Meerut: आध्यात्म के जरिए खुद की आत्मा को पहचानें, जीवन में प्रसन्नता लाता है ध्यान: बीके सुशांत
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मीडिया कॉर्डिनेटर बीके सुशांत ने आध्यात्म पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि लोग आध्यात्मिकता को धार्मिक संगठन से जोड़ते हैं, जबकि आध्यात्मिकता जीवन से जुड़ी भावनाओं को दर्शाता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मकता जरूरी है।
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ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मीडिया कॉर्डिनेटर बीके सुशांत और ब्रह्मकुमारी सोनम ने कहा कि विश्व कल्याण और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए मनुष्य को अपनी आत्मा को पहचानने की आवश्यकता है। बीके सुशांत और ब्रह्मकुमारी सोनम सोमवार को मेरठ में अमर उजाला कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने आध्यात्म पर जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि कैसे ध्यान और चिंतन के जरिए मनुष्य अपने जीवन के आधार और उद्देश्यों को समझ सकता है और पृथ्वी पर आने के अपने मकसद को पहचान सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि इसी साल अगस्त से ब्रह्मकुमारी संस्था राजस्थान के माउंट आबू में मीडिया सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। जिसमें मीडिया जगत के दिग्गज हिस्सा लेंगे।
जीवन का आधार बहुत ही सरल है, जरूरत है आपको इसके मकसद के बारे में जानने की। मनुष्य का जन्म अनेक प्रकार की भूमिका निभाने के लिए होता है। यह बातें ब्रह्मकुमार सुशांत द्वारा अमर उजाला कार्यालय में पत्रकारों से संवाद करते हुए बताई गईं। साथ ही उन्होंने जानकारी दी की उनकी संस्था विश्व स्तरीय मीडिया सम्मेलन आयोजित करने जा रही है।
इस सम्मेलन में मीडिया जगत के दिग्गज भी हिस्सा लेंगे। राजस्थान के माउंट आबू में यह कार्यक्रम 29 अगस्त से शुरू होकर 2 सितम्बर तक चलेगा। इस दौरान देश भर की ब्रह्मकुमारी लोगों को जीवन से जुड़ी आध्यात्मिकता से जोड़ेंगी।
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उन्होंने कहा कि लोग आध्यात्मिकता को धार्मिक संगठन से जोड़ते हैं जबकि आध्यात्मिकता जीवन से जुड़ी भावनाओं को दर्शाता है। सकारात्मक ऊर्जा के बिना हम जीवन में किसी भी कार्य को नहीं कर सकते। इसका धार्मिक गतिविधियों से लेना-देना नहीं है। यह केवल एक सूत्र है, जिससे हम परमात्मा के भाव को समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्न मनुष्य को प्रसन्नचित होने से दूर करते हैं, और निश्चय निश्चिंतता की ओर ले जाता है।
चित्त की शांति के लिए ध्यान जरूरी
ओम शांति के उच्चारण से मन को शांति मिलती है। रोजाना खुद के लिए आधा घंटा निकालकर ध्यान जरूर करें। इससे मन के भीतर की नकारात्मकता दूर होती है और नया कार्य करने के लिए सकारात्मकता उतपन्न होती है।
इस दौरान ब्रहमकुमारी सोनम ने सभी को 2 मिनट को मौन कराया। उन्होंने बताया कि सिर्फ इन चंद मिनटों में हम पूरे दिन की नकारात्मकता को दूर कर सकते हैं। ओम शांति....ओम शांति से इस मौन को आरंभ करें। इसके बाद मस्तिष्क के दूसरे विचारों को त्याग कर अपनी भीतर झांके और सभी त्रुटियों को निकाल दें।