मेरठ-सहारनपुर MLC चुनाव: दोनों सीटों पर फिर भाजपा का कब्जा, 2027 के लिए सियासी बढ़त का संकेत
मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर भाजपा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। नतीजों के बाद सपा और शिक्षक संगठनों ने मतदाता सूची व चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
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मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। इस परिणाम को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए राजनीतिक बढ़त के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और पारंपरिक शिक्षक संगठनों के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। भाजपा की जीत से शिक्षक और स्नातक सीटों पर लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले पारंपरिक शिक्षक संगठनों की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा तेज हो गई है।
दोनों सीटों पर भाजपा की जीत बरकरार
मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा और स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश गोयल ने वर्ष 2020 में जीत दर्ज की थी। इस बार भी दोनों सीटों पर भाजपा की जीत बरकरार रही। लगातार दूसरी बार दोनों सीटें जीतने से पार्टी को क्षेत्र में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है।
हालांकि, इन चुनावों के नतीजों को विधानसभा चुनाव के परिणामों का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनावों का मतदाता वर्ग विधानसभा चुनावों के मतदाता वर्ग से अलग होता है। इसके बावजूद राजनीतिक दल इन नतीजों को अपने संगठनात्मक प्रभाव और समर्थन के आकलन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
शर्मा गुट का लंबे समय तक रहा वर्चस्व
एक समय उत्तर प्रदेश की शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों पर गैर-राजनीतिक शिक्षक संगठनों का मजबूत प्रभाव था। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट के संस्थापक दिवंगत ओमप्रकाश शर्मा ने मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक सीट का करीब पांच दशक तक प्रतिनिधित्व किया और आठ बार जीत हासिल की।
स्नातक सीट पर भी शर्मा गुट के हेम सिंह पुंडीर चार बार विजयी रहे, जबकि बलबीर सिंह दबथुआ ने भी इस सीट पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को और भाजपा के दिनेश गोयल ने हेम सिंह पुंडीर को हराया था। इस परिणाम से पारंपरिक शिक्षक संगठनों के लंबे वर्चस्व को बड़ा झटका लगा। 2026 के चुनाव में भी भाजपा ने दोनों सीटें जीतकर अपना प्रभाव बरकरार रखा।
सपा ने लगाए मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर सपा समर्थकों के वोट नहीं बनने दिए। उनके मुताबिक, पिछले चुनाव में पार्टी को लगभग एक से डेढ़ हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार पार्टी दूसरे स्थान पर रही। उन्होंने कहा कि पार्टी का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
इसी तरह माध्यमिक शिक्षक संघ के ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद त्यागी ने वोट बनवाने से लेकर मतदान तक अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंडलायुक्त, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय चुनाव आयोग से शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने गैर-शिक्षकों से मतदान कराए जाने का आरोप भी लगाया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है। चुनावी प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों के संबंध में प्रशासन या निर्वाचन अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
शिक्षक संगठनों के बीच एकता नहीं बन पाई
चुनाव के दौरान शर्मा और ठकुराई गुट के पदाधिकारी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते रहे। खबर के अनुसार, हार की आशंका के बीच दोनों गुटों के बीच चुनावी गठबंधन की कोशिश भी हुई थी। हालांकि, शर्मा गुट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रमोद मिश्रा के भाजपा में शामिल होने के बाद यह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका।
दोनों सीटों पर भाजपा की लगातार दूसरी जीत ने शिक्षक संगठनों के सामने अपने राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक रणनीति पर पुनर्विचार की चुनौती खड़ी की है। वहीं, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इस परिणाम को क्षेत्र में अपने समर्थन के लिहाज से अहम मान सकती है।