सहारनपुर : चार हजार वर्ष पुरानी थीं सकतपुर में मिली चूड़िया और तांबे की कुल्हाड़ी
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रामपुर मनिहारान तहसील के गांव सकतपुर में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में मिले अवशेषों की जांच पूरी हो चुकी है। आगरा पुरातत्व विभाग के अधीक्षक डा. भुवन विक्रम ने फोन पर बताया कि गांव सकतपुर में उत्खनन के दौरान मिले अवशेष जांच में चार हजार वर्ष पूर्व के मिले हैं। यह गंगा घाटी सभ्यता ईसा पूर्व 1945 के हैं। उन्होंने बताया कि अवशेषों की जांच से पता चला है कि उस समय के लोग चित्रकारी व कलाकारी में निपुण थे।
गांव सकतपुर में आगरा पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए उत्खनन के दौरान ताम्र पात्र, पशु आकृति, सिल बट्टे, चूड़ियां, मिट्टी के बर्तन जिन पर शानदार चित्रकारी, धातु गलाने की भट्ठियां, विशालकाय जानवर का जबड़ा, मृदभांड, हस्तकुठार, श्वांग बाल, खिलौने, मुष्टिका, दाल के बीज, तांबे की कुल्हाड़ी आदि मिले थे जिनको जांच के लिए आगरा लैब भेजा गया था।
पुरातत्व विभाग के अधीक्षक डा. भुवन विक्रम ने बताया कि उत्खनन में मिले सभी अवशेष चार हजार वर्ष पुराने गंगा घाटी सभ्यता व 1945 ईसा पूर्व के पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि चार हजार वर्ष पूर्व में भी लोग चित्रकारी में निपुण थे। धातु गलाने की कला भी उनके पास मौजूद थी खाने पीने की वस्तुओं का भंडारण करने के लिए वह मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करते थे।
तहसील रामपुर मनिहारान के गांव सकतपुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा की टीम ने एक वर्ष पूर्व पांच माह तक चले उत्खनन के दौरान मिले अवशेषों को पुरातत्वविद आगरा ले गये थे। पुरातत्वविदों द्वारा 141 दिनों तक चले उत्खनन से रामपुर मनिहारान का गांव सकतपुर काफी सुर्खियों में रहा है।
गौरतलब है कि रामपुर मनिहारान के गांव सकतपुर में दो वर्ष पूर्व एक किसान के खेत में 17 मई 2016 को जब ईंट पथाई का कार्य करने वाले मजदूर मिट्टी की खुदाई कर रहे थे तब मजदूरों को तांबे की कुल्हाड़ी और छह मृदभांड हस्तकुठार मिले थे।
उस समय पुरातत्व विभाग की टीम ने कुल्हाड़ी व मृदभांड हस्तकुठार को अपने कब्जे में लेकर आगरा लैब में भेज दिया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा ने जांच के बाद पाया था कि 6 तांबे के प्राचीन कालीन हस्तकुठार मृदभांड परंपरा संस्कृति से संबंधित है और जो चार हजार वर्ष पुरानी है।
23 फरवरी 2017 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा पुरातत्वविदों के दल ने गांव सकतपुर में पहुंचकर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग आगरा के अधीक्षक डा. भुवन विक्रम के निर्देशन में टीम ने किसान के खेत में उस स्थान पर ट्रेंच बनाकर उत्खनन का कार्य शुरू कराया था उसके बाद 20 ट्रेंचों पर करीब 141 दिनों तक चले उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को उत्खनन में अवशेष मिले थे।
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