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सीसीएसयू:आर्ट ऑफ पेरेंटिंग कोर्स शुरू करने वाला उत्तर भारत का पहले विवि बना, अशिक्षित माता-पिता के लिए लाभकारी

Mon, 25 Sep 2023 11:58 AM IST
Dimple Sirohi नीरज वर्मा, अमर उजाला, मेरठ
नीरज वर्मा, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 25 Sep 2023 11:58 AM IST
सार

माता-पिता को अपने बच्चों की परवरिश कैसे करें, इसके लिए अब चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में कोर्स शुरू होने जा रहा है। वहीं इस कोर्स को शुरू करने वाला सीसीएसय उत्तर भारत का पहला विवि बनने जा रहा है।

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CCSU: Becomes the first university in North India to start Art of Parenting course, beneficial for uneducated
CCSU Meeting - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) उत्तर भारत का पहला विवि बन गया है, जहां अशिक्षित माता-पिता को भी मनोवैज्ञानिक तरीके से बच्चों की परवरिश करना सिखाया जाएगा। बच्चों को पबजी जैसे इंटरनेट गेम्स, मोबाइल व नशे की लत अथवा गलत संगत से बचाने के लिए सीसीएसयू अभिभावकों को ‘आर्ट ऑफ पेरेंटिंग’ कोर्स कराएगा, जबकि दफ्तरों के तनाव से बचने के लिए ‘इनकल्केटिंग हैप्पीनेस एंड वेल बीइंग’ कोर्स शुरू होगा। 

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सीसीएसयू में मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने बताया कि माता-पिता के लाड़-प्यार या फिर उनकी व्यस्तता की वजह से अक्सर बच्चे गलत रास्ते पर चले जाते हैं। शुरूआत में बच्चे झूठ बोल गुमराह करते हैं।
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माता-पिता को तब हकीकत पता चलती है तब तक बहुत देर हो जाती है। माता-पिता सख्ती करते हैं तो बच्चे अभद्रता पर उतर आते हैं। इतना ही नहीं कई बार आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। कई मामलों में बच्चे घर छोड़कर भी चले जाते हैं। 

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ऐसे हालत में खास तरीके से परवरिश की आवश्यकता होती है। शिक्षक का भी बच्चों के जीवन में अहम रोल होता है। इसलिए शिक्षकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर सतत नजर रखनी चाहिए। इस तरह के मामलों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए विभाग ने ओपन टू ऑल (सभी के लिए) आर्ट ऑफ पेरेंटिंग (लालन-पालन या परवरिश कला) का तीन सप्ताह का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है।

यह कोर्स कोई भी छात्र-छात्रा, शिक्षक, कर्मचारी अथवा माता-पिता कर सकते हैं। खास बात यह है कि अगर कोई अशिक्षित भी हो तो वह भी यह कोर्स कर सकता है। प्रो. संजय कुमार ने कहा कि दफ्तरों में अधिकारी काम के बोझ और कर्मचारी अफसरों की सख्ती से तनाव में रहते हैं। इसका असर परिवार पर भी पड़ता है। घरों में तनाव और विवाद होता है।  

ऑफिस में कैसे खुशनुमा माहौल रहे और कर्मचारी उत्साह से काम करें अथवा ऑफिस के तनाव का असर घर पर नहीं पड़े, इसके लिए ‘इनकल्केटिंग हैप्पीनेस एंड वेल बीइंग’ (खुशी, मानसिक स्वास्थ्य कैसे बढ़ाएं या पैदा करें) तीन सप्ताह का कोर्स शुरू किया है। यह कोर्स व्यवसायियों, मैनेजरों और ऑफिस कर्मियों के लिए होगा।

ऐसे करें आवेदन
‘आर्ट आफ पेरेंटिंग’ या ‘इनकल्केटिंग हैप्पीनेस एंड वेल बीइंग’ कोर्स करने के लिए इच्छुक वेबसाइट पर https://forms.ccsuresults.com/exams/CertificateCourse_Reg/  पर क्लिक करें। इसमें न सिर्फ कोर्स की जानकारी मिलेगी, बल्कि आवेदन की भी प्रक्रिया भी होगी। यहां नया कोर्स शुरू होने की तारीख भी पता चलेगी, क्योंकि चालू बैच खत्म होने के बाद ही नया बैच शुरू होगा। पहला बैच 14 अक्तूबर से शुरू होगा।

कोर्सों की ये होगी फीस 
यह कोर्स सीधे जनता से जुड़ा हुआ है और कोई भी कर सकता है, इसलिए फीस काफी कम रखी है। इसके लिए विवि तीन हजार रुपये फीस लेगा। क्लास मनोविज्ञान विभाग में दोपहर दो से शाम चार बजे तक चलेगी। 

उत्तर भारत के विख्यात प्रोफेसर पढ़ाएंगे
दोनों ही कोर्स में मनोविज्ञान के विख्यात प्रोफेसर प्रो. संजय कुमार, डॉ. सीमा शर्मा, मेरठ कॉलेज की डॉ. मृदुला शर्मा, सुभारती विवि की डीन डाॅ. पूनम देव दत्त, मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया स्वाति यादव, अल्पना अग्रवाल, डॉ. अनिता मोरल और दिल्ली विवि के शिक्षक पढ़ाएंगे।

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