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कुलपति ने रजिस्ट्रार, एफओ के वित्त अधिकार बढ़ाए
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 28 Aug 2015 12:16 AM IST
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सीसीएसयू के कुलपति ने रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी के सीज किए गए अधिकार वापस कर दिए हैं। अब दोनों अधिकारी 25 हजार रुपये तक का भुगतान कार्य अपने अधिकार से कर सकेंगे। पूर्व कुलपति ने दोनों अधिकारियों के अधिकार सीज कर प्रतिकुलपति प्रोफेसर एचएस सिंह को दे दिए थे।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा की ओर से इस बाबत आदेश जारी कर दिया गया है। चार जुलाई 2007 को कार्य परिषद में वित्तीय अधिकार तय किए गए थे। रजिस्ट्रार के साथ विवाद चलने के बाद पूर्व कुलपति विक्रम चंद्र गोयल ने रजिस्ट्रार और एफओ के वित्तीय अधिकार सीज कर 25 हजार रुपये तक का भुगतान करने का अधिकार प्रोवीसी को दिया था।
कुलपति प्रो. तनेजा ने आदेश जारी कर पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी है। शुरू में वित्त अधिकारी और रजिस्ट्रार के पास पांच-पांच हजार रुपये क ा भुगतान करने का अधिकार था। विभागाध्यक्षों के पास ढाई हजार रुपये का भुगतान करने का अधिकार था। कार्य परिषद ने एफओ और रजिस्ट्रार के अधिकार में वृद्धि करते हुए 25 हजार रुपये तक और विभागाध्यक्षों के लिए 10 हजार रुपये तक का भुगतान करने का अधिकार दिया था। इससे रोजमर्रा के कार्य के लिए कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारियों को सीधे कुलपति के पास नहीं आना पड़ेगा।
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कर्मचारियों का इंतजार
पूर्व कुलपति और रजिस्ट्रार के विवाद में करीब एक दर्जन दैनिक वेतन कर्मचारियों का नुकसान हुआ है। उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। ये वो कर्मचारी हैं जो पूर्व रजिस्ट्रार मनोज कुमार चौहान के साथ रहे। कर्मचारी यूनियन और अन्य लोग इनकी बहाली का प्रयास कर रहे हैं। कुछ के खिलाफ तत्कालीन रजिस्ट्रार ने एफआईआर भी दर्ज कराई है।
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कुलपति प्रो. एनके तनेजा की ओर से इस बाबत आदेश जारी कर दिया गया है। चार जुलाई 2007 को कार्य परिषद में वित्तीय अधिकार तय किए गए थे। रजिस्ट्रार के साथ विवाद चलने के बाद पूर्व कुलपति विक्रम चंद्र गोयल ने रजिस्ट्रार और एफओ के वित्तीय अधिकार सीज कर 25 हजार रुपये तक का भुगतान करने का अधिकार प्रोवीसी को दिया था।
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कुलपति प्रो. तनेजा ने आदेश जारी कर पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी है। शुरू में वित्त अधिकारी और रजिस्ट्रार के पास पांच-पांच हजार रुपये क ा भुगतान करने का अधिकार था। विभागाध्यक्षों के पास ढाई हजार रुपये का भुगतान करने का अधिकार था। कार्य परिषद ने एफओ और रजिस्ट्रार के अधिकार में वृद्धि करते हुए 25 हजार रुपये तक और विभागाध्यक्षों के लिए 10 हजार रुपये तक का भुगतान करने का अधिकार दिया था। इससे रोजमर्रा के कार्य के लिए कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारियों को सीधे कुलपति के पास नहीं आना पड़ेगा।
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कर्मचारियों का इंतजार
पूर्व कुलपति और रजिस्ट्रार के विवाद में करीब एक दर्जन दैनिक वेतन कर्मचारियों का नुकसान हुआ है। उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। ये वो कर्मचारी हैं जो पूर्व रजिस्ट्रार मनोज कुमार चौहान के साथ रहे। कर्मचारी यूनियन और अन्य लोग इनकी बहाली का प्रयास कर रहे हैं। कुछ के खिलाफ तत्कालीन रजिस्ट्रार ने एफआईआर भी दर्ज कराई है।