता देवी
- नहाय-खाय से छठ पर्व की शुरूआत हुई है। जिसमें हमने लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल का सेवन किया। उसके बाद शाम को पूजा की। अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए मैं यह पर्व मनाती हूं-- शांति देवी
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ ही शुरू हो गया। शहर में विभिन्न स्थानों पर मेले की तैयारियां भी लगभग खत्म हो गई हैं। सिद्धपीठ गगोल तीर्थ के साथ गंगानगर, जेलचुंगी, मोदीपुरम सहित क्लोज डोर कॉलोनियों में जल कुंड बनाए गए हैं। गगोल तीर्थ पर सबसे बड़ा आयोजन होगा। यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
शहर में कल खरना के बाद सात नवंबर को गगोल तीर्थ पर मेला लगेगा। घाट पर अपना स्थान निश्चित करने के लिए मंगलवार सुबह से ही लोगों का पहुंचना आरंभ हो गया। घाट की सीढि़यों पर लोगों ने अपने नाम लिखकर पूजा का स्थान निश्चित किया। गगोल मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शिवदास महाराज ने बताया कि नगर निगम के द्वारा सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया गया है। कुंड का भी सफाई कार्य पूर्ण हो गया है। मेले के मद्देनजर झूले आदि लगने आरंभ हो गए हैं।
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मुख्य पुजारी ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर से ही लोगों का घाट पर आना आरंभ हो जाएगा। सूर्य अस्त से पूर्व व्रती महिलाएं घुटनों तक जल में खड़ी होकर अर्घ्य देंगी। दूरदराज से आने वाले लोग रात्रि में मंदिर में ही विश्राम करेंगे। सुबह पुन: उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होगा। मंदिर में श्रद्धालुओं के रुकने के लिए भी विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के द्वारा व्यवस्थाएं की जाती हैं। उधर, जेलचुंगी पर भी मेले की तैयारी शुरू हो गई है। जीवन मुखिया ने बताया कि बुधवार को कृत्रिम कुंड और सजावट आदि कार्य किए जाएंगे। बृहस्पतिवार शाम को आयोजन होगा। विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी लक्ष्मण गोस्वामी, राजू गोस्वामी, गोपाल, श्याम, घनश्याम आदि रहेंगे।
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नहाय खाय से होती है पवित्रता की शुरूआत
छठ पर्व में नहाय-खाय छठ पूजा का पहला दिन होता है, जो शुद्धता, भक्ति, और आस्था का प्रतीक है। इस दिन व्रती (जो छठ व्रत कर रहे होते हैं) नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करके पवित्रता की शुरुआत करते हैं। इसके बाद वह सादा और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसे नहाय-खाय कहते हैं।
नियमों के साथ व्रत करने का लेते हैं संकल्प
इस दिन व्रत करने वाले लोग कद्दू-भात (कद्दू और चने की दाल के साथ चावल) का भोजन करते हैं, जो शुद्ध और बिना लहसुन-प्याज का बना होता है। नहाय-खाय का उद्देश्य शरीर और मन को पवित्र करना होता है ताकि व्रती पूरे मनोयोग से पूजा कर सकें। व्रती संकल्प लेते हैं कि वह पूरी पवित्रता और नियमों के साथ व्रत करेंगे।
बीमार पति की कुशलता के लिए रखा था पहला व्रत : रंजना झा
रिठानी के घोपला रोड निवासी रंजना झा मूल रूप से बिहार के मधुबन जिले की रहने वाली हैं। वह दस वर्ष से छठ मैया का व्रत रखती आ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनसे पहले उनकी सास संध्या देवी उपवास रखती थीं। रंजना ने बताया कि कुछ साल पहले पति बीमार हो गए थे। काफी इलाज के बाद भी हालत में सुधार नही हुआ। तब उन्हें परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने छठ पूजा का व्रत रखने के लिए कहा। यह व्रत रखने के बाद पति ठीक हो गए। तब से वह लगातार यह व्रत रख रही हैं।
हर साल रख रही व्रत : कल्पना देवी
मूलरूप से भागलपुर बिहार निवासी कल्पना देवी परतापुर के इटायरा रोड पर रहती हैं। उनके पति परतापुर की एक कंपनी में काम करते हैं। कल्पना ने बताया कि उनकी को पांच वर्ष हो जाने के बाद भी संतान नहीं हुई। बाद में उन्होंने छठ का व्रत रखा। छठ मैया की कृपा से अब उन्हें दो बेटे और एक बेटी है। बताया कि वे हर साल व्रत रखती है यह उनका 14वां व्रत है।
गंगानगर में छठ पूजा के लिए साफ-सफाई और पुताई कराई
गंगानगर। छठ पूजा के लिए गंगानगर आई ब्लॉक पार्क में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पार्क की साफ-सफाई के बाद कुंड को रंगने का कार्य किया जा रहा है। वहीं मंगलवार को महिलाओं ने नहाय खाय में पूजा अर्चना की। कॉलोनी निवासी राहुल यादव ने बताया कि पिछले 18 साले से छठ पूजा का कार्यक्रम इस पार्क में किया जा रहा है। सभी लोग इसमें सहभागिता निभाते हैं। पूजा के बाद ठेकुआ का प्रसाद वितरित किया जाता है।
ये बोलीं व्रतीं महिलाएं...
- मेरी शादी आठ साल हो गए हैं। मैं पिछले पांच साल से बेटी आद्रिका और बेटे अथर्व की लंबी उम्र व स्वस्थ रहने की काम कर हर साल छह पूजा करती हूं।
- परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में शांति के लिए मैं पूजा कर रही हूं। मुझे 30 साल से अधिक हो गए हैं। पूजा के लिए हम नए वस्त्र पहनते हैं और प्रसाद भी तैयार करते हैं।
- नहाय-खाय से छठ पर्व की शुरूआत हुई है। जिसमें हमने लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल का सेवन किया। उसके बाद शाम को पूजा की। अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए मैं यह पर्व मनाती हूं