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Meerut News: आजाद अधिकार सेना ने दलितों की जमीन कब्जाने वालों पर की कार्रवाई की मांग
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आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेन्द्र सिंह राणा ने गांव बेला के गांव वालों से मि
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। आजाद अधिकार सेना ने मवाना क्षेत्र में भूमाफिया द्वारा दलितों और गरीबों की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में फतेहपुर प्रेम के माजरा बेला, छोटी चामरोधी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिले। इस दौरान 60 से अधिक दलित और गरीब परिवारों ने आरोप लगाया कि उनकी लगभग सोलह सौ बीघा ग्राम समुदाय की जमीन और गंगा किनारे की भूमि पर भूमाफिया ने वर्षों से अवैध कब्जा जमा रखा है। आजाद अधिकार सेना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती है तो संगठन के नेतृत्व में गांव के दलित परिवार 9 दिसंबर को सुबह 11 बजे जिलाधिकारी कार्यालय मेरठ पहुंचकर धरना प्रदर्शन करेंगे।
संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि पीड़ित परिवार अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय से हैं और उनके पास अपनी भूमि के वैध खतौनी-खसरा अभिलेख मौजूद हैं। इसके बावजूद कब्जाधारी इन भूखंडों को ठेके पर देकर करोड़ों रुपये की सब्जी की खेती कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन भूमाफिया द्वारा आसपास के पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले केमिकल को सीधे गंगा नदी में प्रवाहित कर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पीड़ित परिवारों ने बताया कि उन्हें लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है और स्थानीय प्रशासन में दबंगों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। लेखपाल सहित कुछ तहसील अधिकारी दबाव में आकर निष्पक्ष जांच करने से कतरा रहे हैं। भूमाफिया को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी शिकायत भेजी गई है। यह मामला क्षेत्र में भूमाफियाओं के बढ़ते आतंक और प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाता है।
आजाद अधिकार सेना की प्रमुख मांगें
सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) एक्ट और पर्यावरण प्रदूषण अधिनियम के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
16 सौ बीघा जमीन को तुरंत कब्जा मुक्त कराकर मूल मालिकों को वापस दिलाया जाए।
गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने वाले अवैध पोल्ट्री फार्मों और केमिकलयुक्त खेती पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पीड़ित दलित परिवारों को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
लेखपाल और अन्य संलिप्त तहसील अधिकारियों की उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाए।
पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए।
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मवाना। आजाद अधिकार सेना ने मवाना क्षेत्र में भूमाफिया द्वारा दलितों और गरीबों की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में फतेहपुर प्रेम के माजरा बेला, छोटी चामरोधी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिले। इस दौरान 60 से अधिक दलित और गरीब परिवारों ने आरोप लगाया कि उनकी लगभग सोलह सौ बीघा ग्राम समुदाय की जमीन और गंगा किनारे की भूमि पर भूमाफिया ने वर्षों से अवैध कब्जा जमा रखा है। आजाद अधिकार सेना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती है तो संगठन के नेतृत्व में गांव के दलित परिवार 9 दिसंबर को सुबह 11 बजे जिलाधिकारी कार्यालय मेरठ पहुंचकर धरना प्रदर्शन करेंगे।
संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि पीड़ित परिवार अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय से हैं और उनके पास अपनी भूमि के वैध खतौनी-खसरा अभिलेख मौजूद हैं। इसके बावजूद कब्जाधारी इन भूखंडों को ठेके पर देकर करोड़ों रुपये की सब्जी की खेती कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन भूमाफिया द्वारा आसपास के पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले केमिकल को सीधे गंगा नदी में प्रवाहित कर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पीड़ित परिवारों ने बताया कि उन्हें लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है और स्थानीय प्रशासन में दबंगों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। लेखपाल सहित कुछ तहसील अधिकारी दबाव में आकर निष्पक्ष जांच करने से कतरा रहे हैं। भूमाफिया को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी शिकायत भेजी गई है। यह मामला क्षेत्र में भूमाफियाओं के बढ़ते आतंक और प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाता है।
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आजाद अधिकार सेना की प्रमुख मांगें
सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) एक्ट और पर्यावरण प्रदूषण अधिनियम के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
16 सौ बीघा जमीन को तुरंत कब्जा मुक्त कराकर मूल मालिकों को वापस दिलाया जाए।
गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने वाले अवैध पोल्ट्री फार्मों और केमिकलयुक्त खेती पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पीड़ित दलित परिवारों को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
लेखपाल और अन्य संलिप्त तहसील अधिकारियों की उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाए।
पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए।