रेमडेसिविर की कालाबाजारी : मेरठ से आठ गिरफ्तार, एक इंजेक्शन और 25 हजार की नकदी भी बरामद
- सुभारती मेडिकल कॉलेज का मामला: एक इंजेक्शन और 25 हजार की नकदी भी बरामद
- जानी थाने में महामारी अधिनियम और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज
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एसएसपी अजय साहनी के मुताबिक कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि जनपद के कई मेडिकल कॉलेज और निजी चिकित्सालय के कर्मचारी रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। सूचना पर सर्विलांस सेल की टीम एवं थाना देहली गेट व थाना जानी पर टीम बनाकर पुलिस अधीक्षक देहात के निर्देशन में इनके विरुद्ध अभियान चलाया गया।
इसी क्रम में पिछले सात दिन से सुभारती मेडिकल कॉलेज से इंजेक्शन खरीदने के लिए पुलिस एवं अस्पताल कर्मचारियों के बीच बातचीत चल रही थी। पुलिस और आबिद खान नाम के व्यक्ति से इसके लिए 32 हजार से सौदेबाजी शुरू हुई, जो बाद में 25 हजार रुपये में तय हो गई।
पुलिस ने उनको वहां से पकड़ लिया गया। इस पर कॉलेज के गार्ड व बाउंसरों द्वारा पुलिस को घेरने की कोशिश की और गेट बंद कर दिया गया किंतु थाना देहली गेट, जानी व सर्विलांस सेल की टीम ने सरकारी कार्य में बाधा डालने पर मौके से छह बांउसर/गार्ड को भी गिरफ्तार कर लिया गया। सभी आरोपियों के खिलाफ जानी थाने में महामारी अधिनियम, दवाइयों की कालाबाजारी, धोखाधड़ी और पुलिस से अभद्रता की धाराओं में अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गाजियाबाद के शोभित को लगना था इंजेक्शन
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि यह इंजेक्शन 22 अप्रैल को गाजियाबाद के कविनगर निवासी शोभित जैन पुत्र विजय जैन को अलॉट किया गया था। एक दिन बाद शोभित की मृत्यु होने पर उन्होंने 2450 रुपये कीमत का यह इंजेक्शन 25 हजार रुपये में बेचना तय कर दिया था ।
पकड़े गए आरोपी
नर्सिंग स्टाफ -अंकित शर्मा निवासी मल्लापुर रोहटा, आबिद खान निवासी सिसौला कला जानी
बाउंसर - रहीश पुत्र इस्लामुद्दीन निवासी ग्राम लखवाया थाना कंकरखेडा, गौरव कुमार निवासी चरला फलावदा, अमित कुमार निवासी बहादुरपुर परतापुर, रोहित कुमार निवासी हजूराबाद गढ़ी सिंघावली अहीर बागपत, महेंद्र सिंह निवासी चीलक शिकारपुर बुलंदशहर और अनिल कुमार निवासी उलेढा गुलावठी बुलंदशहर
आरोपी ने धोखे से निकलवा लिए थे चार इंजेक्शन
पुलिस ने जिन दो नर्सिंग स्टाफ को इंजेक्शन बेचते हुए पकड़ा है, उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रबंधन की आरंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि 22 अप्रैल को मरने वाले रोगी को केवल तीन इंजेक्शन लगने थे, जो उसे लगाए गए थे। आरोपी ने चार इंजेक्शन धोखे से निकलवा लिए थे। चौथा इंजेक्शन मरीज को नहीं लगा। इसे ही बेचने का प्रयास किया जा रहा था। प्रबंधन मामले की जांच कर रहा है और इसमें पुलिस और प्रशासन का पूरा सहयोग किया जाएगा। सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों की जानकारी होने पर बाउंसरों ने उनका प्रतिरोध नहीं किया था। - डॉ. अतुल कृष्ण, ट्रस्टी