बागपत: पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी के भाई की तिहाड़ जेल में मौत, मर्डर केस में मिली थी उम्रकैद की सजा
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बागपत की सियासत में सतेंद्र और हरेंद्र दोनों भाइयों ने एक साथ चुनाव भी लड़ा था। साल 1993 में जनता दल के टिकट पर सतेंद्र सोलंकी ने बरनावा और इंद्रपाल ढाका ने खेकड़ा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राजनीति में हाथ आजमाया, लेकिन दोनों ही इस चुनाव में हार गए थे।
ढिकौली गांव के रहने वाले इंद्रपाल ढाका ने एजुकेशन विषय से पीएचडी की। बागपत जिले की खेकड़ा विधानसभा सीट से ढाका ने राजनीतिक पारी की शुरुआत की। साल 1993 में वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे। तब भाजपा के रूप चौधरी विधायक चुने गए। मदन भैया दूसरे और इंद्रपाल ढाका तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद ढाका गांव के स्कूल के मैनेजर रहे, लेकिन दूसरा कोई चुनाव नहीं लड़ा।
बिनौली ब्लॉक के जिवाना गुलियान गांव निवासी सतेंद्र सोलंकी को साल 1993 में जनता दल ने बरनावा से टिकट दिया। नामांकन के बाद मतदान से कुछ दिन पहले ही जनता दल ने उनसे समर्थन वापस लेकर निर्दलीय सुधीर राठी को समर्थन दे दिया। सोलंकी जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के त्रिपाल धामा के सामने वह करीब 187 वोट से हार गए। इस तरह वह पहली बार विधायक बनते-बनते रह गए थे।
सोलंकी को साल 2007 में बरनावा सीट से रालोद ने टिकट दिया। यहां से पहली बार चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे। नए परिसीमन में हुए साल 2012 के चुनाव में बरनावा सीट खत्म हो गई और बड़ौत नई सीट बनीं, लेकिन रालोद ने दोबारा से सोलंकी को टिकट नहीं दिया।
सोलंकी ने साल 2017 के चुनाव में बसपा ज्वाइन कर ली। बसपा ने उन्हें मेरठ कैंट से टिकट दिया, लेकिन वह हार गए। इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के सामने वह भाजपा में शामिल हुए।
ससुर और साले रहे छपरौली से विधायक
सतेंद्र सोलंकी के ससुर पूर्व विधायक डॉ. महक सिंह की गिनती रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के करीबियों में होती है। इसके अलावा सोलंकी के साले अजय कुमार भी छपरौली सीट से विधायक रह चुके हैं।
बिनौली क्षेत्र की राजनीति में मिले कई पद
डॉ. इंद्रपाल हत्याकांड के दूसरे आरोपी हरेंद्र बिनौली ब्लॉक के साल 2000 में प्रमुख बने। इसके बाद साल 2005 से 2010 तक हरेंद्र की मां पवन कौर भी ब्लॉक प्रमुख रही। वर्तमान में हरेंद्र सोलंकी की पत्नी सुधा सोलंकी जिला पंचायत सदस्य हैं। हरेंद्र और सतेंद्र का परिवार मेरठ में रहता है।