{"_id":"6987ac38e14efce49908e68d","slug":"central-market-issue-shopkeepers-remove-unauthorised-construction-meerut-news-c-14-1-mrt1050-1101923-2026-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: सेंट्रल मार्केट में कई दुकानें हुईं खाली, ध्वस्तीकरण से व्यापारियों में बेचैनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: सेंट्रल मार्केट में कई दुकानें हुईं खाली, ध्वस्तीकरण से व्यापारियों में बेचैनी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है। 27 जनवरी को शीर्ष अदालत द्वारा छह सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश के बाद अब व्यापारी धीरे-धीरे दुकानें खाली करने लगे हैं। आदेश की समय-सीमा नजदीक आते ही बाजार में असमंजस का माहौल साफ नजर आ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा होने के कारण उन्हें समय नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधि भी इस संवेदनशील प्रकरण में खुलकर सामने आने से बचते दिख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को प्रस्तावित है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी केवल अतिक्रमण हटाने पर जोर दे रहे हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भवनों में बने कॉम्प्लेक्स और वहां संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर निर्माण ध्वस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
शनिवार को कई दुकानदारों ने संभावित कार्रवाई से पहले स्वयं ही दुकानों के बाहर किए गए अतिक्रमण हटाने शुरू कर दिए। इस दौरान टिन शेड, अस्थायी ढांचे और अन्य स्ट्रक्चर हटाए गए। इससे बाजार में गतिविधियां प्रभावित रहीं और ग्राहकों की आवाजाही भी कम रही। लोकेश खुराना ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर व्यापारियों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत भी ऐसे अवैध निर्माणों को कोई राहत नहीं दी जा सकती। इस संबंध में मुख्यमंत्री से आइजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल व्यापारी 13 मार्च की सुनवाई को निर्णायक मानते हुए आगे के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
व्यापारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा होने के कारण उन्हें समय नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधि भी इस संवेदनशील प्रकरण में खुलकर सामने आने से बचते दिख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को प्रस्तावित है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि ध्वस्तीकरण आदेश के बावजूद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी केवल अतिक्रमण हटाने पर जोर दे रहे हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भवनों में बने कॉम्प्लेक्स और वहां संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर निर्माण ध्वस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
शनिवार को कई दुकानदारों ने संभावित कार्रवाई से पहले स्वयं ही दुकानों के बाहर किए गए अतिक्रमण हटाने शुरू कर दिए। इस दौरान टिन शेड, अस्थायी ढांचे और अन्य स्ट्रक्चर हटाए गए। इससे बाजार में गतिविधियां प्रभावित रहीं और ग्राहकों की आवाजाही भी कम रही। लोकेश खुराना ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर व्यापारियों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत भी ऐसे अवैध निर्माणों को कोई राहत नहीं दी जा सकती। इस संबंध में मुख्यमंत्री से आइजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल व्यापारी 13 मार्च की सुनवाई को निर्णायक मानते हुए आगे के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन