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भौमवती अमावस्या पर पितरों को तर्पण
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भौमवती अमावस्या आज, पितरों के तर्पण के लिए शुभ
मेरठ। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को जब चंद्रमा घटते-घटते पूरी तरह से दिखाई नहीं देता है, उस तिथि को अमावस्या कहते हैं। वैशाख माह हिंदू वर्ष का दूसरा महीना होता है। इस बार वैशाख मास की अमावस्या तिथि 11 मई यानी मंगलवार को पड़ रही है। मंगल को भौम भी कहा जाता है। इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इसी माह से त्रेता युग शुरू हुआ था। वैशाख अमावस्या को धर्म-कर्म और पितरों के तर्पण के लिए बेहद शुभ माना जाता है। अमावस्या तिथि को दान, स्नान पितृ तर्पण और कालसर्प निवारण आदि के लिए भी बहुत उत्तम माना जाता है। शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को पितरों को मोक्ष दिलाने वाली अमावस्या कहा जाता है। इसका सुतवाई अमावस्या भी नाम है।
इंडियन काउंसिल ऑफ अस्ट्रोलोजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि आज के दिन सौभाग्य और शोभन योग में पितरों का पूजन और दान अनंत गुना फल देने वाला होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का दिन हो, सूर्य और चंद्रमा जब एक ही राशि में या फिर एक-दूसरे के पास वाली राशि में हों तभी यह अमावस्या पड़ती है। इस बार इस तिथि पर मंगलवार को चंद्रमा और सूर्य दोनों ग्रह मेष राशि में विराजमान रहेंगे।
स्नान का भी विशेष महत्व
अमावस्या की उदया तिथि 11 मई को प्राप्त हो रही है। ऐसे में वैशाख अमावस्या का स्नान 11 मई को सुबह होगा। इस वर्ष हर ओर कोरोना महामारी का प्रकोप है। ऐसे में गंगा आदि तीर्थों पर स्नान को जाना संभव नहीं है। अत: आप घर पर ही जल में गंगा जल डालकर स्नान कर लें। उसके बाद जप, दान और पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
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मेरठ। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को जब चंद्रमा घटते-घटते पूरी तरह से दिखाई नहीं देता है, उस तिथि को अमावस्या कहते हैं। वैशाख माह हिंदू वर्ष का दूसरा महीना होता है। इस बार वैशाख मास की अमावस्या तिथि 11 मई यानी मंगलवार को पड़ रही है। मंगल को भौम भी कहा जाता है। इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इसी माह से त्रेता युग शुरू हुआ था। वैशाख अमावस्या को धर्म-कर्म और पितरों के तर्पण के लिए बेहद शुभ माना जाता है। अमावस्या तिथि को दान, स्नान पितृ तर्पण और कालसर्प निवारण आदि के लिए भी बहुत उत्तम माना जाता है। शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को पितरों को मोक्ष दिलाने वाली अमावस्या कहा जाता है। इसका सुतवाई अमावस्या भी नाम है।
इंडियन काउंसिल ऑफ अस्ट्रोलोजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि आज के दिन सौभाग्य और शोभन योग में पितरों का पूजन और दान अनंत गुना फल देने वाला होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का दिन हो, सूर्य और चंद्रमा जब एक ही राशि में या फिर एक-दूसरे के पास वाली राशि में हों तभी यह अमावस्या पड़ती है। इस बार इस तिथि पर मंगलवार को चंद्रमा और सूर्य दोनों ग्रह मेष राशि में विराजमान रहेंगे।
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स्नान का भी विशेष महत्व
अमावस्या की उदया तिथि 11 मई को प्राप्त हो रही है। ऐसे में वैशाख अमावस्या का स्नान 11 मई को सुबह होगा। इस वर्ष हर ओर कोरोना महामारी का प्रकोप है। ऐसे में गंगा आदि तीर्थों पर स्नान को जाना संभव नहीं है। अत: आप घर पर ही जल में गंगा जल डालकर स्नान कर लें। उसके बाद जप, दान और पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
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