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Meerut News: साइड स्टोरी... सीबीआई ने 19 घंटे कुरेदीं भ्रष्टाचार की जड़ें, कई अफसर-कर्मचारी रडार पर

Fri, 01 May 2026 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 11:42 PM IST
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CBI probes corruption for 19 hours, several officers and employees under radar
सीजीएचएस की अतिरिक्त निदेशक और निजी सहायक की गिरफ्तारी का मामला
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स्थानांतरण संबंधी कागजात, फाइलें व मोबाइल कब्जे में लेकर की गहन पड़ताल
माई सिटी रिपोर्टर

मेरठ। केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के सूरजकुंड स्थित कार्यालय पर स्थानांतरण के लिए एक कर्मचारी से 50 हजार रुपये रिश्वत वसूलने के मामले ने यहां जमी भ्रष्टाचार की जड़ों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) की टीम ने 19 घंटे पड़ताल कर स्थानांतरण आदि के कागजात व फाइल कब्जे में लेकर जांच की है। इसमें कई अफसर व कर्मचारी के नाम मिले हैं। ये सब अब सीबीआई के रडार पर हैं। इनसे कभी भी पूछताछ की जा सकती है।
केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को किफायती और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं वैलनेस सेंटरों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के माध्यम से ओपीडी परामर्श, दवाओं, परीक्षण और इनडोर उपचार की सुविधा देता है। इसमें एलोपैथी, आयुष-आयुर्वेद, होम्योपैथी से उपचार की सुविधा मिलती है। सूरजकुंड पर भी सीजीएचएस अस्पताल है। इसी परिसर में सीजीएचएस की अपर निदेशक स्वास्थ्य का कार्यालय है और डॉ. नताशा वर्मा यहां तैनात हैं। बृहस्पतिवार शाम लगभग पांच बजे एक निजी टैक्सी में सीबीआई की टीम पहले कार्यालय पहुंची और जांच पड़ताल की।
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जांच के बाद डॉक्टर नताशा वर्मा और उनके निजी सहायक सनी को लेकर रात करीब 8 बजे गंगानगर में सीएनजी पंप के पास स्थित डॉ. नताशा के आवास पर पहुंची। यह मकान किसी पुलिसकर्मी का है। डॉक्टर यहां किराए पर रहती हैं। टीम ने यहां भी गहनता से जांच-पड़ताल की और देर रात तक दस्तावेज खंगाले। इस दौरान सीबीआई की छापे की जानकारी डॉक्टर के पड़ोसियों तक को नहीं हुई। देर रात दो बजे के बाद सीबीआई टीम कुछ दस्तावेजों के साथ डॉक्टर नताशा वर्मा और उनके निजी सहायक सनी को हिरासत में लेकर गाजियाबाद रवाना हो गई। सीबीआई की छापेमारी के दौरान सूरजकुंड स्थित सीजीएचएस दफ्तर में बृहस्पतिवार को देर शाम तीन वाहन पहुंचे थे। इनमें एक वाहन में स्टाफ देर रात तक यहीं रहा। निजी सहायक सनी का घर पहुंचकर भी जांच पड़ताल की गई। कई घंटे तक सूरजकुंड कार्यालय पर आवाजाही बंद कर दी गई। स्टाफ के फोन भी कब्जे में ले लिए गए। ऐसे में कुछ कर्मचारियों के परिजन उन्हें तलाशते हुए डिस्पेंसरी तक पहुंचे।
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जानबूझकर चलता है स्थानांतरण का खेल या मामला कुछ और

इस कार्रवाई के बाद यह बड़ा सवाल है कि यहां से कर्मचारियों का जानबूझकर स्थानांतरण किया जाता है और फिर उनसे वापसी के नाम पर रुपये वसूले जाते हैं या फिर इससे भी बड़ा मामला है। इस आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि इस तरह के कुछ और मामले हों लेकिन केवल एक ही मामले की शिकायत पीड़ित ने सीबीआई से की हो। इसके चलते सीबीआई ने पिछले कुछ वर्षों में किए गए स्थानांतरणों की भी जांच कर रही है।


पिछले साल भी सीबीआई ने की थी कार्रवाई

सीबीआई ने 12 अगस्त 2025 की रात को भी इसी तरह की कार्रवाई की थी। नौ महीने के अंदर सीजीएचएस की डिस्पेंसरी में सीबीआई की यह दूसरी कार्रवाई है। उस समय तत्कालीन अपर निदेशक अजय कुमार व कार्यालय अधीक्षक लवेश सोलंकी को हिरासत में ले लिया गया था। उन पर पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। तब भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।
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