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Meerut News: मेडिकल कॉलेज में एडवांस फेको मशीन से होगा मोतियाबिंद का ऑपरेशन
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में अब मोतियाबिंद की सर्जरी आधुनिक तकनीक से की जा सकेगी। इसके लिए के उच्चीकृत नेत्र रोग विभाग में एडवांस फेको मशीन लगा दी गई है। इस नई मशीन से नेत्र रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
फेको विधि से सर्जरी केवल 10-15 मिनट में पूरी हो जाती है। रोगी उसी दिन घर जा सकता है और उसकी रिकवरी बहुत तेज होती है। प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता बताते हैं कि फेको मोतियाबिंद की एक आधुनिक, दर्द रहित और टांका रहित सर्जरी है। इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों से धुंधले लेंस को तोड़कर निकाला जाता है और फोल्डेबल लेंस लगाया जाता है। उन्होंने ऑपरेशन के बाद मरीजों को डॉक्टर की ओर से दी गई आई ड्रॉप्स का समय पर उपयोग करने की सलाह दी।
मरीजों को आंख को मलने या दबाने से बचना चाहिए और धूल-मिट्टी व पानी से अपनी आंख को बचाना चाहिए। नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक फेको आई सर्जरी को फेको इमल्सीफिकेशन भी कहते हैं। मोतियाबिंद के इलाज की एक आधुनिक तकनीक है। मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंखों का रेटिना धुंधला हो जाता है।
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फेको सर्जरी की आधुनिक तकनीक
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि फेकोइमल्सीफिकेशन मोतियाबिंद के उपचार की एक उन्नत विधि है। यह प्रक्रिया धुंधले प्राकृतिक लेंस को हटाकर फोल्डेबल लेंस लगाने में मदद करती है। फेको सर्जरी के बाद रोगी उसी दिन घर जा सकता है। इस प्रक्रिया से स्वस्थ होने में बहुत कम समय लगता है।
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फेको विधि से सर्जरी केवल 10-15 मिनट में पूरी हो जाती है। रोगी उसी दिन घर जा सकता है और उसकी रिकवरी बहुत तेज होती है। प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता बताते हैं कि फेको मोतियाबिंद की एक आधुनिक, दर्द रहित और टांका रहित सर्जरी है। इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों से धुंधले लेंस को तोड़कर निकाला जाता है और फोल्डेबल लेंस लगाया जाता है। उन्होंने ऑपरेशन के बाद मरीजों को डॉक्टर की ओर से दी गई आई ड्रॉप्स का समय पर उपयोग करने की सलाह दी।
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मरीजों को आंख को मलने या दबाने से बचना चाहिए और धूल-मिट्टी व पानी से अपनी आंख को बचाना चाहिए। नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक फेको आई सर्जरी को फेको इमल्सीफिकेशन भी कहते हैं। मोतियाबिंद के इलाज की एक आधुनिक तकनीक है। मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंखों का रेटिना धुंधला हो जाता है।
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फेको सर्जरी की आधुनिक तकनीक
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि फेकोइमल्सीफिकेशन मोतियाबिंद के उपचार की एक उन्नत विधि है। यह प्रक्रिया धुंधले प्राकृतिक लेंस को हटाकर फोल्डेबल लेंस लगाने में मदद करती है। फेको सर्जरी के बाद रोगी उसी दिन घर जा सकता है। इस प्रक्रिया से स्वस्थ होने में बहुत कम समय लगता है।