अपनों से किनारा गैरों का सहारा: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर प्रत्याशी को लेकर असमंजस में बसपा
लोकसभा चुनाव का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है। पश्चिमी यूपी में सियासी हलचल तेज होती जा रही है। वहीं मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर प्रत्याशी की घोषणा को लेकर सियासी दल असमंजस में हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बसपा हाईकमान मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी को लेकर असमंजस के दौर से गुजर रही है। बताया जा रहा है कि बसपा अपने पुराने कार्यकर्ताओं पर दांव लगाने के मूड में नहीं है, जबकि बसपा में कई ऐसे पुराने नेता हैं जो गैरबसपाई प्रत्याशियों से अधिक मजबूत बताए जाते हैं।
पिछले सप्ताह तक गैरबसपाई बदर अली का टिकट फाइनल बताया गया था। वह विवादों में आए तो टिकट पर ब्रेक लग गया। इसके बाद बसपा नेताओं ने नए प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी। बसपाई अब शास्त्रीनगर निवासी एक त्यागी को प्रत्याशी बनाने की जद्दोजहद में लगे हैं। बताया जा रहा है कि त्यागी का भी बसपा से कोई नाता नहीं रहा है।
यह भी पढ़ें: BKU का दिल्ली कूच: वेस्ट यूपी से निजी वाहनों व ट्रेनों से कार्यकर्ता रवाना, हाईवे पर हंगामा, टोल फ्री कराया
नई सोशल इंजीनियरिंग से जीत का दावा ठोक रही बसपा
पूर्व में बसपा दलित-मुस्लिम समीकरण के साथ चुनाव में अच्छे परिणाम लाती रही है। मेरठ लोकसभा सीट पर मुस्लिम-दलित मतदाताओं की संख्या लगभग साढ़े आठ लाख है। त्यागी समाज के मतदाताओं की संख्या भी ठीक-ठाक है।
इस बार नई सोशल इंजीनियरिंग के साथ बसपा चुनाव मैदान में जीत का दावा ठोक रही है। मेरठ में शास्त्रीनगर निवासी एक त्यागी को मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी बनाने की तैयारी में जुटी है। बुधवार को बसपाई दिन भर त्यागी के संस्थान पर डेरा डाले रहे। हालांकि देर रात्रि तक प्रत्याशी का चयन नहीं हो पाया।
दलित-मुस्लिम समीकरण का मिलता रहा है लाभ
बता दें कि पिछले 2019 के चुनाव में दलित-मुस्लिम समीकरण का जादू चला था। बसपा से प्रत्याशी रहे हाजी याकूब कुरैशी को 581455 लाख वोट मिले थे। मतगणना के दौरान अंत में जाकर सांसद राजेन्द्र अग्रवाल से मात्र 4709 मतों से हारे थे।
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग साढ़े आठ लाख बतायी जा रही है। बसपा का कोर वोटर दलित भी मुस्लिमों के साथ खड़ा हो जाता है। इस समीकरण से बसपा पूर्व में लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि विधानसभा चुनावों में भी परचम लहराती रही है।
मुस्लिम-दलित, ओबीसी समीकरण ने बसपा को अयूब अंसारी, शाहिद अखलाक, सुनीता वर्मा महापौर दिए। खरखौदा, हस्तिनापुर, सरधना, सिवालखास विधानसभा सीटों से विधायक बने। बसपा के पास पहले शाहिद अखलाक परिवार और हाजी याकूब परिवार जैसे दिग्गज मुसलमान नेता होते थे।
अब बसपा से इन नेताओं ने पूरी तरह दूरी बना ली है। याकूब कुरैशी ने तो भविष्य में चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया है। मुस्लिमों में कुरैशी के बाद सैफी, अंसारी मतदाता बड़ी संख्या में आते हैं। बसपा के पास अभी भी सैफी और अंसारी समाज से पुराने नेता एवं कार्यकर्ता हैं। बसपा के पास गुर्जर नेता भी हैं।
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के नाम को लेकर जब जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह पाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि त्यागी को प्रत्याशी बनाए जाने की तैयारी है। जो भी प्रत्याशी होगा उसके नाम की घोषणा 17 मार्च तक हो जाएगी।