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खास रिपोर्ट: यहां दुर्योधन ने पांडवों को जलाकर मारने की रची थी साजिश, ये सुरंग देती है लाक्षागृह की गवाही

Fri, 04 Aug 2023 09:49 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 04 Aug 2023 09:49 PM IST
सार

Baghpat News : यह वहीं महाभारत कालीन लाक्षागृह का टीला है, जहां कौरवों ने पांडवों को जिंदा जलाने का षड़यंत्र रचा था।

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Baghpat: Kauravas conspired to burn Pandavas alive on Lakshagraha mound during Mahabharata period
महाभारत कालीन लाक्षाग्रह का टीला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागपत के बरनावा में महाभारत कालीन लाक्षागृह के अवशेष आज भी स्थित है। इस ऐतिहासिक धरोहर को दूर-दूर से लोग देखने आते हैं। यह वहीं महाभारत कालीन लाक्षागृह का टीला है, जहां कौरवों ने पांडवों को जिंदा जलाने का षड़यंत्र रचा था। लेकिन विदुर की नीति से पांडव सुरंग के रास्ते सुरक्षित निकल गए थे। 100 फीट ऊंचे और 30 एकड़ भूमि क्षेत्रफल में फैले टीले के रूप में वो अवशेष आज भी मौजूद हैं।

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सुरंग देती है लाक्षागृह की गवाही
महाभारतकाल में बरनावा गांव को वार्णावर्त कहा जाता था। बरनावा गांव में लाक्षागृह कृष्णा और हिंडन नदी के संगम पर स्थित है। यहां दुर्योधन ने पांडवों को जिंदा जलाकर मारने के लिए लाख, मोम आदि ज्वलनशील पदार्थ से एक महल तैयार कराया। पांडव इसमें रहने के लिए गए तो विदुर ने उन्हें दुर्योधन की इस साजिश से अवगत कराया और पांडव लाक्षागृह से एक सुरंग के रास्ते सुरक्षित बाहर निकल गए और लाक्षागृह जल गया।

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मिट्टी कटान होने के कारण घट रहा टीले का आकार 
बरनावा गांव के मास्टर अरुण त्यागी, सुभाष शर्मा का कहना है कि मेरठ-बड़ौत मार्ग पर सड़क किनारे स्थित यह टीला बरसात के दिनों में मिट्टी कटान होने के कारण घटता जा रहा है। इसके चारों ओर दीवार होनी चाहिए ताकि किसी भी कारण से मिट्टी का कटान न हो सके। यदि कटान इसी तरह होता रहा तो आने वाले समय में यह ऐतिहासिक धरोहर समाप्त हो जाएगी। 

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ब्रह्मऋषि कृष्णदत महाराज ने की गुरुकुल की स्थापना
महाभारत कालीन ऐतिहासिक लाक्षाग्रह टीले पर पूर्व जन्म श्रंगी ऋषि कृष्णदत्त महाराज ने वर्ष 1977 में गुरुकुल की स्थापना की थी। अब यहां पर श्री महानंद चलता है। प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने बताया कि इस समय विद्यालय में यूपी, हरियाणा, छतीसगढ़, दिल्ली आदि विभिन्न प्रान्तों से 182 बच्चे संस्कृत के साथ वेदों और शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण कर रहे है। 

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उन्होंने बताया कि विद्यालय में पांच यज्ञशालाएं हैं। जिन पर वर्ष भर में श्रावणी पर्व व गुरुकुल संस्थापक ब्रह्मऋषि कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव पर सामवेद पारायण महायज्ञ व फाल्गुन मास में आठ दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ होता है।

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