बंगला नंबर 210बी की 32 दुकानों पर चला बुलडोजर, विरोध हुआ बेअसर
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मेरठ में कैंट बोर्ड अफसरों के लिए लंबे समय से सिरदर्द बनीं बंगला नंबर 210बी आरआर मॉल की दुकानों को सोमवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। दिन निकलते ही पुलिस-प्रशासन और कैंट बोर्ड की टीमें दल बल के साथ पहुंच गई थीं। कार्रवाई का विरोध करने वाले व्यापारियों और उनके परिवार की महिलाओं को हिरासत में ले लिया गया। करीब साढ़े तीन घंटे में 32 दुकानों को जमींदोज कर दिया गया।
छह बजे से ऑपरेशन शुरू
रविवार देर रात व्यापारी विरोध स्वरूप दुकानों के बाहर धरने पर बैठ गए थे। सोमवार तड़के चार बजे पुलिस ने यहां पर नोटिस चस्पा कर व्यापारियों को स्पष्ट कर दिया कि अगर किसी ने कार्रवाई का विरोध किया तो उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। सुबह 5:30 बजे से यहां पर आरएएफ और पीएसी पहुंचनी शुरू हो गई। सुबह छह बजे एसपी सिटी मान सिंह चौहान, एएसपी कैंट सतपाल सिंह, एडीएम सिटी मुकेश चंद, सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह, आठ सीओ, 12 थानाध्यक्ष भारी फोर्स के साथ पहुंच गए।
विरोध हुआ बेअसर
कैंट बोर्ड के सीईओ आलोक गुप्ता और सीईई अनुज सिंह के अतिक्रमण हटाओ दस्ते और जेसीबी के साथ पहुंचते ही पुलिस ने हनुमान चौक, शिव चौक, दिल्ली छोले भटूरे वाली दुकान और कैसल व्यू के पास बंगला नंबर 210 बी (शिव चौक सदर) की तरफ जाने वाले रास्तों को रस्सा लगाकर बंद कर दिया। दुकानों के बाहर धरने पर बैठे व्यापारियों और उनके परिवार के लोगों को अफसरों ने हटने के लिए कहा तो वे वहीं बैठे रहने की जिद करने लगे। अफसरों ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए माइक पर घोषणा की तो व्यापारी खुद खड़े हो गए। फोर्स को देखकर कोई विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। व्यापारियों के हटते ही कैंट बोर्ड के कर्मचारियों ने गैस कटर लगाकर दुकानों के शटर काट दिए। हथौड़ा गैंग ने दुकानों की छत को ड्रिल मशीन और हथौड़ों से वार करके ध्वस्त कर दिया। कैंट बोर्ड सीईओ ने अब बंगला नंबर 210बी को भी ध्वस्त करने की बात कही है।
ये है मामला
कैंट बोर्ड ने कोर्ट के आदेश पर 9 जुलाई 2016 को बंगला नंबर 210 बी के आरआर मॉल के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। मलबे में दबकर चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके चलते अभियान पूरा नहीं चल पाया था। ग्राउंड फ्लोर की सारी दुकानें रह गईं थीं। जनवरी माह में व्यापारियों ने दुकानों में सामान रख लिया था। कैंट बोर्ड अफसरों ने व्यापारियों के खिलाफ सदर बाजार थाने में मुकदमे दर्ज कराए थे। इसको लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने के बाद कोर्ट ने मुख्य सचिव समेत डीएम-एसएसपी को तलब कर लिया था। इसके बाद कैंट बोर्ड ने पुलिस-प्रशासन के साथ इन दुकानों को ध्वस्त करने की कोशिश की थी। लेकिन व्यापारियों के विरोध के चलते पीछे हटना पड़ा था।
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