बेसबब: अप्रोच रोड बह गई, नाव बंद कर दी.., आखिर कैसे चले रोजी रोटी, पुल पार करने को अब सीढ़ी का सहारा
गंगा नदी पर बने हस्तिनापुर पुल की अप्रोच सड़क बरसात में गंगा के तेज प्रवाह मेें बह गई थी। एक सप्ताह के भीतर इसे दुरुस्त करने का दावा किया गया था लेकिन यह अभी तक नहीं बनाई जा सकी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के बिजनौर और हस्तिनापुर को जोड़ने वाली अप्रोच रोड टूटने के बाद क्षेत्र के निवासियों पर रोजी रोटी का संकट आन पड़ा है। बरसात के महीने में करीब चार माह पहले हस्तिनापुर गंगा पुल की अप्रोच सड़क पानी में बह गई थी। तब से इस मार्ग का यातायात बंद है, जबकि सैकड़ों किसान व कर्मचारी रोजी रोटी के लिए रोजाना इस पुल से आते-जाते हैं। सड़क है नहीं, नाव बंद कर दी गई है। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने की बेबसी में अब राहगीरों ने सीढ़ी का सहारा लेना आरंभ कर दिया। किसान व कर्मचारी पहले सीढ़ी से पुल पर चढ़ते हैं और फिर वहां खड़े वाहनों से गंगा पुल पार कर लेते हैं।
स्टेट हाईवे बहसुमा-ठाकुरद्वारा पर गंगा नदी पर बने हस्तिनापुर पुल की अप्रोच सड़क बरसात में गंगा के तेज प्रवाह मेें बह गई थी। लोक निर्माण विभाग मेरठ ने एक सप्ताह में सड़क दुरुस्त करने का दावा किया था।
गंगा के पार मेरठ जनपद की सीमा के भीमकुंड, खेढ़ी, मनोहरपुर, बधावा, बधावी, शिरजेपुर, जमालपुर आदि करीब एक दर्जन गांवों के किसानों की हजारों बीघा खेती की जमीन गंगा के इधर बिजनौर की तरफ है। करीब तीन सौ की संख्या में सरकारी-गैरसरकारी कर्मियों को रोजाना गंगा के इधर-उधर आना-जाना पड़ता है। यातायात बंद होने के बाद सैकड़ों किसान और कर्मचारी रोजाना नाव के सहारे गंगा पार कर रहे थे। नाव पलटने से यह माध्यम भी बंद हो गया। अब यह नया माध्यम बनाया गया है।
यह भी पढ़ें: BIJNOR: बीबीए छात्र शामिक हत्याकांड में पुलिस ने किया बड़ा खुलासा, सामने आई हत्या की वजह
18 अक्तूबर डूब गई थी नाव
पुल की अप्रोच बहने से राहगीरों ने नाव को यातायात का माध्यम बना लिया था, लेकिन 18 अक्तूबर को नाव के डूबने के कारण वह भी बंद कर दी गई। नाव बंद होने के बाद पुल के निकटवर्ती गांवों के किसानों व कर्मचारियों को 10-20 किलोमीटर के सफर को बिजनौर बैराज से होकर करीब 100 किलोमीटर चलकर पूरा करना पड़ रहा है।
किसानों, मजदूरों व कर्मचारियों की परेशानी को देखते हुए हस्तिनापुर गंगा पुल के निकट रहने वाले पुजारी सतीशनाथ, दुकानदार कुलदीप सिंह आदि ने एक बड़ी सीढ़ी बनवाकर पुल पर चढ़ने उतरने के लिए लगा दी। अब इसी सीढ़ी के सहारे सैकड़ों किसान, मजदूर व कर्मचारी रोजाना इधर-उधर आ जा रहे हैं।
गंगा के रेत से धार रोकने का प्रयास
हस्तिनापुर गंगा पुल के निकट पानी में बही सड़क को फिर से बनाने का काम चींटी की चाल चल रहा है। बृहस्पतिवार को एक पोर्कलेन मशीन से गंगा के रेत का बंधा लगाकर पानी की धार को रोकने की कोशिश की जा रही थी। शुक्रवार को जमीन दलदली बताकर पोर्कलेन चालक ने काम नहीं किया।