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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Amar Ujala Special Report: Bhumafia unaware in Kasampur sold 30 million government land in Meerut

अमर उजाला एक्सक्लूसिव: अफसरों की मिलीभगत से बड़ा खेल, बेखौफ भूमाफिया ने बेच डाली 30 करोड़ की सरकारी जमीन

Wed, 08 Jul 2020 11:15 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 08 Jul 2020 11:15 AM IST
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Amar Ujala Special Report: Bhumafia unaware in Kasampur sold 30 million government land in Meerut
कासमपुर में तालाब की जमीन पर होती प्लाटिंग और बने मकान - फोटो : अमर उजाला

शासन-प्रशासन से बेखौफ भूमाफिया ने कासमपुर पहाड़ी क्षेत्र में 30 करोड़ से ज्यादा की सरकारी जमीन बेच डाली। तहसील प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से 10000 मीटर से ज्यादा सरकारी जमीन पर कब्जे होने के साथ बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई हैं। इसे लेकर कई बार शिकायतें हुईं। निगम और तहसील के अधिकारियों ने जमीन भी नापी। लेकिन उन्हें कब्जे में लेने के बजाय औपचारिकता पूरी कर दी गई। इसका नतीजा यह है कि अब भूमाफिया कंकरखेड़ा इलाके में खुलकर खेल रहे हैं।

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कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के कासमपुर पहाड़ी क्षेत्र में तीन गांव की करीब 16740 मीटर सरकारी जमीन है। सैन्य सीमा से सटे कासमपुर में नगला तहसील लाला मोहम्मदपुर और खुर्रमपुर की जमीन का रकबा है, जिसमें यह 16740 मीटर जमीन सरकारी है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यह समस्त जमीन बंजर तालाब आदि की है और नगर निगम के प्रबंधन में है। यानी इसके रखरखाव और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। इस जमीन के करीब 65 प्रतिशत हिस्से पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई हैं। माफिया जमीनों पर एक के बाद एक कब्जा कर बेचते गए। लेकिन तहसील और नगर निगम के अधिकारी जनता की शिकायतों को टालते चले गए।
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तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग
छावनी इलाके से सटी तालाब की भूमि को भी भूमाफिया ने नहीं बख्शा। जिम्मेदार सो रहे हैं और सरकारी जमीन पर कॉलोनियां काटी जा रही हैं। मंगलवार को नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार, लेखपाल राजकुमार, कुंवर पाल प्रवर्तन दल के साथ कासमपुर पहाड़ी क्षेत्र में जांच के लिए पहुंचे। इन्होंने यहां पाया कि तालाब की सरकारी भूमि पर प्लॉटिंग की जा रही है। निगम टीम ने अवैध कब्जे हटवाने के लिए जेसीबी मंगाई तो वहां मौजूद मिले व्यक्ति ने अपना नाम मामचंद पुत्र नन्हे निवासी अशोकपुरी बताकर इसका विरोध शुरू कर दिया। साथ ही तालाब की भूमि को अपनी पैतृक संपत्ति होने की बात कही। यही नहीं उसने अब से पहले भी इस जमीन पर 15-20 लोगों को प्लॉटिंग करके जमीन बेचना भी स्वीकार किया। जिन प्लॉटों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं।
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वहीं संपत्ति अधिकारी ने मामचंद को जमीन के अभिलेखों के साथ तहसील अधिकारियों से संपर्क करने को कहा। निगम टीम ने इसके अलावा रेन बसेरे के निकट सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बुलडोजर से गिरवा दिया। लेकिन हैरानी की बात है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले और बेचने के आरोपियों के खिलाफ न तो थाने में तहरीर दी और नहीं कोई नोटिस जारी किया। जिससे कहीं न कहीं नगर निगम और तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त का खेल होना सामने आ रहा है।

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बैनामा प्राइवेट जमीन का, कब्जा सरकारी पर
सरकारी जमीन को कब्जा कर बेचने वाले भूमाफिया सरकार को चूना लगाने के साथ जनता से भी धोखाधड़ी कर उन्हें प्राइवेट संपत्ति बताकर सरकारी संपत्ति बेच रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भूमाफिया लोगों को फंसाकर प्राइवेट व्यक्ति के नाम से दर्ज भूमि खसरा नंबर के नाम का बैनामा करते हैं और उनको सरकारी जमीन पर प्राइवेट खसरा नंबर दर्शाते हुए कब्जा देते हैं। इसी प्रकार सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। इस खेल में तहसील के लेखपाल व अन्य अधिकारी और नगर निगम के संपत्ति विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भूमाफिया से मिलीभगत कर भूमि सत्यापन की रिपोर्ट में गड़बड़झाला करते हैं। कई बार अधिकारियों ने स्वयं को फंसता देख कर यह भी कहा है कि जब बिल्डिंग बन जाती है तो उसकी भूमि की नाप होना संभव नहीं होता है। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर भूमाफिया सरकारी जमीनों पर कब्जे करते चले आ रहे हैं।

तहसील की जिम्मेदारी है
नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि यह जमीन नगर निगम के प्रबंधन में है। जब भी स्थानीय लोग सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत करते हैं तो निगम की टीम कब्जे हटवाने पहुंचती है। सरकारी जमीन कहां तक है इसको नापने की जिम्मेदारी तहसील के लेखपाल और अधिकारियों की है। कई बार उन्होंने जमीन की नाप भी की है जहां तक वह सरकारी जमीन बताते हैं उसी को हमें मानना पड़ता है। तालाब की जमीन पर और अन्य जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे किए जा रहे हैं उनको हटवा दिया गया है। जमीन की नाप कराने के लिए तहसील को पत्र लिखा जाएगा।

सरकारी भूमि (कासमपुर पहाड़ी क्षेत्र में)
खसरा नंबर रकबा (मीटर में)

138/2 1640
136/1 3410
168 250
136/3 760
136/2 510
137 4170
138/3 250
1066 2910
31 1260
33 1580

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