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Meerut News: तीन दिवसीय आयुर्वेद पर्व शुरू, धन सिंह कोतवाल की प्रतिमा का अनावरण
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तीन दिवसीय आयुर्वेद पर्व शुरू, धन सिंह कोतवाल की प्रतिमा का अनावरण
उप राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षाग्रह में शनिवार से तीन दिवसीय आयुर्वेद पर्व (महासम्मेलन) शुरू हो गया। इसका इसका उद्घाटन उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। उन्होंने यहां लगी एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी का अवलोकन किया और धन सिंह कोतवाल पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में शहीद धन सिंह कोतवाल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान 1857 की क्रांति के शहीदों और क्रांतिकारियों को याद किया।
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि इस महा सम्मलेन के लिए क्रांति धरा को चुना गया है। आयुर्वेद ने कोरोना जैसी महामारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयुर्वेद हमारी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है।
राज्यपाल आनंदी बेन ने कहा कि आयुर्वेद महासम्मेलन पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है। आयुर्वेद सर्वे भवन्तु सुखिनः के दर्शन पर आधारित है। भारत आयुर्वेद का मूल स्थल है। योग को आज पूरा विश्व अपना रहा है। आयुष मंत्रालय और आयुष संबंधी योजनाओं की मदद से युवा आयुर्वेद क्षेत्र में स्टार्टअप के जरिए करियर बना रहे हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मानव चिकित्सा में आयुर्वेद का महत्व है। भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धति ने पिछले नौ वर्ष में विश्व में लंबी छलांग लगाई है।
उप राष्ट्रपति का पहली बार प्रदेश की धरती पर स्वागत है। मेरठ ऐतिहासिक धरती है। उत्तर प्रदेश में ही पहला आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। उत्तर प्रदेश आयुर्वेद की धरती है। भगवान धन्वंतरि की धरती है।
गंभीर बीमारियों का आयुर्वेद से बताया इलाज
पतंजलि के वैद्य बालकृष्ण, पद्मश्री बालेंदु प्रकाश और जालौर से आम वाले वैद्य श्रीराम शर्मा अग्निकर्म व क्षार कर्म से पेनक्रियाज, कैंसर, लिवर आदि से संबंधित बीमारियों का इलाज बताया और इन बीमारियों के बारे में जानकारी दी। महासम्मेलन में पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा रहे, जो आयुष मंत्रालय में सचिव हैं। वैद्य मनोज नेसरी रहे, जो आयुष मंत्रालय में सलाहकार हैं। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री राजवैद्य देवेंद्र त्रिगुणा रहे, जो पद्मश्री और पद्मभूषण हैं। राजस्थान की आयुर्वेद यूनिवर्सिटी जयपुर के वाइस चांसलर प्रो. प्रदीप प्रजापति आदि रहे। 1200 से अधिक यूजी पीजी के छात्र भी शामिल हुए। 50 से ज़्यादा आयुर्वेदिक कंपनियों के स्टॉल भी लगाए गए।
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उप राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षाग्रह में शनिवार से तीन दिवसीय आयुर्वेद पर्व (महासम्मेलन) शुरू हो गया। इसका इसका उद्घाटन उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। उन्होंने यहां लगी एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी का अवलोकन किया और धन सिंह कोतवाल पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में शहीद धन सिंह कोतवाल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान 1857 की क्रांति के शहीदों और क्रांतिकारियों को याद किया।
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि इस महा सम्मलेन के लिए क्रांति धरा को चुना गया है। आयुर्वेद ने कोरोना जैसी महामारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयुर्वेद हमारी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है।
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राज्यपाल आनंदी बेन ने कहा कि आयुर्वेद महासम्मेलन पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है। आयुर्वेद सर्वे भवन्तु सुखिनः के दर्शन पर आधारित है। भारत आयुर्वेद का मूल स्थल है। योग को आज पूरा विश्व अपना रहा है। आयुष मंत्रालय और आयुष संबंधी योजनाओं की मदद से युवा आयुर्वेद क्षेत्र में स्टार्टअप के जरिए करियर बना रहे हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मानव चिकित्सा में आयुर्वेद का महत्व है। भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धति ने पिछले नौ वर्ष में विश्व में लंबी छलांग लगाई है।
उप राष्ट्रपति का पहली बार प्रदेश की धरती पर स्वागत है। मेरठ ऐतिहासिक धरती है। उत्तर प्रदेश में ही पहला आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। उत्तर प्रदेश आयुर्वेद की धरती है। भगवान धन्वंतरि की धरती है।
गंभीर बीमारियों का आयुर्वेद से बताया इलाज
पतंजलि के वैद्य बालकृष्ण, पद्मश्री बालेंदु प्रकाश और जालौर से आम वाले वैद्य श्रीराम शर्मा अग्निकर्म व क्षार कर्म से पेनक्रियाज, कैंसर, लिवर आदि से संबंधित बीमारियों का इलाज बताया और इन बीमारियों के बारे में जानकारी दी। महासम्मेलन में पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा रहे, जो आयुष मंत्रालय में सचिव हैं। वैद्य मनोज नेसरी रहे, जो आयुष मंत्रालय में सलाहकार हैं। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री राजवैद्य देवेंद्र त्रिगुणा रहे, जो पद्मश्री और पद्मभूषण हैं। राजस्थान की आयुर्वेद यूनिवर्सिटी जयपुर के वाइस चांसलर प्रो. प्रदीप प्रजापति आदि रहे। 1200 से अधिक यूजी पीजी के छात्र भी शामिल हुए। 50 से ज़्यादा आयुर्वेदिक कंपनियों के स्टॉल भी लगाए गए।