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मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगा: बाबा हरिकिशन को नामजद करने पर हुआ था जमकर बखेड़ा

Thu, 30 May 2019 01:11 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 30 May 2019 01:11 AM IST
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Baba Harikishan was made accused in the Muzaffarnagar riot case and there was ruckus in the city
मुजफ्फरनगर दंगा 2013: फाइल फोटो

सांप्रदायिक दंगे के मामले में बरी हुए गांव लिसाढ़ निवासी 12 लोगों के मामले में दी गई तहरीर को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। सुलेमान द्वारा दी गई तहरीर में गठवाला खाप के मुखिया बाबा हरिकिशन समेत 25 लोगों को नामजद व 15-20 अज्ञात को आरोपी बनाए जाने के खिलाफ ग्रामीण आक्रोशित हो उठे थे। इस पर आईजी आशुतोष पांडेय ने एसआईटी से इस चर्चित मामले की जांच कराई थी। जिसके बाद बाबा हरिकिशन समेत 12 लोगों को क्लीनचिट देते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

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सात सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान गांव लिसाढ़ से भी मुस्लिम समुदाय के लोग पलायन कर गए थे। गांव से पलायन करने वाले सुलेमान ने 16 सितंबर 2013 को फुगाना थाने में तहरीर देकर अपने घर पर भीड़ द्वारा हमला कर आगजनी, तोड़फोड़ व लूटपाट करने का आरोप लगाया था। तहरीर में कुल 25 लोगों को नामजद व 15-20 अज्ञात को आरोपी बनाया गया था। उक्त तहरीर में बाबा हरिकिशन व उनके बेटे राजेंद्र का नाम शामिल किए जाने पर ग्रामीणों में आक्रोश भड़क उठा था। ग्रामीणों ने इसे फर्जी मामला बताते हुए जमकर हंगामा किया था, जिस पर दंगा कंट्रोल के लिए जिले में भेजे गए आईजी आशुतोष पांडेय ने उनसे बात कर मामले की एसआईटी से जांच कराई थी। 
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जांच के बाद एसआईटी ने इस चर्चित मामले से बाबा हरिकिशन व उनके बेटे राजेंद्र के साथ ही 14 लोगों को क्लीन चिट दे दी थी। वहीं, दो आरोपियों के नाम एसआईटी की जांच में सामने आए, जिसके बाद कुल 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करने के बाद उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। सेशन सुपुर्द होने के बाद मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-12 संजीव कुमार तिवारी के समक्ष हुई, जिन्होंने साक्ष्यों के अभाव में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि एक आरोपी ऋषिदेव की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।

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इनके खिलाफ दी गई थी तहरीर
गांव लिसाढ़ निवासी सुलेमान द्वारा जिन ग्रामीणों को तहरीर में नामजद किया गया था, उनमें गठवाला खाप के मुखिया बाबा हरिकिशन व उनके बेटे राजेंद्र के साथ ही प्रमोद मलिक, नरेंद्र उर्फ लाला, अनुज, अमित, ब्रह्म, बालिंद्र, राजकुमार, सुरेंद्र, ऋषिदेव, कृष्ण, नीशू, संजीव, रविंद्र, राजेंद्र, बिजेंद्र, विरेंद्र, मोहित, राजू, संजीव, काला, अजीत प्रधान, बबलू व सुनील को नामजद किया गया था।

इनके खिलाफ दर्ज की गई थी रिपोर्ट
एसआईटी की जांच के बाद कुल 13 लोगों नरेंद्र उर्फ लाला, धर्मेंद्र उर्फ काला, विजेंद्र, राजेंद्र, अनुज, अमित, ब्रह्म, सुरेंद्र उर्फ बाबू, कृष्णा, नीशू, शौकेंद्र व बिट्टू उर्फ अरुण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और बाद में उन्हीं के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई थी। इनमें बिट्टू उर्फ अरुण और शौकेंद्र के नाम एसआईटी की जांच में सामने आए थे, जिसके बाद इन्हें आरोपियों में शामिल किया गया था।

सुनवाई में तीनों गवाह हो गए पक्षद्रोही
गांव लिसाढ़ में सुलेमान द्वारा पंजीकृत कराए गए लूटपाट, आगजनी व तोड़फोड़ के मुकदमे में कुल तीन गवाह थे। इनमें खुद वादी सुलेमान के साथ ही लिसाढ़ निवासी आजम व इस्लाम शामिल थे। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी के समक्ष हुई मुकदमे की सुनवाई के दौरान उक्त तीनों गवाह पक्षद्रोही हो गए। इसके चलते न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

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