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सीबीआई जांच हुई तो खुलेगा सौ करोड़ की जमीन का राज, पूरा फर्जी खेल

Sat, 17 Jun 2017 01:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 17 Jun 2017 01:51 PM IST
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CBI probe will open, secrecy of 100 crore land will be opened, full fake game
सीबीआई

यदि वक्फ बोर्डों की सीबीआई जांच हुई तो मेरठ में कई सौ करोड़ की जमीन की खरीद फरोख्त के राज उजागर होंगे। यहां वक्फ संपत्तियों को धुआंधार तरीके से बेचा गया और सभी में वक्फ बोर्डों की भूमिका संदिग्ध रही। यहां तक कि मेरठ में तो शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया।

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केस 1 : पूरा फर्जी खेल
कोतवाली क्षेत्र के इमामबाड़ा निवासी शहजाद अब्बास नकवी का दावा है सन 1939 में उसके दादा मरहूम सैय्यद असगर हुसैन ने नंगलाताशी में करीब 42 बीघा जमीन अपने बेटे करबलाई अब्बास नकवी के नाम से वक्फ की थी। आरोप है कि वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी ने कागजातों में हेराफेरी कर 15 अप्रैल 2016 को 50 करोड़ की जमीन मात्र 15 करोड़ में बेच दिया। बैनामे के दौरान मात्र 50 लाख रुपए की कीमत दर्शायी गई।
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जांच में खुल गया सारा खेल
सीएम के आदेश पर जांच में सामने आ गया कि मुत्तवली जिया अब्बास ने अपने ससुर दानिश अब्बास के साथ मिलकर बेच डाला। कंकरखेड़ा थाने में वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी, इंस्पेक्टर मुंतजिर, जिया अब्बास, अख्तर अब्बास, दानिश अब्बास, अमर इंटरप्राइजेज, अब्दुल वाहिद, मोबीन कुरैशी, गुलाम सैयदेन रिजवी कथित प्रशासनिक अधिकारी वक्फ बोर्ड, उत्सव, राहुल, दस्तावेज लेखक मूलचंद मित्तल तथा सब रजिस्ट्रार चतुर्थ विकास शर्मा के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 में मुकदमा दर्ज किया है।

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केस 2 : तहसील कर्मियों की मिलीभगत

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सौ करोड़ का फर्जीवाड़ा

यहां के अब्दुल्लापुर में एक और बड़ा खेल सामने आया था। सैयद मोहम्मद वक्फ की सपंत्ति है। सन 1967 में लगभग सौ बीघा इस जमीन को दो अलग अलग हिस्से में बेच दिया गया। बाद में इसी सपंत्ति को लेकर सैयद मोहम्मद के ही परिवार के लोगों ने वक्फ बोर्ड और हाईकोर्ट में वाद दायर किया। हाईकोर्ट से कहा गया है कि वक्फ बोर्ड तय करे कि यह जमीन वक्फ है या नहीं। इस बाबत तहसील से रिपोर्ट मांगी गई। तहसील की रिपोर्ट में ही पूरा खेल कर दिया गया। अब्दुल्लापुर मेरठ तहसील क्षेत्र के लेखपाल गुरु मेहर सिंह ने उन खसरा नंबरों को वक्फ से बाहर बता दिया।

जांच में हो गया दूध का दूध पानी का पानी
फिर जांच हुई तो आठ फरवरी 2016 को खुद लेखपाल गुरु मेहर सिंह की स्वीकारोक्ति पर एसडीएम मेरठ को अपनी रिपोर्ट भेजी कि उसने त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रेषित की थी। एसडीएम ने जांच के बाद 16 फरवरी को डीएम को अपनी रिपोर्ट भेजी है जिसमें तीन मुख्य बिंदु पाए गए। बावजूद इसके बोर्ड की मिलीभगत से यह संपत्ति बेची जाती रही। इसके अलावा अन्य कई मामले हैं जिनमें मेरठ में धुआंधार ढंग से संपत्ति बेची गई।

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